Republic Day 2026: क्या भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हो चुका है पाकिस्तान, जानें कब कब हुआ ऐसा
Republic Day 2026: आज भारत में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या कभी पाकिस्तान भी भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा रहा है या नहीं.

Republic Day 2026: आज भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इसमें यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या पाकिस्तान कभी भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा रहा है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
1955 में मलिक गुलाम मुहम्मद की भागीदारी
भारत के गणतंत्र दिवस में पाकिस्तान की पहली और सबसे बड़ी भागीदारी 1955 में हुई थी. उस समय पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था. इस निमंत्रण का काफी ज्यादा कूटनीतिक महत्व था क्योंकि यह विभाजन और कश्मीर को लेकर भारत पाकिस्तान युद्ध के ठीक 8 साल बाद आया था.
इसी के साथ ऐसा पहली बार था जब गणतंत्र दिवस परेड राजपथ पर हुई थी. आज राजपथ को कर्तव्य पथ के नाम से जाना जाता है. इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में पाकिस्तान के राष्ट्रीय अध्यक्ष को आमंत्रित करके भारत ने सुलह और शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की अपनी इच्छा का संकेत दिया था.
दूसरा और आखिरी मौका
दूसरा मौका ठीक 1 दशक बाद 1965 में आया. पाकिस्तान के खाद्य और कृषि मंत्री राणा अब्दुल हामिद ने मुख्य अतिथि के तौर पर गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लिया था. यह निमंत्रण प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल के दौरान दिया गया था. राणा अब्दुल हामिद सिंध के एक बड़े पंजाबी जमींदार परिवार से थे और उनके पैतृक संबंध राजस्थान और सिंध के सोढ़ा राजपूत समुदाय से थे.
1965 का विरोधाभास और अध्याय का अंत
हालांकि इसके तुरंत बाद इतिहास ने एक बड़ा मोड़ लिया. 1965 के गणतंत्र दिवस समारोह के कुछ ही महीनों बाद तनाव तेजी से बढ़ गया. अप्रैल 1965 में पाकिस्तान ने कच्छ के रण में घुसपैठ की, जिसके बाद उसी साल अगस्त-सितंबर में भारत के साथ पूरी तरह से युद्ध हुआ.
उसके बाद से किसी भी पाकिस्तानी नेता या फिर प्रतिनिधि को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया. 1965 के युद्ध ने एक बड़ा मोड़ लिया. इसके बाद द्विपक्षीय संबंध काफी ज्यादा दुश्मनी वाले दौर में चले गए.
चीन की एक बार की मौजूदगी
1958 में भारत ने चीन के मार्शल ये जियानयिंग को गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था. यह निमंत्रण भारत चीन दोस्ती के एक छोटे से दौड़ में आया था. ऐसा 1962 के युद्ध से पहले हुआ था जिसने दोनों देशों के बीच संबंध को स्थायी रूप से बदल दिया था. इस युद्ध के बाद किसी भी चीनी नेता को फिर से समारोह के लिए आमंत्रित नहीं किया गया.
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