देश में अब तक कितने जजों के खिलाफ लाए गए महाभियोग, देख लें पूरी लिस्ट
Judges Who Faced Impeachment: भारत में इस वक्त दो जज चर्चा में बने हुए हैं, एक हैं जस्टिस यशवंत वर्मा और दूसरे हैं शेखर यादव. दोनों के खिलाफ महाभियोग पर चर्चा चल रही है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव इस वक्त सुर्खियों में बने हुए हैं. पिछले साल विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में दिए गए विवादित बयान के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. न्यामूर्ति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया चलने वाली है. इसको लेकर खबर है कि अब तक कम से कम 50 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. महाभियोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम इतने हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. वहीं पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर पर बड़ी मात्रा में नगदी मिली थी. ऐसे में इनके खिलाफ भी महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात चल रही है. चलिए जानें कि अब तक कितने जजों के खिलाफ महाभियोग लाया गया है.
> महाभियोग का सामना करने वाले सबसे पहले जस्टिस वी रामास्वामी थे. इन पर वित्तीय अनियमितता के आधार पर 1993 में महाभियोग की पहली कार्यवाही शुरू की गई थी. हालांकि उनके खिलाफ लाया गया प्रस्ताव असफल हो गया था. 6 अक्टूबर 1989 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश के रूप में जस्टिस वी रामास्वामी को नियुक्त किया गया था और वे 14 फरवरी 1994 को वे रिटायर हुए थे.
> इसके बाद साल 2011 में कलकत्ता हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति सौमित्र सेन पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगा था. उन पर भी महाभियोग चलाने की कोशिश हुई थी. इन पर राज्यसभा में महाभियोग लगाया गया था, लेकिन फिर लोकसभा में प्रस्ताव चर्चा के कुछ वक्त पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन पर चल रही कार्रवाई खत्म हो गई थी.
> फिर नंबर आया मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज एस के गंगेले का. साल 2015 में इन पर यौन उत्पीड़न के आरोप में महाभियोग की कार्यवाही हुई थी. उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी. लेकिन साल 2017 में उस कमेटी ने उनको दोषमुक्त कर दिया था.
> इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज जे बी पादरीवाला पर साल 2015 में महाभियोग चलाने की कोशिश हुई थी. उस वक्त वे गुजरात हाईकोर्ट के जज हुआ करते थे. उनके खिलाफ राज्यसभा के 58 सांसद नोटिस लाए थे. एक फैसले में टिप्पणियों के खिलाफ जस्टिस पादरीवाला को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. लेकिन नोटिस लाए जाने के बाद उन्होंने अपनी टिप्पणियों को हटा लिया था, जिसके बाद उन पर महाभियोग का प्रस्ताव खारिज हो गया था.
> आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाईकोर्ट के जज सी वी नागार्जुन पर साल 2017 में महाभियोग चलाने की कोशिश की गई थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने एक दलित न्यायाधीश को प्रताड़ित किया है, साथ ही साथ वित्तीय लेनदेन का भी आरोप लगा था. दोनों ही प्रस्ताव असफल रहे थे, क्योंकि साइन करने वाले राज्यसभा सांसदों ने अपने नाम वापस ले लिए थे.
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Source: IOCL





















