Tamil Nadu Politics: कब तक चलेगा तमिलनाडु का सियासी सस्पेंस, नई सरकार के लिए कितने दिन इंतजार कर सकते हैं राज्यपाल?
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में विजय और उनकी पार्टी टीवीके को सरकार बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. आइए जानते हैं नई सरकार के लिए कितने दिन इंतजार कर सकते हैं राज्यपाल.

- तमिलनाडु में सरकार गठन अनिश्चित, अभिनेता विजय ने किया समर्थन पत्र जमा
- राज्यपाल की है विवेक की शक्ति, संविधान में समय-सीमा का उल्लेख नहीं
- त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी/गठबंधन को करते हैं आमंत्रित
- फ्लोर टेस्ट सदन में होता है, शपथ के बाद मिलता है 7-15 दिन का समय
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के कई दिन बाद भी राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है. अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी टीवीके सरकार बनाने को लेकर चल रहे सस्पेंस के बीच जूझ रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक विजय ने अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) के समर्थन पत्र सौंप दिए हैं. इससे गठबंधन की सीटों की संख्या 116 हो गई है. लेकिन यह अभी भी बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर है. इसी बीच आइए जानते हैं कि नई सरकार के लिए कितने दिन इंतजार कर सकते हैं राज्यपाल.
संविधान में कोई तय समय सीमा नहीं
भारतीय संविधान के तहत ऐसी कोई तय समय सीमा नहीं है जिसके अंदर राज्यपाल को किसी पार्टी या फिर गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना ही हो. अनुच्छेद 164 राज्यपाल को मुख्यमंत्री नियुक्त करने का अधिकार देता है. इसी के साथ अनुच्छेद 163 उन स्थितियों में सीमित विवेकाधीन शक्तियां देता है जहां किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता. इसे आमतौर पर त्रिशंकु विधानसभा कहा जाता है. ऐसी स्थिति में राज्यपाल को यह तय करना होता है कि कौन सा राजनीतिक नेता सबसे ज्यादा स्थिर सरकार दे सकता है.
राज्यपाल नहीं कर सकते देरी
हालांकि कोई सख्त समय सीमा नहीं है लेकिन इसके बावजूद भी राज्यपाल से यह उम्मीद की जाती है कि वह उस समय सीमा के अंदर काम करें जिसे अदालत उचित समय बताती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि लंबे समय तक देरी करना ठीक नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे राजनीतिक अस्थिरता, पर्दे के पीछे की सौदेबाजी या फिर विधायकों के बीच कथित हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा मिल सकता है.
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त्रिशंकु विधानसभा में क्या होता है?
राज्यपाल सबसे पहले या तो सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करते हैं या फिर चुनाव से पहले या चुनाव के बाद बने ऐसे गठबंधन को जो बहुमत का दावा कर रहा हो. अगर आंकड़ों को लेकर कोई संदेह बना रहता है तो राज्यपाल विधायकों से समर्थन पत्र मांग सकते हैं. इतना ही नहीं बल्कि राज्यपाल समर्थन की पुष्टि के लिए विधायकों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए भी कह सकते हैं.
फ्लोर टेस्ट का महत्व
मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद भी असली संवैधानिक परीक्षा विधानसभा के अंदर फ्लोर टेस्ट के जरिए होती है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है कि बहुमत सदन के पटल पर साबित होना चाहिए ना कि राजभवन के अंदर.
आमतौर पर एक बार सरकार के शपथ लेने के बाद राज्यपाल विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए लगभग 7 से 15 दिन का समय देते हैं. कुछ मामलों में अदालत या फिर राज्यपाल थोड़ा ज्यादा समय दे सकते हैं. लेकिन यह 30 दिन से ज्यादा बिल्कुल नहीं होता.
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