National Highway River Silt: अब नदियों की गाद से बनेंगे नेशनल हाईवे, जानें कितनी मजबूत रहेगी सड़क?
National Highway River Silt: अब नदियों की गाद से तैयार होंगे मजबूत नेशनल हाईवे, जानें कैसे इस नई तकनीक से सड़कों की उम्र बढ़ेगी, भारी बजट की बचत होगी और साथ ही पर्यावरण को भी मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

National Highway River Silt: देश में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस नई योजना के तहत अब नदियों, तालाबों और अन्य जल निकायों से वैज्ञानिक तरीके से निकाली गई गाद का इस्तेमाल नेशनल हाईवे के निर्माण में किया जाएगा.
नदी संजीवनी नाम की इस अनूठी पहल के जरिए नदियों से भारी मात्रा में निकाली जाने वाली मिट्टी और कीचड़ को हाईवे परियोजनाओं के लिए प्राथमिक निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. इस फॉर्मूले को देश के बुनियादी ढांचा विकास में एक बड़ा गेम चेंजर माना जा रहा है.
बाढ़ से मिलेगी मुक्ति और बचेगी उपजाऊ मिट्टी
इस योजना को धरातल पर उतारने के पीछे दो बेहद महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को लक्षित किया गया है. पहली बड़ी समस्या मानसून के दौरान नदियों में गाद जमा होने से आने वाली भीषण बाढ़ की है. जब नदियों की तली में गाद जमा हो जाती है, तो उनकी जलधारण क्षमता काफी कम हो जाती है, जिससे पानी रिहायशी इलाकों में फैल जाता है.
वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से नदियों का जलप्रवाह बेहतर होगा और बाढ़ का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा. इसका दूसरा बड़ा फायदा यह होगा कि हाईवे बनाने के लिए अब ठेकेदारों को खेतों की उपजाऊ ऊपरी मिट्टी को नहीं खोदना पड़ेगा, जिससे कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर संरक्षण हो सकेगा.
कितनी मजबूत और टिकाऊ रहेगी गाद से बनी सड़क?
आम जनता और विशेषज्ञों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या नदियों के कीचड़ या गाद से बनाए गए हाईवे भारी वाहनों का भार सहने में सक्षम होंगे. इस पर केंद्रीय राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तकनीकी विशेषज्ञों ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है. हाईवे के निर्माण में गाद का इस्तेमाल सीधे नहीं किया जाता, बल्कि इसे पूरी तरह वैज्ञानिक जांच और शोधन के बाद उपयोग में लाया जाता है.
इस मिट्टी को हाईवे के निचले आधार यानी एम्बैंकमेंट, सबग्रेड और सड़कों को ऊंचा करने के लिए भराव सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाएगा. तकनीकी टेस्ट में पाया गया है कि सही वैज्ञानिक प्रसंस्करण के बाद यह सामग्री सामान्य मिट्टी जितनी ही मजबूत और टिकाऊ साबित होती है, जिससे सड़क की उम्र पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता.
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लागत में आएगी भारी कमी और काम में तेजी
इस योजना का एक और बेहतरीन पहलू यह है कि यह पूरी तरह से एक विन-विन सिचुएशन पर आधारित है. सड़कों के निर्माण के लिए NHAI को यह गाद पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार को इसके लिए कोई रॉयल्टी नहीं देनी होगी और निर्माण कंपनियों को दूर-दराज के इलाकों से भारी खर्च करके मिट्टी मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे जहां एक तरफ नेशनल हाईवे परियोजनाओं की निर्माण लागत में भारी कमी आएगी, वहीं कच्चे माल की आसान उपलब्धता से सड़कों के निर्माण कार्य में भी अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी.
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