मेघालय हिंसा, क्या है इनर लाइन परमिट और नई पर्यटक गाइडलाइन?
मेघालय में इनर लाइन परमिट और नई पर्यटक गाइडलाइन को लेकर खासी छात्र संघ द्वारा हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं. जाने टूरिस्ट को लेकर क्या है नए नियम.

- ILP बाहरी से आदिवासी पहचान बचाने का विशेष परमिट।
मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गई है. 19 अगस्त 2026 को खासी स्टूडेंट्स यूनियन यानी केएसयू ने एक ब्लैक-फ्लैग बाइक रैली निकाली थी, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई. इस दौरान कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, कुछ को आग के हवाले कर दिया गया और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस ने इस मामले में केएसयू के अध्यक्ष समेत तीन बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. हालात इतने बिगड़े कि असम-मेघालय सीमा पर भी तनाव फैल गया और गाड़ी चालकों ने कई जगह रास्ता जाम कर दिया. स्थिति को देखते हुए मेघालय पर्यटन विभाग को टूरिस्ट्स की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर तक जारी करना पड़ा.
इस पूरे बवाल की जो मांग है, वह है मेघालय में इनर लाइन परमिट यानी आईएलपी को सख्ती से लागू करना. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह आईएलपी क्या है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों है?
क्या होता है इनर लाइन परमिट?
इनर लाइन परमिट एक सरकारी दस्तावेज है, जो किसी भारतीय नागरिक को देश के ही कुछ खास संरक्षित राज्यों में तय समय के लिए जाने और रहने की इजाजत देता है. मौजूदा समय में यह व्यवस्था अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है. इसका मकसद इन राज्यों की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और स्थानीय पहचान की रक्षा करना है, और बाहरी लोगों की बेरोकटोक आवाजाही या अतिक्रमण को रोकना है. बिना परमिट के कोई भी बाहरी व्यक्ति इन इलाकों में तय अवधि से ज्यादा नहीं रह सकता.
मेघालय में क्यों उठ रही आइएलपी की मांग?
मेघालय अभी उन राज्यों में शामिल नहीं है, जहां आईएलपी लागू है. लेकिन बीते दो दशक से भी ज्यादा समय से खासी स्टूडेंट्स यूनियन और कई आदिवासी संगठन राज्य में इसे सख्ती से लागू करने की मांग करते आ रहे हैं. इनका कहना है कि बिना किसी रोक-टोक के बाहरी लोगों के आने से राज्य की आदिवासी पहचान, नौकरियां और जमीन-जायदाद पर खतरा बढ़ रहा है. ताजा रैली में भी प्रवासी मजदूरों पर सख्त नियम, आईएलपी लागू करने और एक विवादित सीमेंट प्रोजेक्ट की पब्लिक हियरिंग रद्द करने जैसी मांगें उठाई गई थीं.
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टूरिस्टों को क्या करना पड़ेगा?
जिन राज्यों में आईएलपी पहले से लागू है, वहां जाने के लिए पर्यटकों को यात्रा से पहले परमिट लेना अनिवार्य होता है. यह परमिट ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए या राज्य सरकार के तय दफ्तरों में खुद जाकर बनवाया जा सकता है, जिनके कार्यालय दिल्ली, कोलकाता, शिलॉन्ग और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी मौजूद हैं. आवेदन के लिए आमतौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट जैसे किसी एक पहचान पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होती है.
परमिट में यात्रा की तारीखें और उन इलाकों की जानकारी दी जाती है, जहां टूरिस्ट घूम सकते हैं. तय समय से ज्यादा वहां रुकना नियमों का उल्लंघन माना जाता है. अगर भविष्य में मेघालय में भी आईएलपी लागू होता है, तो वहां जाने वाले पर्यटकों को भी इसी तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है.
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