हजरतबल दरगाह में तोड़ा गया अशोक चिह्न, जानें राष्ट्रीय प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने पर कितनी मिलती है सजा?
Hazratbal Dargah Controversy: श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ वाली पट्टिका तोड़ने का मामला सामने आया है. चलिए जानें कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने पर कितनी सजा हो सकती है.

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शुक्रवार को ईद-ए-मिलाद के मौके पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. हजरतबल दरगाह, जिसे घाटी की सबसे पवित्र दरगाह माना जाता है, वहां लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी. इसी दौरान दरगाह परिसर में लगी अशोक स्तंभ वाली एक नई पट्टिका को कुछ लोगों ने तोड़ दिया. इस घटना के बाद मौके पर भारी हंगामा हुआ और प्रशासन को सुरक्षा कड़ी करनी पड़ी. हजरतबल दरगाह का मुस्लिम धर्म में बहुत महत्व है.
अब सवाल यह उठता है कि यदि कोई राष्ट्रीय प्रतीक, जैसे अशोक स्तंभ, तिरंगा या अन्य चिन्ह का अपमान करता है, तो कानून में इसके लिए क्या सजा तय है? दरअसल, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान बनाए रखने के लिए भारत में एक विशेष कानून बनाया गया है, चलिए जानें.
क्या है कानून और कितनी हो सकती है सजा
देश में नाम और प्रतीक अधिनियिम 1950 है. इस कानून के मुताबिक, पहले अगर कोई राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करता था तो उस पर केवल 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन समय के साथ इस कानून को और सख्त करने की जरूरत महसूस की गई. केंद्र सरकार ने इसमें बदलाव का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक करने की बात कही गई. इतना ही नहीं, अगर कोई बार-बार इस अपराध को करता है तो उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल की सजा भी दी जा सकती है.
पीएसए के तहत भी हो सकती है कार्रवाई
यही नहीं, कुछ मामलों में पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत भी कार्रवाई हो सकती है. PSA जम्मू-कश्मीर में पहले से लागू एक सख्त कानून है, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक शांति भंग करने या सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश पर तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है. वहीं, अगर मामला राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे के अपमान से जुड़ा हो, तो स्थिति और गंभीर हो जाती है. भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर दोषी को 3 साल तक की कैद और जुर्माना दोनों भुगतने पड़ सकते हैं.
राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान नहीं होगा बर्दाश्त
सरकार का साफ तौर पर कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से छेड़छाड़ या उनका अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसे कृत्य केवल कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि देश की भावनाओं और एकता पर चोट माने जाते हैं. ऐसे में श्रीनगर की यह घटना बताती है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है और इनके अपमान पर कानून बेहद सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखता है.
यह भी पढ़ें: किसने बनवाई थी हजरतबल दरगाह, जहां अशोक चिह्न का हुआ अपमान; यहां किसकी 'दाढ़ी के बाल' रखे हैं?
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























