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मुख्यमंत्री या उपराज्यपाल, किसके हिसाब से काम करती है जम्मू-कश्मीर की पुलिस?

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सवाल उठता है कि जम्मू-कश्मीर में पुलिस किसके आदेश पर काम करती है? मुख्यमंत्री या राज्यपाल, इन दोनों में जम्मू-कश्मीर की पुलिस किसके अंतर्गत आती है? आइए जाने हैं... 

पहलगाम में हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं. पुलवामा हमले के बाद इसे सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है, जिसमें आतंकियों ने कश्मीर घूमने आए टूरिस्टों को निशाना बनाया. चश्मदीदों का कहना है कि आतंकियों ने टूरिस्टों का मजहब पूछकर उन्हें गोली मार दी. इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल बताए जा रहे हैं. 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी सऊदी अरब की यात्रा रद्द कर वापस दिल्ली लौट आए हैं, वहीं गृहमंत्री अमित शाह देर रात से ही जम्मू-कश्मीर में मोर्चा संभाले हुए हैं. कहा जा रहा है कि जिस समय आतंकी हमला हुआ पहलगाम की बैसरन घाटी में कोई भी सुरक्षा जवान मौजूद नहीं था, जिसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई. ऐसे में सवाल उठता है कि जम्मू-कश्मीर में पुलिस किसके आदेश पर काम करती है? मुख्यमंत्री या राज्यपाल, इन दोनों में जम्मू-कश्मीर की पुलिस किसके अंतर्गत आती है? आइए जाने हैं... 

केंद्र शासित प्रदेश है जम्मू-कश्मीर

बता दें, कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के बाद केंद्र सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया था. केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था. इसके फैसले के साथ ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा और मुख्यमंत्री की शक्तियों को भी सीमित कर दिया गया था. वहीं, उपराज्यपाल को अधिक अधिकार दिए गए थे. बता दें, केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते जम्मू-कश्मीर में पुलिस और कानून व्यवस्था का जिम्मा सीधे केंद्र सरकार को दे दिया गया था. वहीं, भूमि से जुड़े मुद्दे वहां की चुनी गई सरकार के अधीन थे. ठीक इसी तरह की व्यवस्था देश की राजधानी दिल्ली में भी है, जहां पुलिस और कानून व्यवस्था का जिम्मा उपराज्यपाल के पास होता है.

एलजी के आदेश पर काम करती है जम्मू-कश्मीर पुलिस 

जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस उपराज्यपाल के अंतर्गत आती है. इस समय जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा हैं. ऐसे में जम्मू कश्मीर पुलिस एलजी मनोज सिन्हा के आदेश पर ही काम करेगी. मुख्यमंत्री का उस पर कोई अधिकार नहीं होगा. जम्मू कश्मीर पुलिस की सीधी भर्ती भी अब जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है. प्रमोशन के मामलों को विभागीय प्रमोशन कमिटी तय करती है. 

यह भी पढ़ें: किन-किन एजेंसियों को दी गई पहलगाम आतंकी हमले की जांच? जानें इस सवाल का जवाब

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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