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अपने ही प्रयोगों के शिकार हो गए ये साइंटिस्ट, मिली थी दर्दनाक मौत

साइंस ने लोगों के जीवन को काफी आसान बनाया है. हर रोज साइंटिस्ट नए-नए आविष्कार करने में लगे रहते हैं. आपको उन आविष्कारक के बारे में बताते हैं, जिनकी मौत उनके ही आविष्कार से हुई.

साइंस के बदौलत दुनिया को काफी तरक्की की. साइंस का ही कमाल है कि 2300 किलोमीटर दूर बैठे ईरान और इजरायल अपने आधुनिक फाइटर जेट्स और मिसाइलों से एक-दूसरे को तबाह करने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं. इंसानों ने जितने भी आविष्कार किए हैं, उनमें साइंस यानी विज्ञान का अहम रोल रहा है. अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो पूरी दुनिया साइंस के इर्द-गिर्द घूमती है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक जाने तक जितनी भी चीजों का हम यूज करते हैं, उसमें साइंस और साइंटिस्ट का अहम रोल है.

हालांकि, इन आविष्कारकों ने जहां हमारी जिंदगी को अपने मेहनत और आविष्कारों से सरल बनाई तो दूसरी तरफ इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी. कभी दुश्मन तो कभी उनके ही देश में उनको दर्दनाक मौत की सजा मिली.  आइए जानते हैं ऐसे कुछ साइंटिस्ट के बारे में, जो खुद के ही आविष्कार के शिकार हो गए और उनको दर्दनाक मौत मिली. 

इन वैज्ञानिकों को निगल गया उनका ही आविष्कार
  
इस लिस्ट में पहला नाम मैक्स वेलियर का आता है, जो ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक, लेखक और रॉकेट तकनीक के महारथी थे. वेलियर रॉकेट विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शुरुआती वैज्ञानिकों में से एक माने जाते हैं.  17 मई 1930 जर्मनी के बर्लिन शहर में इनके ही एक आविष्कार की टेस्टिंग के दौरान हुए विस्फोट में इनकी जान चली गई. दरअसल, साल 1930 में वह रॉकेट का आविष्कार कर रहे थे. टेस्टिंग के दौरान रॉकेट में विस्फोट हो गया, जिसमें मैक्स वेलियर को अपनी जान गंवानी पड़ी. 

टाइटैनिक के डिजाइनर भी हुए फना 

इसमें दूसरा नाम थॉमस एंड्रयूज का है. वह आयरिश बिजनेसमैन और शिपबिल्डर थे, जो खासकर आरएमएस टाइटैनिक के प्रमुख डिजाइनर और निर्माण प्रबंधक के रूप में जाने जाते हैं. टाइटैनिक हादसे के बाद इन्हें डेक पर रोते हुए देखा गया था. उसके बाद थॉमक एंड्रूज कहां गए? उनके साथ क्या हुआ, किसी को कुछ पता नहीं. उन्हें एक नायक की तरह याद किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अंतिम वक्त तक यात्रियों की मदद की और अपनी जान बचाने की कोशिश नहीं की. 

प्रिंटिंग प्रेस बनाने वाले का हुआ ऐसा हाल

इस लिस्ट में तीसरा नाम विलियम बुलक का है, जो अमेरिकी आविष्कारक थे.  उन्हें रोटरी प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार के लिए जाना जाता है. उनका आविष्कार प्रिंटिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया.  हालांकि, इसी प्रिंटिंग प्रेस मशीन में हुई तकनीकी समस्या को ठीक करते वक्त उनका पैर फंस गया, जिसकी वजह से उन्हें जान गंवानी पड़ी. 

जवान रहने की खोज करते-करते गंवाई जान

इस लिस्ट में चौथा नाम एलेक्जेंडर बोग्दानव का है, जो रूसी चिकित्सक, लेखक, वैज्ञानिक, क्रांतिकारी और भविष्यवादी विचारक थे.  उन्हें विज्ञान, राजनीति और दर्शन के क्षेत्र में योगदान के लिए जाना जाता है. 1920 में एलेक्जेंडर बोग्दानव ने खुद को जवान बनाए रखने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन के प्रयोग शुरू किए. उन्होंने 11 बार दूसरों का खून लिया. जब उन्होंने मलेरिया और टीबी से संक्रमित युवक का खून लिया तो मलेरिया के शिकार हो गए. इससे उनकी मौत हो गई.

हवाई टैक्सी ने छीन लीं सांसें

पांचवां नाम माइकल डाकरे का है. माइकल डाकरे ने खास तरह की हवाई टैक्सी का आविष्कार किया था, जो उड़ान भरने के साथ-साथ अलग-अलग शहरों में उतरने में सक्षम थी. साल 2009 में जब वह इसकी टेस्टिंग कर रहे थे, तब यह टैक्सी दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में माइकल डाकरे की जान चली गई.

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