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इतने दिनों तक बिना सोये ट्रेनिंग करते हैं NSG कमांडो, नहीं मिलती है कोई छूट

भारतीय सुरक्षा बलों में एनएसजी कमांडों को सबसे खतरनाक माना जाता है. एनएसजी कमांडों की ट्रेनिंग भी काफी कठिन होती है और ये हर जवान पूरा नहीं कर सकता है. जानिए इनकी क्या हैं खूबियां.

भारत के सबसे खतरनाक एनएसजी कमांडो के बारे में आप सभी लोगों ने सुना ही होगा. प्रधानमंत्री से लेकर अन्य वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा में एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो ही तैनात रहते हैं. इसके अलावा देश की सुरक्षा के लिए आतंकी हमले जैसे मुश्किल परिस्थितियों में भी एनएसजी कमांडो ही ऑपरेशन को अंजाम देते हैं. यह कमांडो सिर से पांव तक काले रंग के कपड़ों में ढके रहते हैं, इसलिए इन्हें ब्लैक कैट कमांडो कहा जाता है.

एनएसजी

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) भारत सरकार के  गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली सात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है. बता दें कि ब्लैक कैट कमांडो  की सीधी भर्ती एनएसजी में नहीं होती है. इसकी ट्रेनिंग के लिए भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के सर्वश्रेष्ठ जवानों को चुना जाता है. इसकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन होती है. वहीं एनएसजी में चुने जाने वाले कमांडो में 53% कमांडो भारतीय सेना से आते हैं, शेष 45% कमांडो सीआरपीएफ, आइटीबीपी, आरएएस और बीएसएफ से चुने जाते हैं.

सबसे कठिन ट्रेनिंग

बता दें कि एनएसजी के लिए एक कमांडो का चुनाव कई चरणों में होता है. सबसे पहले एक हफ्ते की कठोर ट्रेनिंग दी जाती है. इस ट्रेनिंग में 80% सैनिक फेल हो जाते हैं और मात्र 15 से 20% सैनिक ही आखिरी दौड़ में पहुंचने में सफल होते हैं. वहीं चुने गए जवानों को 90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें उन्हें हथियारों के साथ और बिना हथियारों के दुश्मनों के हमले से बचने और उन पर हमला करने की ट्रेनिंग भी दी जाती है. ब इस ट्रेनिंग के दौरान आग के गोले और गोलियों की बौछारों के बीच बचकर निकलना होता है. 3 महीने की यह ट्रेनिंग पास करने वाले सैनिक देश के सबसे खतरनाक और ताकतवर कमांडो में शामिल होने के योग्य बनते हैं.

इन जवानों की खूबियां

एनएसजी कमांडों को ऐसे ही सबसे ताकतवर नहीं कहा जाता है. ये अपने सबसे कठिन ट्रेनिंग में बहुत सारी चीजें सीखते हैं. ट्रेनिंग की शुरुआत में जवानों में 30% से 40% फिटनेस योग्यता होती है, जो ट्रेनिंग खत्म होते होते 80% से 90% तक हो जाती है. वहीं नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कमांडो को एक गोली से एक जान लेने की ट्रेनिंग दी जाती है. कमांडो को आंख बंद करके निशाना लगाने से लेकर अंधेरे में निशाना लगाने की भी ट्रेनिंग होती है. एनएसजी ड्राइवर चुनने के लिए अलग से प्रक्रिया बनाई जाती है. इस दौरान खतरनाक रास्तों बारूदी सुरंगों और हमलावरों से घिर जाने की स्थिति में ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाती है. कहा जाता है कि एक एनएसजी कमांडों करीब 15 दिन तक बिना खाए-पीए और सोए अपने ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. 

ये भी पढ़ें: Indo-Pakistani war: सेना में किन जवानों को मिला था समर सेवा और स्टार मेडल? नहीं जानते होंगे आप

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