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Space Debris: अंतरिक्ष का मलबा कैसे ठप कर सकता है रोजमर्रा की जिंदगी, जानें इंसानों को इससे क्यों है खतरा?

Space Debris: अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता ही जा रहा है. आइए जानते हैं कि यह इंसानों के लिए क्यों खतरनाक साबित हो सकता है.

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  • अंतरिक्ष का कचरा आधुनिक जीवन के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।
  • नेविगेशन, मोबाइल, इंटरनेट, बैंकिंग सेवाएं हो सकती हैं बाधित।
  • मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी, हवाई यातायात पर भी असर।
  • केसलर सिंड्रोम से भविष्य के अंतरिक्ष अभियान मुश्किल हो सकते हैं।

Space Debris: अंतरिक्ष का कचरा तेजी से दुनिया के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है. वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी दी है कि यह उन सक्रिय उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकता है जिन पर आधुनिक जीवन निर्भर करता है. इस कचरे में पुराने उपग्रह, रॉकेट के टूटे हुए हिस्से और अंतरिक्ष में हुए विस्फोटों के बाद बने छोटे-छोटे टुकड़े शामिल हैं. यह कचरा पृथ्वी के चारों ओर लगभग 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है. आइए जानते हैं कि यह इंसानों के लिए क्यों खतरनाक है.

नेवीगेशन सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं 

जीपीएस उपग्रहों का इस्तेमाल गाड़ी, विमान, जहाज और यहां तक कि फूड डिलीवरी एप्स में भी किया जाता है. अगर यह उपग्रह नष्ट हो जाते हैं तो नेविगेशन सिस्टम पूरी तरह से फेल हो सकते हैं. उड़ान और जहाज को रास्ते से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और स्मार्टफोन पर इस्तेमाल होने वाली मैप सेवाएं ठीक से काम करना बंद कर सकती हैं. 

सभी तरह की मोबाइल सेवाएं खतरे में 

उपग्रह संचार दुनिया भर में इंटरनेट कनेक्टिविटी, मोबाइल नेटवर्क और उपग्रह टेलीविजन सेवाओं को सहायता देता है. अंतरिक्ष में एक बड़ी टक्कर से कई क्षेत्रों में इंटरनेट ठप हो सकता है और संचार व्यवस्था फेल हो सकती है. बैंकिंग प्रणालियों को भी बाधा का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि एटीएम, ऑनलाइन बैंकिंग, शेयर बाजार और डिजिटल भुगतान प्रणालियां सटीक उपग्रह समय पर निर्भर करती हैं. अगर कम्युनिकेशन सेटेलाइट काम करना बंद कर देती है तो वित्तीय सेवाएं धीमी हो सकती हैं या फिर ठप भी हो सकती हैं.

मौसम के पूर्वानुमान पर पड़ेगा फर्क 

मौसम उपग्रह वैज्ञानिकों को चक्रवात, बारिश, तूफान और सूखे पर नजर रखने में मदद करते हैं. अगर यह सैटेलाइट किसी वजह से खराब हो जाती हैं तो मौसम का पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी प्रणालियां ठीक से काम करना बंद कर सकती हैं. इसी के साथ हवाई यातायात को भी गंभीर बाधा का सामना करना पड़ सकता है. 

केसलर सिंड्रोम का डर

वैज्ञानिक केसलर सिंड्रोम को लेकर भी चिंतित हैं. इस स्थिति में अंतरिक्ष में एक टक्कर से हजारों नए कचरे के टुकड़े बनते हैं जो फिर दूसरे उपग्रह से टकराते हैं और उससे भी ज्यादा कचरा पैदा करते हैं. यह खतरनाक प्रतिक्रिया भविष्य में उपग्रहों को लॉन्च करने और अंतरिक्ष अभियानों को काफी मुश्किल बना सकती है. 

पृथ्वी पर मौजूद इंसानों के लिए खतरा 

अंतरिक्ष के कचरे को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन और भारत के आगामी अभियानों पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक माना जाता है. एक छोटी सी टक्कर भी अंतरिक्ष यान की खिड़कियों को नुकसान पहुंचा सकती है.  साथ ही ज्यादातर कचरा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय जल जाता है लेकिन रॉकेट के बड़े टुकड़े बच सकते हैं और पृथ्वी की सतह पर गिर सकते हैं. वैज्ञानिक यह चेतावनी भी देते हैं कि कुछ पुराने उपग्रह में रेडियोधर्मी पदार्थ मौजूद होता है जो अगर पृथ्वी पर गिरता है तो खतरनाक साबित हो सकता है.

यह भी पढ़ेंः सरकार ने लोगों के मोबाइल पर भेजा मौसम का अलर्ट, जानें दुनिया में किसके पास है सबसे तगड़ा वार्निंग सिस्टम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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