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युद्ध शुरू होने के बाद क्या देश में लग जाती है इमरजेंसी? जानें कैसे काम करती है पुलिस

भारत ने साफ किया है कि अगर पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई की जाती है तो भारत भी पीछे नहीं हटेगा और वह इसका जवाब देगा. इससे एक बात स्पष्ट है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध कभी भी छिड़ सकता है. 

भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान सीमा पर लगातार फायरिंग कर रहा है, जिसमें 16 लोगों की जान जा चुकी है. इतना ही नहीं पाकिस्तान ने भारत के 15 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया. भारतीय सेना की ओर से कहा गया है कि उसने पाकिस्तान के लाहौर में तैनात एयर डिफेंस सिस्टम को भी तबाह कर डाला है. इस झटके के बाद पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है और दोनों देशों के बीच जंग के आसार बढ़ गए हैं. 

हालांकि, अभी तक न ही पाकिस्तान और न भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर जंग का ऐलान किया गया है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या युद्ध शुरू होते ही देश में इमरजेंसी लग जाएगी? चलिए जानते हैं कि इमरजेंसी को लेकर नियम क्या होते हैं? क्या युद्ध का ऐलान होते ही देश में इमरजेंसी लग जाती है? इस दौरान पुलिस कैसे काम करती है, उसके अधिकार क्या होते हैं? 

भारत-पाकिस्तान के बीच कभी भी छिड़ सकता है युद्ध 

भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा हालातों को देखें तो दोनों ओर तनाव बना हुआ है. पाकिस्तान भारत के सीमावर्ती इलाकों में लगातार फायरिंग कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है. इधर, भारत की तरफ से भी पाकिस्तान को जवाब दिया जा रहा है. भारत ने साफ किया है कि अगर पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई की जाती है तो भारत भी पीछे नहीं हटेगा और वह इसका जवाब देगा. इससे एक बात स्पष्ट है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध कभी भी छिड़ सकता है. 

क्या युद्ध शुरू होते ही लग जाती है इमरजेंसी? 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युद्ध शुरू होते ही देश में इमरजेंसी लग जाती है और लोगों के अधिकार सीमित हो जाते हैं? जवाब है-नहीं. युद्ध शुरू होते ही देश में इमरजेंसी का कोई नियम नहीं है. हालांकि, अगर किसी देश में युद्ध के दौरान हालात बिगड़ते हैं तो राष्ट्रपति या राष्ट्र के प्रमुख की ओर से इसकी घोषणा अलग से की जाती है. आमतौर पर ऐसा इसलिए किया जाता है, जिससे दुश्मन देश के खिलाफ देश अपने संपूर्ण साधनों का इस्तेमाल किया जा सके और देश के सभी संसाधनों को सरकार अपने कंट्रोल में ले सके. इस दौरान आम नागरिकों के अधिकार सीमित कर दिए जाते हैं. इस स्थिति में पुलिस के अधिकार भी बढ़ जाते हैं और प्रदर्शन या सरकार विरोधी काम करने पर नागरिकों की गिरफ्तारी भी हो सकती है. इतना ही नहीं जरूतर पड़ने पर सेना नागरिकों की सेवाएं भी ले सकती है, यहां तक कि उनके संसाधनों का भी प्रयोग कर सकती है. 

यह भी पढ़ें: 100 पाकिस्तानी गिनोगे तो 40 मिलेंगे भूखे, जानें पड़ोसी मुल्क में कितने लोग गरीबी की रेखा के नीचे?

 

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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