क्या किसी भी देश के खिलाफ जांच करा सकते हैं ट्रंप, क्या उन्हें रोकने का नहीं कोई तरीका?
डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ रद्द किए जाने के बाद अब 16 देशों के खिलाफ व्यापक व्यापारिक जांच के आदेश दिए हैं. आइए जानें कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियां असीमित हैं?

- ट्रंप प्रशासन ने 16 देशों के खिलाफ व्यापार जांच शुरू की है.
- यह जांच सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ को मजबूत करने के लिए है.
- लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के पास जांच की असीमित शक्ति है, क्या कोई रोक संभव नहीं है?
- क्या अमेरिकी कांग्रेस और महाभियोग राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगा सकते हैं?
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सख्त व्यापारिक नीतियों से चौंका दिया है. सुप्रीम कोर्ट से कानूनी झटका लगने के बाद भी ट्रंप प्रशासन झुकने को तैयार नहीं है. अब अमेरिका ने भारत और चीन समेत 16 बड़े साझेदार देशों के खिलाफ अनफेयर ट्रेड को लेकर जांच शुरू कर दी है. क्या एक अमेरिकी राष्ट्रपति के पास किसी भी देश को कटघरे में खड़ा करने की असीमित शक्ति है? या अमेरिकी लोकतंत्र में उन्हें रोकने का कोई पुख्ता तरीका भी मौजूद है? आइए जानें.
टैरिफ वॉर का नया मोर्चा
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की कमान संभालते ही दुनिया के साथ व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना शुरू कर दिया था. ईरान के साथ युद्ध और व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगाने के बाद अब उन्होंने एक नया दांव चला है. ट्रंप सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले 16 प्रमुख देशों के खिलाफ एक बड़ी जांच शुरू कर दी है. इस जांच के दायरे में भारत, चीन और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं. अमेरिका यह पता लगाना चाहता है कि क्या ये देश अमेरिकी बाजार में सामान बेचते समय अनुचित व्यापार व्यवहार अपना रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद का दांव
यह पूरी कवायद इसलिए शुरू की गई है, क्योंकि हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ को गैर-कानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया था. कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा धक्का लगा, लेकिन प्रशासन ने हार मानने के बजाय जांच का रास्ता चुना है. अब अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत इन देशों की व्यापारिक नीतियों की पड़ताल की जाएगी, ताकि भविष्य में टैरिफ लगाने के लिए ठोस कानूनी जमीन तैयार की जा सके. यह दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन किसी भी कीमत पर अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखने की जिद पर अड़ा है.
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राष्ट्रपति की जांच करने की शक्तियां
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास विदेशी देशों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए कई शक्तिशाली हथियार होते हैं. इसमें सबसे प्रमुख यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) है, जो किसी भी देश की व्यापारिक गतिविधियों की गहराई से जांच कर सकता है. इसके अलावा, राष्ट्रपति इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का उपयोग करके किसी भी विदेशी खतरे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं. एक बार आपातकाल लागू होने के बाद, राष्ट्रपति के पास उस देश की संपत्ति फ्रीज करने या व्यापार रोकने के व्यापक अधिकार आ जाते हैं.
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल
जांच सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहती है. राष्ट्रपति सीधे तौर पर जस्टिस डिपार्टमेंट, स्टेट डिपार्टमेंट और रक्षा विभाग को निर्देश दे सकते हैं कि वे किसी विदेशी इकाई या देश के खिलाफ खुफिया जानकारी जुटाएं. ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के जरिए अमेरिका उन देशों या शासन प्रणालियों पर प्रतिबंध लगा सकता है जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाते हैं. 2026 की ताजा जांचों में चीन और यूरोपीय संघ को विशेष रूप से अत्यधिक औद्योगिक क्षमता के मुद्दे पर घेरा गया है, जिसे अमेरिका अपने घरेलू उद्योगों के लिए खतरा मानता है.
क्या राष्ट्रपति की शक्ति असीमित है?
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ट्रंप जैसा शक्तिशाली नेता अपनी मर्जी से किसी भी देश को तबाह कर सकता है? इसका जवाब है 'नहीं'. अमेरिकी संविधान में 'चेक एंड बैलेंस' की व्यवस्था है. भले ही राष्ट्रपति जांच शुरू कर दें, लेकिन उनके फैसलों को फेडरल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को रद्द करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति के मनमाने फैसलों पर लगाम लगा सकती है. यदि कोई कदम कानून के दायरे से बाहर है, तो कोर्ट उसे तुरंत रोक देता है.
संसद और बजट की लगाम
अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के पास 'पावर ऑफ द पर्स' होती है, यानी पैसे पर नियंत्रण. अगर राष्ट्रपति किसी देश के खिलाफ ऐसी जांच या कार्रवाई करना चाहते हैं जिसके लिए भारी फंड की जरूरत है, तो कांग्रेस उस फंडिंग को रोक सकती है. कांग्रेस कानून पारित करके राष्ट्रपति को कुछ खास तरह की जांच करने से प्रतिबंधित भी कर सकती है. इसके अलावा, कांग्रेस के पास राष्ट्रपति के खिलाफ सुनवाई करने और अधिकारियों को गवाही के लिए बुलाने का अधिकार है, जिससे कार्यकारी शाखा की जवाबदेही तय होती है.
महाभियोग और आंतरिक विरोध
अगर राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का उपयोग राष्ट्रीय हित के बजाय व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं, तो उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का संवैधानिक प्रावधान है. यह राष्ट्रपति को हटाने का सबसे कड़ा और अंतिम रास्ता है. इसके अलावा, सरकारी विभागों के भीतर मौजूद स्वतंत्र एजेंसियां और नियम भी कई बार राष्ट्रपति के फैसलों में रुकावट पैदा करते हैं. अगर अधिकारियों को लगता है कि कोई जांच सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है, तो वे आंतरिक नियमों का हवाला देकर उसे धीमा या बाधित कर सकते हैं.
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Source: IOCL



























