क्या LPG की तरह PNG का भी किया जा सकता है इंपोर्ट-एक्सपोर्ट, जानें क्या है प्रकिया?
India Gas Supply: होर्मुज स्ट्रेट के पास हो रहे तनाव की वजह से एलपीजी आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आइए जानते हैं कि क्या LPG की तरह पीएनजी का भी इंपोर्ट एक्सपोर्ट हो सकता है.

India Gas Supply: मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव की वजह से एलपीजी आपूर्ति पर काफी असर पड़ा है. लेकिन एलपीजी सिलेंडरों के उलट अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मामले में पीएनजी का रास्ता काफी अलग होता है. पीएनजी का भी एक्सपोर्ट और इंपोर्ट किया जा सकता है लेकिन इसका तरीका काफी अलग होता है. आइए जानते हैं कैसे.
PNG vs LPG Supply: क्या है अंतर?
एलपीजी को जमा करना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसे सिलेंडरों में दबाकर ट्रक या फिर जहाज के जरिए भेजा जा सकता है. लेकिन पीएनजी मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है और इसे उस तरह से नहीं संभाला जा सकता. इसे लंबी दूरी तक ले जाने के लिए या तो इसे तरल रूप में बदलना पड़ता है या फिर पाइपलाइन के जरिए भेजना पड़ता है.
क्या है तरीका?
पीएनजी को इंपोर्ट करने का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका इसे लिक्विफाइड नेचुरल गैस में बदलना है. इस प्रक्रिया में नेचुरल गैस को लगभग - 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है. इससे यह तरल रूप में बदल जाती है और इसका वॉल्यूम लगभग 600 गुना कम हो जाता है. इससे खास क्रायोजेनिक जहाज का इस्तेमाल करके लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में गैस ले जाना संभव हो जाता है.
परिवहन और दोबारा गैस में बदलना
एक बार एलएनजी में बदलने के बाद इस ईंधन को विशेष रूप से डिजाइन किए गए टैंकर जहाज में भरकर समुद्र के रास्ते भेजा जाता है. जब यह मंजिल वाले देश में पहुंचती है तो इसे टर्मिनल में भेजा जाता है. यहां इसे वापस गैस में बदल दिया जाता है. गैस में बदलने के बाद इसे पाइपलाइनों के जरिए घर, उद्योग और बिजली संयंत्रों तक पीएनजी के रूप में पहुंचाया जाता है.
पाइपलाइन नेटवर्क
पीएनजी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का एक और तरीका सीमा पार पाइप लाइनों का इस्तेमाल करना है. ये पाइपलाइन जमीन के ऊपर या फिर पानी के नीचे भी बिछाई जा सकती हैं. लेकिन इसमें भारी निवेश और भू राजनीतिक सहयोग की जरूरत होती है.
क्यों है यह मुश्किल?
एलपीजी के उलट पीएनजी के लिए या तो काफी ठंडे स्टोरेज की जरूरत होती है या फिर एक बड़े पाइपलाइन नेटवर्क की जरूरत होती है. इस वजह से इसका इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ज्यादा महंगा और तकनीक रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
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Source: IOCL



























