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10 डिजिट का ही क्यों होता है मोबाइल नंबर, इसमें कम या ज्यादा क्यों नहीं होते डिजिट?

जब भी हमें किसी को मोबाइल पर कॉल करना होता है तो नंबर डायल करना पड़ता है. ये नंबर 10 डिजिट का होता है. क्या आपको पता है कि मोबाइल नंबर में सिर्फ 10 डिजिट्स ही क्यों होते हैं?

जब भी हम किसी का नंबर डायल करते हैं तो कॉल करने से पहले अच्छे से चेक कर लेते है कि नंबर 10 डिजिट का है या नहीं. अगर गलती से कोई डिजिट मिस हो जाता है या एक भी डिजिट एक्स्ट्रा हो जाता है तो नंबर अवैध हो जाता है और कॉल नहीं लगती. क्या आपने कभी सोचा है कि  फोन नंबर हमेशा 10 डिजिट का ही क्यों होता है? आइए आपको बताते हैं इसके पीछे का कारण?

क्या है 10 डिजिट्स का सीक्रेट?

भारत में चलने वाले NNP यानी नेशनल नंबरिंग प्लान की वजह से ही सभी फोन नंबर्स 10 डिजिट के होते हैं. हालांकि, साल 2003 तक भारत में 9 अंकों का फोन नंबर इस्तेमाल होता था, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के मद्देनजर और कई नए फोन नंबर्स की जरूरत को पूरा करने के लिए TRAI ने इसे 10 डिजिट का कर दिया. 

10 डिजिट्स करेंगी प्रॉब्लम सॉल्व

आमतौर पर लोग ये बात नहीं जानते हैं कि फोन नंबर कैसे बनाए जाते हैं और हर इंसान का नंबर दूसरे से अलग कैसे होता है? दरअसल, नंबर की संख्या 0 से 9 होने पर केवल 10 अलग अलग नंबर बनाए जा सकते हैं, जिन्हें 10 लोग इस्तेमाल करेंगे. वहीं 2 डिजिट्स का फोन नंबर होने पर 0 से लेकर 99 तक नंबर इस्तेमाल करके 100 नए नंबर बनाए जा सकते हैं. ऐसे में फोन नंबर में 10 डिजिट रखे गए, जिससे करोड़ों नए नंबर बनाएं जा सकें. 

क्यों चाहिए इतने नंबर्स?

बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ आज हर किसी इंसान के पास मोबाइल फोन मौजूद है. ऐसे में जितने मोबाइल उतनी सिम और उतने ही नए नंबर. दरअसल, 140 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले भारत में इस समस्या को सुलझाने के लिए 10 डिजिट का मोबाइल नंबर रखा गया. कैलकुलेशन के मुताबिक, इससे एक हजार करोड़ नए नंबर बनाए जा सकेंगे और फ्यूचर में भी लोगों को अलॉट किए जा सकेंगे. 

किन देशों में कम डिजिट के हैं मोबाइल नंबर?

बता दें कि हर देश अपनी आबादी के हिसाब से मोबाइल नंबर के डिजिट तय करता है. जैसे आइसलैंड की आबादी महज 4 लाख है. ऐसे में वहां सिर्फ 7 डिजिट के ही मोबाइल नंबर रखे गए हैं. वहीं, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर, मकाऊ, निकारागुआ और स्लोवेनिया आदि देशों में मोबाइल नंबर सिर्फ 8 डिजिट के ही हैं. 

क्या ज्यादा डिजिट के भी हो सकते हैं मोबाइल नंबर?

अब सवाल उठता है कि अगर भारत की आबादी 10 डिजिट वाले सभी मोबाइल नंबर के कॉम्बिनेशन से ज्यादा हो जाए तो क्या होगा? ऐसे में 11 या 12 डिजिट के मोबाइल नंबर भी जारी किए जा सकते हैं, जिससे अरबों नए कॉम्बिनेशन बनाए जा सकेंगे.

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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