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कहां से आया रिजीम चेंज शब्द, जानें किस देश से हुई शुरुआत?

Regime Change Call: भारत की राजनीति में हाल-फिलहाल 'रिजीम चेंज' शब्द काफी चर्चा में आ चुका है. आइए जानते हैं कि क्या होता है इस शब्द का मतलब और यह शब्द कहां से आया.

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  • वकील प्रशांत भूषण ने 'रिजीम चेंज' की बात कहकर ध्यान खींचा।
  • यह शब्द राजनीतिक उथल-पुथल, बाहरी हस्तक्षेप से गहराई से जुड़ा है।
  • ईरान, ग्वाटेमाला जैसे देशों में शासन परिवर्तन के उदाहरण हैं।
  • 'रिजीम चेंज' 'सरकार बदलने' से गहरा और व्यापक है।

Regime Change: सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने बीते दिनों दिल्ली प्रेस क्लब में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह रिजीम चेंज चाहते हैं. उनके इस बयान ने एक ऐसे शब्द की तरफ फिर से ध्यान खींचा है जो अब राजनीतिक उथल-पुथल और विदेशी हस्तक्षेप से गहराई से जुड़ गया है.

विपक्ष नेताओं के बयान और बांग्लादेश और नेपाल में हुई घटनाओं के बाद भारतीय राजनीतिक चर्चाओं में इस शब्द का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. रिजीम चेंज का सबसे पुराना लिखित प्रमाण 1925 में अमेरिकी अखबार लॉस एंजेलिस टाइम्स में मिलता है. हालांकि वक्त के साथ इसका राजनीतिक मतलब विकसित हुआ है.

इस शब्द की जड़ 

रिजीम शब्द लैटिन भाषा के रेजिमेन शब्द से आया है. इसका मतलब होता है शासन करना या फिर निर्देश देना. 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के दौरान इसका राजनीतिक इस्तेमाल आम हो गया. उस वक्त पुरानी राजशाही व्यवस्था को एनसियन रिजीम या फिर ओल्ड रिजीम कहा जाता था. इसी से रिजीम शब्द एक राजनीतिक प्रणाली या फिर सरकार की स्थापित व्यवस्था के रूप में मशहूर हुआ. 

बाद में अंतरराष्ट्रीय मामलों में रिजीम चेंज वाक्यांश का एक खास मतलब बन गया. 20वीं सदी के उत्तरार्ध में अमेरिकी राष्ट्रपतियों खास तौर से बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इसे वैश्विक स्तर पर मशहूर बनाने में भूमिका निभाई. इराक में सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने की चर्चाओं के दौरान यह वाक्यांश खास तौर से मशहूर हुआ.


कहां से आया रिजीम चेंज शब्द, जानें किस देश से हुई शुरुआत?

1953 का ईरान 

खास हस्तक्षेप के जरिए शासन परिवर्तन की आधुनिक प्रक्रिया की शुरुआत अक्सर 1953 के ईरान से मानी जाती है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और ब्रिटेन की एमआई6 ने मिलकर ऑपरेशन अजाक्स चलाया. यह एक गुप्त अभियान था जिसने ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक की सरकार को गिरा दिया.

इसका मुख्य कारण मोसादेक का ईरान के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला था. यह अभियान विदेशी खुफिया एजेंसी द्वारा किसी मौजूदा सरकार को हटाने का एक शुरुआती बड़ा उदाहरण बना. इसके बाद ग्वाटेमाला, चिली और इराक में भी ऐसे ही हस्तक्षेप हुए.

1954 में ग्वाटेमाला 

ईरान में हुए ऑपरेशन के 1 साल बाद अमेरिका ने ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति जैकोबो अब्रेंज के खिलाफ तख्तापलट करवाया. उनकी भूमि सुधार नीतियों से अमेरिकी कंपनी यूनाइटेड फ्रूट कंपनी के व्यावसायिक हितों को खतरा पैदा हो गया था. 

1973 में चिली

चिली में 1973 में सैन्य हस्तक्षेप के जरिए राष्ट्रपति साल्वाडोर अलेंदे की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई समाजवादी सरकार को सत्ता से हटा दिया गया. इस बदलाव के बाद जनरल ऑगस्टो पिनोशे के नेतृत्व में एक सैन्य तानाशाही कायम हुई. 


कहां से आया रिजीम चेंज शब्द, जानें किस देश से हुई शुरुआत?

2003 में इराक

हालांकि विदेशी समर्थन से सरकारें गिरने का काम दशकों पहले भी हो चुका था लेकिन 2003 के बाद इराक के युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में रिजीम चेंज एक साफ सैन्य नीतिगत शब्द बन गया.

सद्दाम हुसैन की सरकार को जबरदस्ती हटा दिया गया जिससे यह शब्द अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया. यह मुख्य अंतर इस प्रक्रिया के इतिहास और बाद में इस शब्दावली को मिली प्रमुखता के बीच है.

यह भी पढ़ें: सरकार से बगावत की कहां-कैसी सजा, किन देशों में दे दी जाती है मौत?

सरकार बदलना बनाम रिजीम चेंज 

सरकार बदलने की प्रक्रिया आमतौर पर तब होती है जब नियमित लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए एक पार्टी की जगह दूसरी पार्टी ले लेती है. भारत या फिर अमेरिका की तरह इसे अक्सर सरकार या फिर प्रशासन में बदलाव कहा जाता है. 

वहीं रिजीम चेंज का मतलब काफी ज्यादा बड़ा है. इसमें किसी देश के राजनीतिक ढांचे, संविधान या प्रशासन के बुनियादी नियमों में अच्छा खासा परिवर्तन शामिल होता है.

इस तरह के बदलाव हिंसक विद्रोह, तख्तापलट या फिर बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के जरिए हो सकते हैं. 1953 में ईरान, 1954 में ग्वाटेमाला, 1973 में चिली और 2003 में इराक के उदाहरण बताते हैं कि यह शब्द सामान्य चुनावी बदलाव के बजाय गहरे राजनीतिक परिवर्तन से जुड़ा है.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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