एक्सप्लोरर

US Iran Meeting In Islamabad: इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को अमेरिका-ईरान की मीटिंग, जानें कौन-सा देश उठाएगा इसका पूरा खर्च?

US Iran Meeting In Islamabad: इस्लामाबाद 10 अप्रैल को एक ऐतिहासिक कूटनीतिक मिलन का गवाह बनने जा रहा है, जहां अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे. आइए जानें इसका खर्चा कौन उठाएगा.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • यह बैठक विनाश की धमकी के बीच शांति के प्रयासों को दर्शाती है.

US Iran Meeting In Islamabad: दुनिया भर की नजरें अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां 10 अप्रैल को एक ऐसी मेज सजने वाली है जिस पर बरसों की दुश्मनी खत्म करने का खाका खींचा जा सकता है. अमेरिका और ईरान, जो कुछ ही घंटों पहले एक-दूसरे को मिटाने की धमकियां दे रहे थे, अब पाकिस्तान के बुलावे पर बातचीत के लिए राजी होते दिख रहे हैं. युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया के लिए यह खबर राहत भरी है, लेकिन इस भव्य आयोजन के पीछे के इंतजाम और खर्चों को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. 

इस्लामाबाद में सजेगी शांति की मेज

पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष को रोकने के लिए एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान दोनों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आने का औपचारिक न्योता दिया है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे विवादों को सुलझाकर एक निर्णायक समझौते पर पहुंचना है. पाकिस्तान इस समय एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को बातचीत के जरिए खत्म किया जा सके.

कौन उठाएगा इस मीटिंग का पूरा खर्च?

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जब भी कोई देश दो विरोधी पक्षों के बीच मध्यस्थता करता है और मेजबानी की जिम्मेदारी लेता है, तो प्रोटोकॉल के मुताबिक खर्चों का बोझ भी वही उठाता है. इस हिसाब से तो इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग का पूरा खर्च पाकिस्तान सरकार को वहन करना चाहिए. इसमें अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के ठहरने, आयोजन स्थल की व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और सबसे महत्वपूर्ण उनकी सुरक्षा का खर्च शामिल है. पाकिस्तान की सेना और सरकार मिलकर इस आयोजन की सफलता के लिए संसाधनों को जुटा रहे हैं, ताकि दुनिया को एक सुरक्षित और सक्षम मेजबान का संदेश दिया जा सके.

यह भी पढ़ें: US Iran War Ceasefire: 15 दिन के सीजफायर से क्या कम होगा फ्लाइट का किराया, फ्यूल सरचार्ज पर क्या पड़ेगा असर?

मीटिंग में ट्रंप के खास दूत और वीपी की एंट्री

इस बातचीत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका की ओर से इसमें बेहद प्रभावशाली चेहरे शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद जेरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं. जेडी वेंस फिलहाल हंगरी के दौरे पर हैं और माना जा रहा है कि वे वहां से सीधे पाकिस्तान के लिए उड़ान भरेंगे. हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी औपचारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन तैयारी इसी स्तर की चल रही है.

मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका

इस शांति वार्ता को सफल बनाने के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की अहम भूमिका बताई जा रही है. पाकिस्तान इस समय दो चरणों वाले समझौते पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच की शत्रुता को स्थाई रूप से खत्म करना है. इस्लामाबाद इस समय दोनों देशों के बीच कम्युनिकेशन के प्रमुख माध्यम (प्राइमरी कम्युनिकेशन चैनल) के रूप में उभर कर सामने आया है, जो दोनों पक्षों के संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है.

विनाश की धमकी से शांति की ओर बढ़ते कदम

यह कूटनीतिक पहल तब हुई है जब दोनों देशों के बीच हालात बेकाबू होने ही वाले थे. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि अमेरिका ईरानी सभ्यता को मिटाने की ताकत रखता है. इस बयान के बाद युद्ध का खतरा चरम पर पहुंच गया था, लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव ने एक खिड़की खोल दी है. 10 अप्रैल की यह बैठक तय करेगी कि क्षेत्र विनाश के रास्ते पर आगे बढ़ेगा या बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकलेगा.

मीटिंग पर व्हाइट हाउस का नपा-तुला रुख

इस्लामाबाद मीटिंग को लेकर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बेहद संभलकर प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि लोग आपस में बात करते रहते हैं, लेकिन जब तक राष्ट्रपति या व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जाता, तब तक किसी भी बात को फाइनल नहीं माना जाना चाहिए. इसके बावजूद कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि मीटिंग की तैयारियां जोरों पर हैं और पाकिस्तानी मध्यस्थ लगातार अमेरिकी टीम के संपर्क में हैं.

यह भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट 15 दिन के लिए खोलने को ईरान हुआ राजी, क्या इस दौरान वसूला जाएगा टोल?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

सचिन तेंदुलकर-वीरेंद्र सहवाग या सौरव गांगुली, किस रिटायर्ड क्रिकेटर को मिलती है सबसे ज्यादा पेंशन?
सचिन-सहवाग या गांगुली, किस रिटायर्ड क्रिकेटर को मिलती है सबसे ज्यादा पेंशन?
Ethanol: कौन-सा देश सबसे ज्यादा बनाता है एथेनॉल, क्या वहां पेट्रोल में मिलाते हैं इसे?
कौन-सा देश सबसे ज्यादा बनाता है एथेनॉल, क्या वहां पेट्रोल में मिलाते हैं इसे?
Where Dying Is Banned: ये है दुनिया का ऐसा अनोखा शहर जहां मरना मना, सरकार ने लगा रखा है बैन
ये है दुनिया का ऐसा अनोखा शहर जहां मरना मना, सरकार ने लगा रखा है बैन
अपने नाम पर कैसे खुलवा सकते हैं सरकारी कॉलेज या अस्पताल, क्या करना होता है?
अपने नाम पर कैसे खुलवा सकते हैं सरकारी कॉलेज या अस्पताल, क्या करना होता है?

वीडियोज

गोरखपुर की लेडी नटवरलाल का करोड़ों वाला मायाजाल!
Pati Brahmachari:💔Isha-Suraj के बीच फिर आई Avni, तकरार के बीच पनपने लगा प्यार। #sbs
Bollywood News: बिग बॉस के टीज़र से मचा तहलका: क्या टीवी पर फिर दिखेगी 'करण-अर्जुन' की जोड़ी? ( 05.08.26 )
Jharkhand Job Protest: झारखंड नौकरी आंदोलन से घिरी सरकार! इस्तीफा देंगे हेमंत सोरेन? ABPLIVE
Mannat: Dhairya का खतरनाक खेल फेल, Mannat ने बचा लिया Vikrant को मौत के मुंह से!

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरान की सत्ता में दरार! राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- 'सुप्रीम लीडर से बात करना...'
ईरान की सत्ता में दरार! राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- 'सुप्रीम लीडर से बात करना भी मुश्किल'
'अगर चुनाव में उतरा तो भगवंत मान के खिलाफ ही लड़ूंगा', राजा वडिंग ने दे दिया चैलेंज
'अगर चुनाव में उतरा तो भगवंत मान के खिलाफ ही लड़ूंगा', राजा वडिंग ने दे दिया चैलेंज
Parliament Monsoon Session LIVE: लोकसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा, स्पीकर बोले- सहयोग करें
Monsoon Session 2026: लोकसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा, स्पीकर बोले- सहयोग करें
Ramayana Release Date: रणबीर कपूर की 'रामायण' की रिलीज डेट हुई कंफर्म, जानें- कब सिनेमाघरों में देगी दस्तक
रणबीर कपूर की 'रामायण' की रिलीज डेट हुई कंफर्म, जानें- कब सिनेमाघरों में देगी दस्तक
3 दिग्गज गेंदबाज, जो वनडे क्रिकेट में कभी नहीं ले सके 5 विकेट हॉल 
3 दिग्गज गेंदबाज, जो वनडे क्रिकेट में कभी नहीं ले सके 5 विकेट हॉल 
रांची प्रोटेस्ट: सरकार से बातचीत के लिए तैयार हुए छात्र, स्टेट गेस्ट हाउस में होगी बात
रांची प्रोटेस्ट: सरकार से बातचीत के लिए तैयार हुए छात्र, स्टेट गेस्ट हाउस में होगी बात
जंतर-मंतर के बाद अब आगे क्या? अभिजीत दीपके के घर CJP, होगा बड़ा ऐलान
जंतर-मंतर के बाद अब आगे क्या? अभिजीत दीपके के घर CJP, होगा बड़ा ऐलान
Xप्लेन: क्या NEET-UG में ‘टू-स्टेज फॉर्मूला’ से पेपर लीक पर लगेगी लगाम? जानें सबकुछ
क्या NEET-UG में ‘टू-स्टेज फॉर्मूला’ से पेपर लीक पर लगेगी लगाम?
Embed widget