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PM Modi New Residence: पीएम आवास से कैसे होती है सामान की शिफ्टिंग, कितने दिन में होता है पूरा काम?

PM Modi New Residence: पीएम आवास की शिफ्टिंग सिर्फ सामान ले जाने का काम नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षा और व्यवस्था का खास ध्यान रखा जाता है. आइए जानें कि यह काम कितने दिनों में पूरा होता है.

PM Modi New Residence: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय और आवास दोनों का पता बदलने जा रहा है. अब पीएम आवास और कार्यालय को सेवा तीर्थ परिसर में जगह दी जा रही है. आवास और कार्यालय बदलने पर सामान भी शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री का आवास बदलना सिर्फ घर बदलने जैसा काम नहीं होता. यहां हर कदम तय नियमों, कड़ी सुरक्षा और गोपनीयता के बीच उठाया जाता है. एक-एक फाइल, एक-एक तोहफा और निजी सामान तक की अलग पहचान होती है. ऐसे में सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री आवास से शिफ्टिंग होती है, तो यह काम कितने दिनों में पूरा होता है और इसके पीछे कैसी बड़ी व्यवस्था काम करती है? चलिए जानें. 

पीएम आवास की शिफ्टिंग कोई सामान्य काम नहीं

भारत में प्रधानमंत्री आवास से सामान की शिफ्टिंग एक बेहद संगठित और तय प्रक्रिया के तहत होती है. यह काम आम घरों की तरह नहीं किया जाता, बल्कि इसमें सरकार द्वारा बनाए गए नियमों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाता है. इस पूरी व्यवस्था की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी करते हैं, ताकि किसी भी स्तर पर चूक न होने पाए.

कौन संभालता है पूरी जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री के मौजूदा आवास 7 लोक कल्याण मार्ग की देखरेख एक बड़े प्रशासनिक और हाउसकीपिंग स्टाफ के जिम्मे है. इसमें माली, इलेक्ट्रीशियन, बढ़ई, सफाईकर्मी, तकनीकी कर्मचारी और प्रशासनिक अफसर शामिल होते हैं. कुल मिलाकर करीब 200 से ज्यादा लोग इस आवास के संचालन और शिफ्टिंग से जुड़े कामों में भूमिका निभाते हैं.

पहले बनती है पूरी योजना

शिफ्टिंग की तैयारी अचानक शुरू नहीं होती है. जैसे ही नए प्रधानमंत्री आवास या कार्यालय में जाने की योजना बनती है, तो महीनों पहले से इसकी प्लानिंग शुरू हो जाती है. किस सामान को पहले ले जाना है, किसे बाद में, क्या निजी है और क्या सरकारी, इन सभी बातों की सूची तैयार की जाती है. इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है.

पैकिंग में भी होता है नियमों का पालन

प्रधानमंत्री के निजी सामान की पैकिंग बेहद सावधानी से की जाती है. कई मामलों में पेशेवर पैकर्स और मूवर्स की सेवाएं ली जाती हैं, लेकिन उन्हें भी पूरी सुरक्षा जांच के बाद ही अनुमति मिलती है. हर डिब्बे पर नंबर, विवरण और गंतव्य का साफ उल्लेख किया जाता है, ताकि सामान की पहचान बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके.

सुरक्षा सबसे अहम

पीएम आवास की शिफ्टिंग के दौरान सुरक्षा सबसे बड़ा पहलू होती है. इस पूरी प्रक्रिया की कमान स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी के हाथ में रहती है. दिल्ली पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करती है. शिफ्टिंग में शामिल हर व्यक्ति का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है और पूरे इलाके को सुरक्षित घेरे में रखा जाता है.

इन्वेंट्री और दस्तावेजीकरण जरूरी

शिफ्टिंग से पहले और बाद में सामान की पूरी इन्वेंट्री बनाई जाती है कि कौन सा सामान पैक हुआ, कब निकला और कब नए आवास में पहुंचा- इन सभी बातों का रिकॉर्ड रखा जाता है. अनपैकिंग के समय भी इसी सूची से मिलान किया जाता है, ताकि किसी भी तरह के नुकसान या कमी की संभावना न रहे.

सरकारी और निजी सामान में फर्क

प्रधानमंत्री को मिलने वाले सरकारी तोहफे, स्मृति चिह्न और कलाकृतियां निजी सामान का हिस्सा नहीं होतीं हैं. तय मूल्य से ज्यादा कीमत वाले उपहार तोश खाने में जमा किए जाते हैं. अगर प्रधानमंत्री चाहें तो नियमों के तहत निर्धारित राशि जमा कर इन्हें अपने पास रख सकते हैं. ऐसे उपहारों की शिफ्टिंग अलग प्रक्रिया से होती है.

कितने दिन में पूरा होता है काम

प्रधानमंत्री आवास की शिफ्टिंग में कोई तय सार्वजनिक समयसीमा नहीं होती है, लेकिन आमतौर पर असली पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का काम कई दिनों से लेकर एक हफ्ते तक चल सकता है. हालांकि पूरी योजना और तैयारी महीनों पहले से चल रही होती है. नए आवास में सामान जमाने और व्यवस्थित करने में कई बार हफ्तों या महीनों भी लग जाते हैं.

चरणों में होती है शिफ्टिंग

अक्सर शिफ्टिंग एक साथ नहीं होती. कुछ जरूरी फाइलें और निजी सामान पहले भेजे जाते हैं, जबकि बाकी चीजें आधिकारिक हैंडओवर के बाद ट्रांसफर होती हैं. इससे कामकाज और सुरक्षा दोनों में संतुलन बना रहता है.

यह भी पढ़ें: 1947 से अब तक कितनी बार बदल चुका पीएम आवास का पता? देखें पूरी लिस्ट

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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