विदाई टेस्ट भी नहीं खेल पाए ये क्रिकेटर्स, क्या इन्हें भी मिलती है पेंशन?
विदाई मैच खेले बिना ही संन्यास लेने वाले क्रिकेटर्स को क्या सच में मिलती है पेंशन? जान लें बीसीसीआई का ये सबसे जरूरी नियम और दिग्गज खिलाड़ियों को हर महीने मिलने वाली रकम का पूरा सच.

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि जब वह अपने करियर को अलविदा कहे, तो मैदान से पूरे सम्मान के साथ विदाई मिले. दर्शकों की तालियों और साथी खिलाड़ियों के गार्ड ऑफ ऑनर के बीच खेला गया आखिरी मैच किसी भी क्रिकेटर के लिए यादगार पल होता है. लेकिन भारतीय क्रिकेट में कई बड़े नाम ऐसे भी हैं, जिन्हें यह सम्मान कभी नहीं मिला. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ दिग्गज क्रिकेटर्स के बारे में और यह भी समझते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इन्हें बीसीसीआई से पेंशन मिलती है या नहीं.
एमएस धोनी को नहीं मिला विदाई मैच
टीम इंडिया को टी20 वर्ल्ड कप 2007, वनडे वर्ल्ड कप 2011 और चैंपियंस ट्रॉफी 2013 जिताने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने दिसंबर 2014 में अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया था. इसके बाद अगस्त 2020 में उन्होंने वनडे और टी20 फॉर्मेट से भी संन्यास ले लिया. भारत को इतनी बड़ी कामयाबी दिलाने के बावजूद धोनी को कभी विदाई मैच का सम्मान नहीं दिया गया.
वीरेंद्र सहवाग
अपने आक्रामक अंदाज के लिए मशहूर वीरेंद्र सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उनके नाम 23 शतक दर्ज हैं. इसके अलावा उन्होंने 251 वनडे मैचों में भी शानदार प्रदर्शन किया. साल 2015 में सहवाग ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया, लेकिन उन्हें भी विदाई मैच जैसा कोई सम्मान नहीं मिला.
गौतम गंभीर और राहुल द्रविड़ का भी यही हाल
2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल के हीरो रहे गौतम गंभीर ने साल 2018 में संन्यास लिया, लेकिन उन्हें भी विदाई मैच नसीब नहीं हुआ. इसी तरह टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में 10 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले राहुल द्रविड़ ने साल 2012 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद क्रिकेट छोड़ दिया था. इतने बड़े योगदान के बावजूद द्रविड़ को भी फेयरवेल मैच का मौका नहीं मिला.
क्या ऐसे क्रिकेटर्स को मिलती है पेंशन?
बीसीसीआई की पेंशन स्कीम विदाई मैच मिलने या न मिलने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह खिलाड़ी के करियर में खेले गए मैचों और योगदान के आधार पर तय होती है. बीसीसीआई ने साल 2004 में पूर्व खिलाड़ियों को पेंशन देना शुरू किया था और तब से समय-समय पर इस स्कीम में बदलाव होते रहे हैं.
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कितनी मिलती है पेंशन?
बीसीसीआई के मौजूदा नियमों के मुताबिक, 25 या उससे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाले पुरुष क्रिकेटर्स को सबसे ज्यादा पेंशन दी जाती है. वहीं जिन खिलाड़ियों ने 25 से कम टेस्ट मैच खेले हैं, उनके लिए पेंशन की रकम अलग स्लैब में तय है. साल 2003 से पहले संन्यास लेने वाले पात्र फर्स्ट क्लास क्रिकेटर्स को हर महीने 45 हजार रुपये और अन्य पात्र पूर्व फर्स्ट क्लास खिलाड़ियों को 30 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है.
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