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Moon Antares Conjunction 2026: 'लाल महादानव' के पास दिखाई देगा चांद, खुली आंखों से कर सकेंगे अद्भुत खगोलीय घटना का दीदार

24 जुलाई 2026 की रात चंद्रमा और लाल महादानव तारा Antares की शानदार युति दिखाई देगी. जानें कब, किस दिशा में और कैसे खुली आंखों से देखें यह दुर्लभ खगोलीय घटना?

खगोल प्रेमियों के लिए आज यानी 24 जुलाई का दिन बेहद खास है. आसमान में रात में होने वाली खगोलीय घटना के लोग खुली आंखों से दीदार के साक्षी बनेंगे. लाल महादानव के नाम से पहचाने जाने वाले तारे अंतरिक्ष के पास चांद दिखाई देगा. यह अद्भुत नजारा लोगों को अचंभित कर देगा. 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल प्रेमियों के लिए 24 जुलाई की रात्रि में शानदार खगोलीय युति घटित होने वाली है. इस दौरान शुक्ल पक्ष का बढ़ता हुआ (Waxing Gibbous) चंद्रमा, वृश्चिक तारामंडल के 'हृदय' के रूप में प्रसिद्ध लाल महादानव तारे 'अन्टारेस (Antares)' के पास दिखाई देगा. कुछ यूं कहें कि 24 जुलाई की शाम शुक्ल पक्ष का चंद्रमा वृश्चिक तारामंडल के प्रमुख लाल महादानव तारा अन्टारेस चंद्रमा के अत्यंत निकट दिखाई देगा. भारतीय खगोल विज्ञान की भाषा में इसे ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा के रूप में भी जाना जाता है. 

कैसे और कब देखें?

अमर पाल सिंह ने बताया कि यह सुंदर खगोलीय युति खुली आंखों से देखी जा सकेगी. वैसे तो इस खगोलीय दृश्य को देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन/टेलीस्कोप या विनॉकुलर आदि की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि चंद्रमा और अन्टारेस की यह युति खुली आंखों से भी आसानी से ही दिखाई देगी. हालांकि, यदि आप के पास कोई छोटी दूरबीन या विनोकुलर आदि उपकरण मौजूद हैं और आप उसका  उपयोग करेंगे तो यह दृश्य और भी अधिक स्पष्ट, सुंदर एवं आकर्षक दिखाई देगा. साथ ही इस युति को देखने का सर्वोत्तम समय 24 जुलाई को सूर्यास्त के बाद से लेकर रात्रि के लगभग 1 बजे तक होगा. कुछ यूं कहें कि सूर्यास्त के बाद से मध्यरात्रि अथवा रात्रि के उत्तरार्ध तक इसको देखा जा सकेगा इसके बाद दोनों खगोलीय पिण्ड धीरे धीरे पश्चिमी क्षितिज के पास नीचे चले जाएंगे.

कितना होगा अन्टारेस तारे और चन्द्रमा का मैग्नीट्यूड?

खगोल विज्ञान में सामान्यतः अन्टारेस तारे को  (एन्टेरेस) भी लिखा और बोला जाता है, जोकि इसका एक प्रचलित पाश्चात्य नाम है. अमर पाल के मुताबिक, यह भी जानना आवश्यक है कि अन्टारेस (Antares) तारा, वृश्चिक (Scorpius) तारामंडल का सबसे चमकीला और आकाश का 15वां चमकीला तारा भी है. यह एक लाल महादानव   (RedSupergiant) तारा है. इसे वृश्चिक का हृदय (Heart of the Scorpion) भी कहा जाता है. आधुनिक खगोल विज्ञान में इसको बायर (Bayer एवं Alpha Scorpii (α Scorpii) नामों से भी जाना जाता है, जिसका रंग लाल-नारंगी है एवं पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 550 प्रकाश-वर्ष है.  

अगर इसके दृश्य मैग्नीट्यूड /(Apparent Magnitude) की बात करें तो पाते हैं कि इसका दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.09 के क़रीब होगा. यह रात्रि आकाश के सबसे चमकीले तारों में से एक है. यदि हम  प्राचीन भारतीय खगोलीय नाक्षत्रीय संदर्भ में  बात करें तो पाते हैं कि अन्टारेस,ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रमुख योगतारा माना गया है एवं खगोलविज्ञान की दृष्टि से वृश्चिक एक दिलचस्प तारामंडल है इसमें तारों के कई सारे गुच्छे हैं.  बहुत से जुड़वां तारे भी हैं. इस बिच्छू/वृश्चिक का प्रमुख और सबसे चमकीला तारा इसके हृदय के स्थान पर है. लाल रंग का होने के कारण इसको आसानी से पहचाना जा सकता है. इसका भारतीय नाम ज्येष्ठा है. 

बिच्छू को संस्कृत में वृश्चिक कहते हैं. इसलिए ये तारे वृश्चिक राशि के नाम से जाने जाते हैं. सूर्य, चंद्र और ग्रह आकाश के जिस पट्टे में यात्रा करते दिखाई देते हैं, उसे राशिचक्र (जोडियक) कहते हैं. राशि चक्र को 12 हिस्सों या राशियों में बांटा गया है. वृश्चिक उनमें से एक है. पाश्चात्य खगोल विज्ञान में वृश्चिक को स्कॉर्पियो कहते हैं. यह यूनानी भाषा का शब्द है और इसका अर्थ भी बिच्छू ही है. प्राचीन काल की कई सभ्यताओं में दक्षिणी आकाश के इस तारा-मंडल को बिच्छू के रूप में ही पहचाना गया था. बेबीलोन वाले इसे अक्रबु (बिच्छू) कहते थे. इसी अक्रबु से बाद में अरबी का अल-अकरब (वृश्चिक) शब्द बना. 

खगोलविद ने बताया कि प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर जाकर एवं मौसम साफ़ होने पर 8 या 9 बजे के क़रीब दक्षिणी दिशा के आकाश में लगभग 40 डिग्री ऊपर देखेंगे, तो तारों का एक ऐसा समूह दिखाई देगा. जो बिच्छू जैसी आकृति बनाता है. इसीलिए कभी कभी खगोलविद अपने अंदाज़ बोलते हैं कि आकाश में भी एक बिच्छू है. अब हम इस दौरान चंद्रमा के मैग्नीट्यूड की बात करें तो पाते हैं कि इसी रात्रि के दौरान वृश्चिक में मौजूद चन्द्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 11.10 के क़रीब बढ़ता हुआ होगा.

क्या होती है खगोलीय पिंडों की सर्वाधिक निकटता/युति?

खगोलविद ने बताया कि युति/ (Conjunction) खगोलीय पिंडों की वह स्थिति होती है, जब पृथ्वी से देखने पर दो या दो से अधिक आकाशीय पिंड (जैसे ग्रह, तारे या चंद्रमा) आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत निकट दिखाई देते हैं यह अंतरिक्ष में उनकी वास्तविक निकटता नहीं, बल्कि एक दृष्टि-रेखा (line-of-sight effect) होता है, क्योंकि वे एक सीध में प्रतीत होते हैं और पृथ्वी से देखने पर कभी कभी पास पास दिखाई देते हैं. इसे ही खगोल विज्ञान में युति कहा जाता है. खगोलविद ने बताया कि 24 जुलाई 2026 को चंद्रमा और अन्टारेस के बीच सर्वाधिक निकटता (Closest Approach)  इसी का एक शानदार संयोजन होगी.

आकाश में किधर और किस दिशा में देखें ?

खगोलविद ने बताया कि इस खगोलीय युति को देखने के लिए आप, आकाश के दक्षिणी दिशा के क्षितिज की ओर देखें, वहां आपको चमकीला चंद्रमा दिखाई देगा, जिसके ठीक पास या उसके अत्यंत निकट गहरे लाल-नारंगी रंग में चमकता अन्टारेस तारा भी नज़र भी आएगा.

आकाश के किस तारामण्डल क्षेत्र में दिखाई देगी चन्द्रमा और अन्टारेस तारे की मनमोहक युति?

भारत से देखने पर यह खगोलीय घटना वृश्चिक तारामंडल में निकट युति (close approach) के रूप में दिखाई देगी और भारत के अधिकांश भागों से चंद्रमा द्वारा अन्टारेस (Antares) का ढकना (occultation) नहीं होगा, लेकिन उनका शानदार संयोजन स्पष्ट रूप से दिखाई देगा. 24 जुलाई की रात्रि में शुक्ल पक्ष का चंद्रमा, वृश्चिक तारामंडल के प्रमुख लाल महादानव तारे अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के अत्यंत निकट दिखाई देगा. इस सुंदर खगोलीय युति को खुली आंखों से देखने का सर्वोत्तम अवसर प्राप्त करने से चूकें नहीं, क्योंकि ऐसी मनमोहक युतियों का दीदार करने से आपकी रुचि अंतरिक्ष के प्रति और भी अधिक गहरी होती जाती है.

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