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स्नीकर शूज आज हर किसी के पैरों में नजर आते हैं... क्या आप जानते हैं ये जूते क्यों बनाए गए थे?

स्नीकर्स शब्द का पहली बार प्रयोग एन. डब्लू. आयर एंड संस कंपनी के एडवरटाइजिंग एजेंट हेनरी नेल्सन ने किया था. वहीं 1887 में बोस्टन जर्नल ने जब रबर के सोल वाले जूते पहने तो उन्हें स्नीकर कहा जाने लगा.

स्नीकर शूज आज फैशन का ट्रेंड है. हर दूसरा आदमी आपको इन्हीं जूतों में नज़र आएगा. फॉर्मल शूज या लेदर शूज से काफी ज्यादा मार्केट में डिमांग आज स्नीकर शूज की है. स्नीकर शूज को और भी कई नामों से जाना जाता है. इन्हें पंप शू, टेनिस शू, ट्रेनर शू, रनिंग शू और पीटी शूज जैसे नामों से जाना जाता है. ये जूते आज कुछ सौ से लेकर कई लाख रुपए तक में बिक रहे हैं. लेकिन इन जूतों को पहनते वक्त क्या आपके दिमाग ये सवाल नहीं आता कि आखिर इन्हें किसने बनाया होगा और जब लेदर के जूतों से काम हो जा रहा था तो आखिर इन रबर के जूतों को क्यों बनाया गया. इस आर्टिकल में आज हम आपके इन्ही सवालों का जवाब लेकर आए हैं.

पहली बार स्नीकर शब्द का प्रयोग कब हुआ

स्नीकर्स शब्द का पहली बार प्रयोग तब हुआ जब जूतों की सोल में रबर लगाया गया. दरअसल, एक कंपनी जिसका नाम एन. डब्लू. आयर एंड संस था उसके एडवरटाइजिंग एजेंट हेनरी नेल्सन ने पहली बार स्नीकर शब्द का प्रयोग किया. सबसे पहले साल 1887 में बोस्टन जर्नल ने इस तरह के रबर के सोल वाले जूते पहने जिन्हें स्नीकर कहा जाने लगा.

क्यों बनाए गए स्नीकर्स

स्नीकर्स जूतों को बनाने के पीछे सबसे बड़ी वजह एथलीट थे. इन जूतों को इस तरह से बनाया गया था कि यह दौड़ते समय घास पर ज्यादा फिसलें नहीं और इन्हें पहनकर खिलाड़ी बड़े आराम से टेनिस और अन्य खेल खेल सकें. इसके साथ ही वह रनिंग कर सकें और जिम में भी इनका इस्तेमाल कर सकें. सबसे अच्छी बात की रबर की सोल होने की वजह से इन जूतों से आवाज भी नहीं आती. 

आम लोगों तक कैसे पहुंचा ये जूता

बीसवीं शताब्दी के आसपास जब बाजार में एडिडास, नाइकी और प्यूमा जैसी कंपनियां आ चुकी थीं तो उन्होंने खिलाड़ियों के द्वारा इस्तेमाल होने वाले इन स्नीकर्स जूतों को आम लोगों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया. इन्होंने इन जूतों में थोड़े से और डिजाइन ऐड किए, इन्हें थोड़ा और ज्यादा कलरफुल बनाया और बाजार में उतार दिया. देखते ही देखते यह जूते बाजार में छा गए और लोग लेदर वाले जूतों की जगह इनका इस्तेमाल करने लगे. आज भी स्नीकर्स की बात आती है तो उन में नाइकी जैसी कंपनियां नंबर वन हैं.

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