राजकीय शोक में किन चीजों पर होता है प्रतिबंध, नियमों को तोड़ने पर कितनी मिलती है सजा?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार जिस चार्टर्ड विमान से मुंबई से बारामती जा रहे थे, वह बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार जिस चार्टर्ड विमान से मुंबई से बारामती जा रहे थे, वह बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
इस हादसे को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि विमान रनवे से फिसल गया और खेत में जा गिरा, जिसके बाद उसमें आग लग गई. DGCA की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार विमान बारामती में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें सवार सभी लोग मारे गए हैं. कुल 5 लोग विमान में सवार थे, जिनमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी शामिल थे.
बताया जा रहा है कि यह विमान जिला परिषद चुनाव प्रचार के सिलसिले में बारामती पहुंच रहा था. हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन, पुलिस, राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए. इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें विमान के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की बात कही जा रही है.
बता दें कि अजित पवार के निधन के चलते महाराष्ट्र में तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया गया है. ऐसे में जानते हैं कि राजकीय शोक क्या होता है, उसमें किन बातों पर रोक लगती है और नियम तोड़ने पर क्या सजा मिलती है?
क्या होता है राजकीय शोक?
राजकीय शोक का मतलब है सरकार के जरिए किसी प्रमुख व्यक्ति के निधन पर आधिकारिक रूप से शोक प्रकट करना, यह शोक पूरे देश या किसी एक राज्य तक सीमित हो सकता है. आमतौर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर पूरे देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है. वहीं मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या राज्य की किसी बड़ी और सम्मानित हस्ती के निधन पर राज्य स्तर पर राजकीय शोक घोषित किया जाता है.
राजकीय शोक के दौरान क्या-क्या प्रतिबंध होते हैं?
राजकीय शोक की अवधि सरकार तय करती है. इस दौरान कुछ खास नियम लागू होते हैं. जैसे सरकारी भवनों, सचिवालय, विधानसभा और प्रमुख कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहता है.कोई भी सरकारी समारोह, उत्सव या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते. सरकारी स्तर पर मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं. सिर्फ जरूरी और आवश्यक सरकारी काम ही किए जाते हैं. हालांकि यह जरूरी नहीं है कि राजकीय शोक के दौरान स्कूल, कॉलेज या दफ्तर बंद ही कर दिए जाएं.
क्या राजकीय शोक में छुट्टी होती है?
भारत सरकार के 1997 के नियमों के अनुसार, राजकीय शोक के दौरान सार्वजनिक छुट्टी जरूरी नहीं होती है. छुट्टी सिर्फ तभी घोषित की जाती है, जब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का निधन पद पर रहते हुए होता है. हालांकि, राज्य सरकारें चाहें तो अपने स्तर पर स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी घोषित कर सकती हैं. यह पूरी तरह राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर करता है.
नियम तोड़ने पर क्या सजा मिलती है?
राजकीय शोक के दौरान फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के नियमों का पालन जरूरी होता है. अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज के नियमों का उल्लंघन करता है, प्रतिबंधित कार्यक्रम आयोजित करता है या सरकारी आदेशों की अवहेलना करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना या अन्य दंड लगाया जा सकता है.
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