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गांधी जी की जिंदगी में आई थीं ये 3 महिलाएं, जानें तीनों से कैसे थे उनके संबंध?

महात्मा गांधी के जीवन के बारे कई लोगों ने एहम भूमिका निभाई. क्या आप जानते हैं कि कौन हैं वे तीन महिलाएं, जिनका महात्मा गांधी जी के जीवन में बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहा.

भारत में हर साल 2 अक्टूबर के दिन महात्मा गांधी के जन्मदिवस को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है. अपने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत पर कायम रहने वाले महात्मा गांधी हमेशा ही सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं. गांधी जी के जीवन में ऐसे कई लोग आए, जिन्होंने उन्हें गांधी से महात्मा गांधी बनने तक के सफर में सहयोग किया. उनके साथ खड़े रहे और सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर उनका साथ दिया. ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि महात्मा गांधी के जीवन में तीन महिलाएं आई थीं. आइए उन तीनों के बारे में जानते हैं.

कौन थीं गांधी की सहयोगी?

अगर महिलाओं के बारे में गांधी जी के विचारों की बात की जाए तो वह महिलाओं के प्रति काफी संवेदना रखते थे. इसके चलते उनके जीवन में आई सभी महिलाओं से उनके संबंध काफी अच्छे रहे. गांधी जी के जीवन में कई महिला सहयोगी जैसे आभाबेन, मीराबेन, कस्तूरबा, सुशीला नायर, अमृतकौर आदि रहीं. हालांकि, गांधी जी के जीवन में मीराबेन बनी मैडलिन, भारत कोकिला सरोजिनी नायडू और कस्तूरबा गांधी का महत्व काफी ज्यादा था. 

मैडलिन क्यों बनीं मीराबेन?

मैडलिन स्लेड 1892 में इंग्लैंड के एक अच्छे परिवार में जन्मी थीं. साल 1923 में इन ब्रिटिश मेम की मुलाकात गांधीजी की बायोग्राफी लिखने वाले फ्रांसीसी लेखक से हुई, जिन्होंने उन्हें गांधी जी के बारे में बताया. महात्मा गांधी के बारे सुनकर मैडलिन उनसे इतनी इंप्रेस हुईं कि उनसे मिलने के लिए बेचैन हो गईं. उन्होंने अपना पूरा जीवन गांधी के आश्रम में रहकर उनकी सहयोगी के रूप में बिताने की ठान ली और 1925 में अहमदाबाद पहुंच गईं. गांधी जी को देखते ही मैडलिन उनके सामने झुककर बैठ गईं, जिसके बाद गांधी ने उन्हें उठाया और कहा कि तुम मेरी बेटी हो और तभी से दोनों में पिता पुत्री का संबंध बन गया. गांधी ने उन्हें मीराबेन नाम दिया. बाद में इन्हीं मीराबेन ने आजादी की लड़ाई में बापू का सहयोग भी किया. 

गांधीजी और सरोजिनी नायडू की दोस्ती

गांधीजी के जीवन में कई दोस्त जैसे नेहरू, पटेल आदि बने, जिनके बारे में हम सभी जानते हैं, लेकिन यह बात बेहद कम लोग जानते हैं कि सरोजिनी नायडू भी महात्मा गांधी की काफी अच्छी मित्र थीं. दोनों का सेंस ऑफ ह्यूमर एक-दूसरे के हिसाब से बिल्कुल सही था. इंग्लैंड में गांधीजी से मिली सरोजिनी ने उन्हें पहली बार देखने पर बेहद अनोखा इंसान पाया था और उन पर हंसने लगी थीं. इस पर गांधी जी भी मुस्कुरा दिए थे और इसी तरह दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई. इसके बाद सरोजिनी नायडू ने महात्मा का नाम मिकी माउस रख दिया था और गांधीजी उन्हें प्यार से डियर बुलबुल या डियर मीराबाई कहकर बुलाते थे. इसके बाद तकरीबन अगले 30 साल तक दोनों एक-दूसरे के सहयोगी के रूप में साथ रहे. 

पत्नी कस्तूरबा से कैसे थे संबंध?

गांधीजी के जीवन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी का बेहद अहम योगदान था. वह उनकी जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि उनके जीवन में ऐसी पहली महिला थीं, जिन्होंने शुरुआत से उनका साथ निभाया. गांधीजी का विवाह काफी छोटी उम्र में हो गया था, जिसके बाद वह विदेश पढ़ने चले गए. कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी के हर आंदोलन में उनका सहयोग किया और हर मोड़ पर उनके साथ डटकर खड़ी रहीं. इतना ही नहीं गांधी के विचारों को महिलाओं तक पहुंचाने और महिलाओं को आंदोलन से जोड़ने की अपील भी उन्होंने ही की थी, जिस कारण आंदोलन सफल हो पाए.

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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