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आम आदमी पार्टी में आने से पहले क्या करते थे संदीप पाठक, कितनी मिलती थी सैलरी?

आम आदमी पार्टी के दिग्गज रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने अब नई सियासी राह चुनते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है. आइए जानें कि आप ज्वाइन करने से पहले वे क्या थे और सैलरी कितनी थी.

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  • संदीप पाठक एक गांव से निकलकर बने ऑक्सफोर्ड-MIT के रिसर्चर.
  • राजनीति में आने से पहले IIT दिल्ली में थे प्रोफेसर.
  • पंजाब चुनाव में AAP की जीत के पीछे थे रणनीतिकार.
  • अब आम आदमी पार्टी छोड़कर थामा भाजपा का दामन.

राजनीति की बिसात पर कब कौन सा मोहरा अपनी जगह बदल ले, यह कहना मुश्किल होता है. आम आदमी पार्टी के दिग्गज रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने अब नई सियासी राह चुनते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नेता बनने से पहले संदीप पाठक का जीवन कितना अलग था? आइए जानें कि आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने से पहले संदीप पाठक क्या करते थे और उनकी सैलरी कितनी थी.

छत्तीसगढ़ के गांव से ऑक्सफोर्ड-MIT तक का शैक्षणिक सफर

संदीप पाठक का शुरुआती जीवन किसी आम छात्र जैसा रहा है. उनका जन्म 4 अक्टूबर 1947 को छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के बेटाहा गांव में हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव की मिट्टी में ही हुई और बाद में उच्च शिक्षा के लिए वे बिलासपुर चले गए. संदीप पाठक का करियर किसी साधारण राजनेता का नहीं, बल्कि एक प्रखर शिक्षाविद का रहा है. उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (UK) से अपनी पीएचडी पूरी की और उसके बाद दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों- ऑक्सफोर्ड और MIT (USA) में बतौर रिसर्चर अपनी छाप छोड़ी. एक मेधावी छात्र और रिसर्चर के रूप में उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही है।.

आप ज्वाइन करने से पहले क्या थे संदीप पाठक और उनकी सैलरी

राजनीति में कदम रखने से पहले संदीप पाठक IIT दिल्ली में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे. यदि उस दौर की बात करें, तो 7वें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार IIT के प्रोफेसरों की सैलरी काफी आकर्षक होती है. उस दौर में एक प्रोफेसर का मूल वेतन लेवल 14A के अंतर्गत लगभग 1.59 लाख रुपये से 2.20 लाख रुपये के बीच होता था. इसमें महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य सुविधाएं जोड़ दी जाएं, तो वरिष्ठ प्रोफेसर का कुल वेतन प्रति माह 3 लाख रुपये के आंकड़े को भी पार कर जाता था. साथ ही उन्हें CPDA, शानदार आवास और चिकित्सा सुविधाएं भी मिलती थीं.

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आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार की भूमिका

संदीप पाठक का राजनीति में आना किसी इत्तेफाक से कम नहीं था. वे अरविंद केजरीवाल के विजन और आम आदमी पार्टी की कार्यशैली से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने अपनी प्रोफेसर की कुर्सी छोड़कर पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की बागडोर थामी. साल 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्होंने पर्दे के पीछे से पूरी रणनीति तैयार की और पार्टी को प्रचंड जीत दिलाई. इसके बाद उन्हें पार्टी में महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार के लिए प्रभारी के रूप में काम किया. साल 2022 में ही पार्टी ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था.

भाजपा में नए अध्याय की शुरुआत

अब संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया है. इस बदलाव के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है. उनके माता-पिता ने खुलकर कहा है कि जनता भी यही चाहती थी. संदीप पाठक का यह सफर एक सामान्य गांव के लड़के से शुरू होकर दुनिया के बड़े शैक्षणिक संस्थानों और फिर देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा तक पहुंचा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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