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इजरायल ने 1970 में ही बना लिया था परमाणु बम, जानें उसने कैसे किया था इसका परीक्षण?

इजराइल को परमाणु संपन्न देश माना जाता है लेकिन आजतक ना तो इसकी आधिकारिक पुष्टि की है और ना ही इस बात से इंकार. एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल के पास आज 90 परमाणु हथियार हो सकते हैं.

इजरायल का परमाणु कार्यक्रम एक रहस्यमयी विषय रहा है. यह माना जाता है कि इजरायल ने 1960 के दशक के अंत तक परमाणु हथियार विकसित कर लिए थे, लेकिन उसने कभी भी इसकी आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया. इजरायल की नीति, जिसे 'परमाणु अस्पष्टता' कहा जाता है, के तहत वह अपने परमाणु हथियारों के बारे में खुलकर नहीं बोलता. ऐसे में चलिए जानते हैं कि इजरायल ने 1970 के दशक में परमाणु बम कैसे बनाया और इसका परीक्षण कैसे किया. 

इजरायल का परमाणु कार्यक्रम

इजरायल ने अपनी स्थापना के कुछ ही समय बाद 1948 में, परमाणु शोध शुरू कर दिया था. 1952 में इजरायली परमाणु ऊर्जा आयोग (IAEC) की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य परमाणु तकनीक पर शोध करना था. इजरायल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन ने माना कि परमाणु हथियार देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में कई देश इजरायल के खिलाफ थे. उस समय इजरायल के पास न तो तकनीक थी और न ही पर्याप्त संसाधन, इसलिए उसने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की राह चुनी. फ्रांस के साथ सहयोग1957 में इजरायल ने फ्रांस के साथ एक गुप्त समझौता किया, जिसके तहत फ्रांस ने नेगेव रेगिस्तान में डिमोना परमाणु रिएक्टर बनाने में मदद की. यह रिएक्टर इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम का आधार बना.

समझौता था गोपनीय

फ्रांस ने 24 मेगावाट का अनुसंधान रिएक्टर और तकनीकी सहायता प्रदान की. यह समझौता इतना गोपनीय था कि अमेरिका जैसे करीबी सहयोगी को भी इसकी जानकारी नहीं थी. डिमोना रिएक्टर ने प्लूटोनियम उत्पादन शुरू किया, जो परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी होता है. 

परमाणु बम का विकास

1960 के दशक के अंत तक विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल ने परमाणु विस्फोटक बनाने की क्षमता हासिल कर ली थी. 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के समय इजरायल के पास संभवतः कुछ परमाणु हथियार तैयार थे. 1973 के योम किप्पुर युद्ध के दौरान अमेरिका को भी यकीन हो गया कि इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं. लेकिन इजरायल ने कभी खुलकर परमाणु परीक्षण नहीं किया, जैसा कि भारत (1974 में पोखरण) या अन्य देशों ने किया.

क्या इजरायल ने 1970 में परमाणु परीक्षण किया?

इजरायल के परमाणु परीक्षण को लेकर सबसे चर्चित घटना 22 सितंबर 1979 की है, जिसे 'वेला घटना' कहा जाता है. दक्षिण अटलांटिक महासागर में, दक्षिण अफ्रीका के तट के पास, एक अमेरिकी वेला सैटेलाइट ने एक संदिग्ध परमाणु विस्फोट का संकेत दर्ज किया. कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह इजरायल और दक्षिण अफ्रीका का संयुक्त परमाणु परीक्षण था. हालांकि, इजरायल और दक्षिण अफ्रीका दोनों ने इसकी पुष्टि नहीं की. 

गुप्त रणनीति और जासूसी

इजरायल ने परमाणु तकनीक हासिल करने के लिए जासूसी और गुप्त तरीकों का भी सहारा लिया. 1960 के दशक में, इजरायल ने यूरोप और अमेरिका में यहूदी वैज्ञानिकों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया, जो परमाणु तकनीक से जुड़ी जानकारी साझा करते थे. इसके अलावा, इजरायल ने यूरेनियम और अन्य जरूरी सामग्री को गुप्त रूप से हासिल किया, इसमें सबसे बड़ा मामला तब का है जब 1960 के दशक के मध्य में अपोलो पेंसिल्वेनिया में परमाणु मटेरियल और उपकरण निगम से लगभग 200-600 पाउंड अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम गायब हो गया. अनुमान है कि इजरायल के पास आज 90 परमाणु हथियार हो सकते हैं, जो लड़ाकू जेट, पनडुब्बियों और बैलिस्टिक मिसाइलों से दागे जा सकते हैं. 

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About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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