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क्या सुनामी की तरह नहीं हो सकती बाढ़ की भविष्यवाणी, क्यों कठिन है ऐसा करना?

नेपाल हादसे में लाखों लोगों की गृहस्थी उजड़ गई है. सुनामी की तुलना में सामान्य बाढ़ का अनुमान लगाना आसान है, लेकिन अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड की त्वरित सटीक चेतावनी देना आज भी बड़ी चुनौती है.

नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस त्रासदी के बाद से लगभग 288 भारतीय नागरिक लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत दल दिन-रात जुटे हुए हैं. इसके बीच आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ के लिए सुनामी जैसी सटीक चेतावनी समय रहते क्यों जारी नहीं हो पाती है, आखिर ऐसा करना इतना कठिन क्यों हो सकता है.

नदियों में बाढ़ के पूर्वानुमान क्यों मुश्किल?

बाढ़ का अग्रिम अनुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ बहुस्तरीय तकनीकों का सहारा लेते हैं. इसके तहत अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण और विभिन्न मौसम विभाग नदियों के जलस्तर की निरंतर निगरानी करते हैं. सैटेलाइट और रडार की मदद से वास्तविक समय (रियल-टाइम) में बारिश की तीव्रता और बादलों के घनत्व का डेटा जुटाया जाता है. इसके अतिरिक्त, जमीन की नमी और आसपास के तापमान का अध्ययन किया जाता है ताकि यह समझा जा सके कि मिट्टी कितना पानी सोख सकती है और कितना पानी सतह पर बहकर तबाही का कारण बनेगा.

अचानक आने वाली बाढ़ के लिए तकनीकी चुनौतियां

नदियों के सामान्य रूप से उफनाने का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन अचानक आने वाली बाढ़ जिसे फ्लैश फ्लड कहते हैं, उसके मामले में यह व्यवस्था पूरी तरह बेअसर साबित होती है. जब किसी सीमित भौगोलिक दायरे में बहुत कम समय के भीतर भीषण मूसलाधार बारिश होती है या बादल फटते हैं, तो पानी अत्यधिक तेज गति से बहने लगता है. इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिकों को चेतावनी प्रणाली सक्रिय करने और बस्तियों को खाली कराने का पर्याप्त समय ही नहीं मिल पाता, जिससे सटीक चेतावनी देना असंभव हो जाता है.

यह भी पढ़ें: नेपाल की कब-कब मदद कर चुका है भारत, अब तक कितना किया खर्च?


क्या सुनामी की तरह नहीं हो सकती बाढ़ की भविष्यवाणी, क्यों कठिन है ऐसा करना?

अप्रत्याशित बारिश और बदलती भौगोलिक परिस्थितियां

बाढ़ की सही भविष्यवाणी न हो पाने के पीछे कई जटिल भौगोलिक और प्राकृतिक कारक जिम्मेदार हैं. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण मानसून का पारंपरिक पैटर्न पूरी तरह बिगड़ चुका है, जिससे पुराने पूर्वानुमान मॉडल सटीक नहीं बैठते हैं. इसके अलावा, नदियों के तल में हर साल भारी मात्रा में गाद जमा होती रहती है. इससे नदी का पेंदा ऊंचा हो जाता है, और यह अनुमान लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है कि अतिरिक्त पानी किस दिशा में फैलेगा और किन इलाकों को जलमग्न करेगा.

सुनामी की तरह बाढ़ का पूर्वानुमान क्यों मुश्किल 

जनसामान्य में यह धारणा है कि सुनामी की चेतावनी बाढ़ से अधिक सटीक होती है, जबकि वैज्ञानिक वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है. सुनामी का मुख्य कारण समुद्र के भीतर आने वाले भूकंप या जलमग्न भूस्खलन होते हैं. चूंकि भूकंप की पहले से भविष्यवाणी करना नामुमकिन है, इसलिए सुनामी का पता भी उसके उत्पन्न होने के बाद ही चलता है. तटीय इलाकों तक लहरें पहुंचने में केवल कुछ मिनटों या घंटों का समय मिलता है. इसके विपरीत, सामान्य बाढ़ का अनुमान मौसम विभाग चक्रवात और बारिश के पैटर्न को देखकर कई दिन पहले लगा लेता है.


क्या सुनामी की तरह नहीं हो सकती बाढ़ की भविष्यवाणी, क्यों कठिन है ऐसा करना?

सुनामी का पूर्वानुमान आसान क्यों?

सुनामी की उत्पत्ति के बाद उसकी गति और लहरों की ऊंचाई का गणितीय आकलन खुला समुद्र होने के कारण सरल होता है. इसके उलट, जमीन पर बहने वाला पानी पहाड़ों, घाटियों, मिट्टी की अवशोषण क्षमता और इंसानी निर्माणों से प्रभावित होता है. इसी वजह से बाढ़ का व्यापक अनुमान तो संभव है, लेकिन यह तय कर पाना बेहद कठिन होता है कि पानी किस बिंदु पर कितना प्रचंड रूप धारण करेगा. नेपाल की घटना इसी तकनीकी सीमा का प्रत्यक्ष उदाहरण है.

यह भी पढ़ें: केदारनाथ और नेपाल हादसे में क्या समानता, दोनों मामलों में काल कैसे बना पानी?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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