Republic day 2026: कहां रखी है भारतीय संविधान की मूल प्रति, इसमें कितने पन्ने हैं?
Republic day 2026: जिस संविधान से भारत चलता है, उसकी असली प्रति आज भी उतनी ही सावधानी से संभाली जा रही है, जितनी किसी अनमोल धरोहर की होती है. आइए जानें कि यह कहां रखी है और कितने पन्नों की है.

Republic day 2026: भारत को एक सूत्र में बांधने वाली सबसे मजबूत डोर अगर कोई है, तो वह हमारा संविधान है. वही संविधान, जिसने आजादी के बाद देश को दिशा दी, अधिकार दिए और जिम्मेदारियां तय कीं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस किताब के सहारे 140 करोड़ लोगों का लोकतंत्र चलता है, उसकी असली प्रति कहां रखी है? कितने पन्नों में भारत की आत्मा बसती है और उसे सदियों तक सुरक्षित रखने के लिए क्या खास इंतजाम किए गए हैं? आइए 77वें गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले आपको इस बारे में बताएं.
भारत की लोकतांत्रिक आत्मा
भारत का संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव है. 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया और उसी दिन भारत एक संप्रभु गणराज्य बना. यही वजह है कि हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया जाता है. दुनिया के कई देशों के संविधान मौजूद हैं, लेकिन भारतीय संविधान अपनी लंबाई, विस्तार और विविधता के कारण अलग पहचान रखता है.
हाथ से लिखा गया संविधान
यह जानकर बहुत से लोग हैरान हो जाते हैं कि भारतीय संविधान की मूल प्रति न तो टाइप की गई थी और न ही किसी प्रेस में छपी थी. इसे मशहूर कैलिग्राफर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से इटैलिक शैली में लिखा था. हर अक्षर में धैर्य, अनुशासन और कला की झलक मिलती है. इस ऐतिहासिक काम के लिए उन्होंने कोई मेहनताना नहीं लिया, बल्कि सिर्फ इतना चाहा कि उनके दादा का नाम संविधान में दर्ज हो.
कला और संस्कृति का संगम
संविधान केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का जीवंत दस्तावेज भी है. इसके हर पन्ने को शांतिनिकेतन से जुड़े महान कलाकारों ने सजाया था. नंदलाल बोस और उनके सहयोगियों ने इसमें भारत की सभ्यता, इतिहास और परंपराओं को चित्रों के जरिए उकेरा. इन चित्रों में सिंधु घाटी से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक की झलक मिलती है, जो संविधान को एक कलात्मक धरोहर बनाती है.
कहां रखी है संविधान की मूल प्रति?
भारतीय संविधान की मूल प्रतियां हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मौजूद हैं. ये दोनों प्रतियां नई दिल्ली स्थित संसद भवन के पुस्तकालय में एक विशेष रूप से तैयार किए गए कक्ष में रखी गई हैं. यह आम लाइब्रेरी नहीं, बल्कि अत्यधिक सुरक्षा और नियंत्रित वातावरण वाला स्थान है. यहां बिना अनुमति पहुंच संभव नहीं है, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे.
कितने पन्ने और कितने हस्ताक्षर?
संविधान की मूल प्रति कुल 251 पन्नों की है. ये सभी पन्ने पार्चमेंट यानी चर्मपत्र पर लिखे गए हैं, जो सामान्य कागज से ज्यादा टिकाऊ होता है. इन पन्नों पर संविधान सभा के 284 सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं. यही हस्ताक्षर इस दस्तावेज को कानूनी ही नहीं, ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं.
हीलियम गैस का सुरक्षा कवच
संविधान की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती रही है. कागज और स्याही समय के साथ खराब हो सकते हैं, खासकर नमी और ऑक्सीजन की मौजूदगी में. इसी खतरे से बचाने के लिए संविधान की मूल प्रतियों को हीलियम गैस से भरे खास पारदर्शी बॉक्स में रखा गया है. हीलियम एक इनर्ट गैस है, जो किसी रासायनिक प्रतिक्रिया में हिस्सा नहीं लेती है. इससे ऑक्सीजन बाहर रहती है और फंगस, बैक्टीरिया या कीड़ों का खतरा खत्म हो जाता है.
वैज्ञानिक मानकों पर होती है निगरानी
संविधान को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ गैस बॉक्स ही नहीं, बल्कि पूरे कमरे का वातावरण नियंत्रित किया जाता है. वहां का तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस और आर्द्रता करीब 30 प्रतिशत रखी जाती है. साल के 365 दिन सेंसर के जरिए इसकी निगरानी होती है. रोशनी भी बेहद सीमित और खास किस्म की होती है, ताकि अल्ट्रावायलेट किरणें स्याही को नुकसान न पहुंचाएं.
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Source: IOCL



























