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Republic Day 2026: अटारी और वाघा बॉर्डर को समझते हैं एक, जान लीजिए दोनों में अंतर

Republic Day 2026: 77 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर अटारी में रिट्रीट सेरेमनी आयोजित की गई. आइए जानते हैं कि अटारी और वाघा बॉर्डर को एक ही क्यों समझा जाता है और दोनों में क्या अंतर है.

Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमृतसर के पास भारत पाकिस्तान सीमा पर एक बार फिर से देशभक्ति के लहर देखी जा रही है. अटारी में गणतंत्र दिवस रिट्रीट सेरेमनी में भारी भीड़ उमड़ी. इसमें स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में खास राष्ट्रीय रंग भर दिया. लेकिन आज भी कई लोग अटारी और वाघा बॉर्डर को एक ही समझते हैं. आइए जानते हैं दोनों में क्या अंतर है.

अटारी और वाघा

सबसे बड़ा अंतर भौगोलिक स्थिति में है. अटारी भारत पाकिस्तान सीमा पर भारतीय तरफ का आखिरी गांव है और पंजाब के अमृतसर जिले में बसा हुआ है. दूसरी तरफ वाघा पाकिस्तान की तरफ का एक गांव है जो पाकिस्तान के लाहौर जिले में बसा है. हालांकि वे सीमा के पार एक दूसरे के सामने हैं लेकिन वह एक ही जगह नहीं है. 

दोनों गांव लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर हैं. भारत और पाकिस्तान को अलग करने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा को जीरो लाइन के नाम से जाना जाता है. इस लाइन के भारतीय हिस्से को आधिकारिक तौर पर अटारी बॉर्डर कहा जाता है. इसी के साथ पाकिस्तान के हिस्से को वाघा बॉर्डर के नाम से जाना जाता है. जिसे लोग आमतौर पर वाघा बॉर्डर कहते हैं वह असल में सीमा के दोनों तरफ फैला एक साझा सेरेमोनियल जोन है.

शाम की मिलट्री परेड

प्रसिद्ध शाम की मिलट्री परेड को वाघा बॉर्डर सेरेमनी के नाम से जाना जाता है. लेकिन भारतीय दर्शक इसमें में अटारी की तरफ शामिल होते हैं. भारतीय तरफ बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवान अटारी में सेरेमनी करते हैं जबकि पाकिस्तान रेंजर्स वाघा में अपना हिस्सा निभाते हैं.

रोजाना होने वाली यह बीटींग रिट्रीट सेरेमनी 1959 में शुरू हुई थी और तब से दोनों देशों के बीच नियंत्रित प्रतिद्वंद्विता और आपसी प्रोटोकॉल का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गई है. झंडों को एक साथ नीचे करना, आक्रामक मार्चिंग और गूज स्टेपिंग भीड़ को आकर्षित करने वाले मुख्य आकर्षण हैं.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और नामकरण में भ्रम 

अटारी और वाघा के बीच भ्रम की जड़े गहरी ऐतिहासिक हैं. वाघा गांव विभाजन से पहले मौजूद था लेकिन 1947 में रैडक्लिफ लाइन ने इसे भारत और पाकिस्तान के बीच बांट दिया. पूर्वी हिस्सा भारत में आया जबकि पश्चिमी हिस्सा पाकिस्तान में चला गया. अटारी का नाम महाराजा रणजीत सिंह की सेना के एक महान जनरल सरदार शाम सिंह अटारी वाला के नाम पर रखा गया है. 2007 में भारत सरकार ने उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए आधिकारिक तौर पर सीमा का नाम वाघा बॉर्डर से बदलकर अटारी बॉर्डर कर दिया. इसके बावजूद पुराना नाम अभी भी ज्यादा इस्तेमाल होता है.

ये भी पढ़ें: भारत‌ के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हो चुका है पाकिस्तान, जानें कब कब हुआ ऐसा

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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