भोपाल में हुआ मीथेन गैस का रिसाव, जानें एक झटके में कितने लोगों को खत्म कर सकती है ये गैस
Methane Gas Leak: मध्य प्रदेश के रायसेन में बीते दिन मीथेन गैस लीक हो गई, जिससे बड़ा हादसा होते-होते बचा. चलिए जानें कि यह गैस कितनी खतरनाक है.

भोपाल से करीब 35 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में गेल के प्लांट से बीते दिन सुबह मीथेन गैस लीक हो गई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल था. हालांकि जैसे ही फायर सेफ्टी टीम को इस बात की सूचना मिली वो मौके पर पहुंची और गैस के रिसाव को बंद कराया. हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. रिसाव के कुछ ही घंटों के बाद इसको नियंत्रित कर लिया गया. सभी सुरक्षा इंतजामों की जांच की गई और फिलहाल प्लांट से उत्पादन बंद है. मीथेन बहुत ज्वलनशील, गंधहीन और रंगहीन गैस है जो कि मिनटों में लोगों की जान ले सकती है.
कितनी खतरनाक है मीथेन
मीथेन गैस में न तो कोई रंग होता है और न ही कोई गंध होती है. जब मीथेन की मात्रा हवा में 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है तो यह स्थिति गला घोंटने वाली होती है. मीथेन गैस ऑक्सीजन की कमी करती है और कार्बन डाई ऑक्साइड व नाइट्रोजन के साथ मिलकर इंसान के शरीर में घुटन पैदा करती है, जिससे मौत हो जाती है. मीथेन गैस इतनी तेज होती है कि सांस लेते ही वह सीधा आपके दिमाग पर वार करने लगती है. इससे इंसान अचेत हो जाता है और इस परिस्थिति में उसे भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है. जिसका सीधा असर फेफड़ों और दिल पर देखने को मिलता है.
मीथेन से कितनी जल्दी हो सकती है मौत
मीथेन गैस से मौत कितनी जल्दी हो सकती है, वैसे तो यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि गैस की सांद्रता कितनी है, व्यक्ति की स्थिति कैसी है और वह कितनी देर तक गैस के संपर्क में रहता है. अगर गैस की सांद्रता ज्यादा है और कोई शख्स ज्यादा देर तक इसके संपर्क में आ गया है तो उसकी मौत कुछ ही मिनटों में हो सकती है. मीथेन गैस के संपर्क में आने से गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और खांसी होती है. क्योंकि इसका असर आपके नर्वस सिस्टम पर हो चुका होता है. सिरदर्द, घुटन और चक्कर के साथ गैस की अधिकता दिमाग और फेफड़े पर असर डालती है, जिससे मौत हो जाती है.
भोपाल गैस कांड
2-3 दिसंबर 1984 को भोपाल में इसी तरीके एक दर्दनाक हादसा हुआ था. इस हादसे के बाद हजारों लोग काल के गाल में समा गए थे. यह दिन मानव इतिहास में सबसे दर्दनाक औद्योगिक त्रासदियों में गिना जाता है. कैसे यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के कारखाने से निकलने वाली जहरीली गैस की चपेट में आने से लगभग पूरा का पूरा शहर खत्महो गया था. इस हादसे में 5474 लोग मारे गए थे और इसका असर पांच लाख से ज्यादा लोगों पर हुआ था. दरअसल इस कारखाने में कीटनाशकों के उत्पादन के लिए मिथाइल आइसोसाइनेट नाम के केमिकल का इस्तेमाल हुआ करता था. सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते टैंक से बड़ी मात्रा में MIC गैस का रिसाव हो गया और यही लोगों की मौत का कारण बना.
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Source: IOCL





















