भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे छोटी लड़ाई, इससे पहले इतने दिन तक चला था युद्ध
Longest War Between India And Pakistan: भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हमेशा से रहा है. हाल ही में हुआ हमला फिलहाल खत्म हो गया है. चलिए जानें कि दोनों देशों के बीच आखिरी लंबी लड़ाई कौन सी थी.

भारतीय सेना ने पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस हमले में POK में आतंकवादियों के नौ ठिकानों पर बमबारी हुई थी. पहलगाम हमले से पूरा देश दहल गया था, इसीलिए तो सेना ने बदला लेने के लिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था, जिस पर हर भारतीय को गर्व है. इसके बाद बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के ऊपर ड्रोन के जरिए हमले शुरू कर दिए थे, जिसका भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया और पड़ोसी मुल्क के लगभग सारे ड्रोन खत्म कर दिए थे. ये पहली बार है जब भारत ने पाकिस्तान के साथ इतनी छोटी लड़ाई लड़ी जो कि सिर्फ 4 दिन में ही खत्म हो गई. आइए जानें कि पाकिस्तान के साथ भारत ने आखिरी लड़ाई कौन सी लड़ी थी और यह कितने दिन चली थी.
भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे लंबी लड़ाई
भारत और पाकिस्तान के बीच कभी भी अच्छे संबंध नहीं रहे हैं. हमेशा पाकिस्तान ने भारत को धोखा ही दिया है. भले ही पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में बढ़े हुए तनाव को आधिकारिक तौर पर युद्ध का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन यह किसी जंग से कम भी नहीं था. भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी लड़ाई 1999 में हुए कारगिल संघर्ष को माना जाता है. यह जंग 85 दिनों तक चली थी. पाकिस्तानी सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने LOC पार करके भारत की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी. इस दौरान भारतीय जवानों ने न सिर्फ बुजदिल पाकिस्तान को धूल चटाई बल्कि इतिहास में ऐसी मिसाल पेश की जो इतिहास में अमर हो गई.
पाक की कायराना हरकत हुई फेल
इस लड़ाई की शुरुआत 3 मई 1999 को हुई थी, जब पाकिस्तानियों ने कारगिल की पहाड़ियों पर 5000 से भी ज्यादा सैनिकों के साथ घुसपैठ कर दी थी. जब भारत सरकार को इस बात की खबर मिली तो भारत की तरफ से ऑपरेशन विजय चलाया गया था. पाकिस्तान का दावा था कि इस लड़ाई में सभी कश्मीरी उग्रवादी शामिल हैं, लेकिन युद्ध में जो दस्तावेज बरामद हुए और पाकिस्तानी नेताओं की बयानबाजी से यह साफ हो गया कि उनकी सेना इसमें पूर्णं रूप से मिली हुई थी. इस युद्ध में पाकिस्तान का मकसद यह था कि भारत के सियाचिन ग्लेशियर की लाइफ लाइन NH 1 D को किसी तरह से काट दिया जाए और उस पर कब्जा जमा लिया जाए.
बोफोर्स तोप ने बदल दिया लड़ाई का रुख
पाकिस्तान उन पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमाना चाहता था, जहां से लद्दाख जाने वाला सामान के काफिलों की आवाजाही रोक दे और मजबूरी में आकर भारत को सियाचिन छोड़ना पड़ जाए. साल 1984 में परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान की कमांडो फोर्स में मेजर हुआ करते थे, उनको यह बात नहीं पसंद आई थी कि भारत ने सियाचिन पर कब्जा कर लिया. उन्होंने कई बार उस जगह को खाली कराने की कोशिश की लेकिन मंसूबे नाकाम रहे. कारगिल का युद्ध शुरू में भारत के मुश्किल हो रहा था, लेकिन फिर बोफोर्स तोप ने पूरी कहानी बदलकर रख दी. इसके निशाने इतने सटीक और भयानक थे कि पूरी की पूरी पाकिस्तानी चौकी तबाह हो जाती थी. यह बात बिल्कुल सही है कि इस युद्ध में देश ने बहुत कुछ खोया लेकिन पाकिस्तान को बर्बाद करके ही दम लिया.
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Source: IOCL























