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World Oldest Martial Art: यह है दुनिया की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट, जानें किसने किया था इसका आविष्कार

World Oldest Martial Art: कलारीपयट्टू दुनिया का सबसे पुराना मार्शल आर्ट है. आइए जानते हैं किसने की थी इसकी शुरुआत और कहां रखी गई थी इसकी नींव.

World Oldest Martial Art: मॉडर्न कॉम्बैट स्पोर्ट्स और ग्लोबल फाइटिंग स्टाइल के आने से काफी पहले भारत के दक्षिण पश्चिमी तट पर एक पुराना मार्शल सिस्टम बना था. केरल कलारीपयट्टू का जन्म स्थान है. कलारीपयट्टू दुनिया का सबसे पुराना मार्शल आर्ट है. इसकी जड़ें 3000 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं. लड़ने के एक तरीके से कहीं ज्यादा कलारीपयट्टू एक पूरा डिसिप्लिन है. इसमें फिजिकल ट्रेनिंग, हीलिंग साइंस, स्पिरिचुअलिटी और फिलॉसफी का एक मेल है.

कैसे हुई थी इसकी उत्पत्ति 

हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक कलारीपयट्टू को बनाने वाले भगवान परशुराम हैं. ये विष्णु भगवान के छठे अवतार थे. कहानियों में ऐसा कहा गया है कि भगवान परशुराम ने खुद भगवान शिव से लड़ने की कला सीखी और बाद में इसे केरल के लोगों को सिखाया ताकि वे अपनी जमीन की रक्षा कर सकें.  कहानियों के मुताबिक उन्होंने 108 कलारी या ट्रेनिंग स्कूल बनाए थे, जिससे पूरे इलाके में इस मार्शल परंपरा की नींव रखी गई.

ऋषि अगस्त्य की भूमिका 

कुछ परंपराएं अगस्त्य को कलारीपयट्टू के दक्षिणी रूप को बनाने का क्रेडिट भी देते हैं. अपनी स्पिरिचुअल पावर और मेडिसिन और योग के गहरे ज्ञान के लिए जाने जाने वाले अगस्त्य के बारे में ऐसा माना जाता है कि उन्होंने ऐसी तकनीक बनाई जिनमें फिजिकल ताकत को अंदरूनी एनर्जी और मेडिटेशन के साथ जोड़ा गया. उनके असर से इस कला का स्पिरिचुअलिटी और हीलिंग से काफी गहरा कनेक्शन दिखता है. 

हिस्टोरिकल नजरिया और वॉरियर कल्चर

हिस्टोरिकल नजरिया से  जानकारों का ऐसा मानना है कि कलारीपयट्टू केरल के वॉरियर कम्युनिटी खासकर नायरों के बीच डेवलप हुआ. सदियों से बैटलफील्ड तकनीक, लोकल डिफेंस जरूरत और ट्रेडिशनल नॉलेज एक स्ट्रक्चर्ड और साइंटिफिक कॉम्बैट सिस्टम से मिल गए. यह सर्वाइवल ट्रेनिंग के तौर पर शुरू हुआ और धीरे-धीरे एक डिसिप्लिन मार्शल ट्रेडीशन में बदल गया. 


क्यों कहा जाता है इसे मदर ऑफ मार्शल आर्ट्स

कलारीपयट्टू को अक्सर मदर ऑफ ऑल मार्शल आर्ट्स कहा जाता है. ऐसे इसलिए क्योंकि यह मान्यता बोधिधर्म से जुड़ी है. बोधिधर्म एक बौद्ध भिक्षु थे. उन्होंने 5वीं या 6वीं सदी में भारत से चीन की यात्रा की थी. उन्हें शाओलिन कुंग फू के डेवलपमेंट पर असर डालने का क्रेडिट दिया जाता है. उन्होंने मूवमेंट, सांस पर कंट्रोल और बॉडी कंडीशनिंग के ऐसे प्रिंसिपल शुरू किया जो कलारी तकनीक से काफी मिलते जुलते हैं. 

शरीर और मन का पूरा अनुशासन 

सिर्फ लड़ाई पर फोकस करने वाले कई कॉम्बैट सिस्टम के उलट कलारीपयट्टू में योग, आयुर्वेद, मेडिटेशन और आध्यात्मिक अनुशासन शामिल हैं. प्रेक्टिस करने वालों को सिर्फ हमला करने की ही ट्रेनिंग नहीं दी जाती बल्कि इंसानी शरीर को गहराई से समझने की भी ट्रेनिंग दी जाती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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