किसने बनवाई थी हजरतबल दरगाह, जहां अशोक चिह्न का हुआ अपमान; यहां किसकी 'दाढ़ी के बाल' रखे हैं?
Hazratbal Dargah Controversy: जम्मू कश्मीर की हजरतबल दरगाह में अशोक चिन्ह तोड़े जाने को लेकर मामला गर्माया हुआ है. चलिए जानें कि यह दरगाह क्यों मशहूर है और यहां किसकी दाढ़ी के बाल रखे हैं.

Hazratbal Dargah Controversy: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में स्थित एतिहासिक हजरतबल दरगाह में बीते शुक्रवार को ईद-ए-मिलाद के जश्न के दौरान बवाल हो गया. इस दौरान दरगाह में लगी अशोक चिन्ह वाली एक पट्टिका के साथ तोड़फोड़ की गई और उस पर लगा अशोक चिन्ह तोड़ डाला गया. इसके बाद से जमकर बवाल मचा हुआ है. पवित्र हजरतबल दरगाह की बहुत मान्यता है और मुस्लिम लोग इस मस्जिद का बहुत सम्मान करते हैं. चलिए इस दरगाह का इतिहास जानें और यह भी जानते हैं कि यहां किसकी दाढ़ी के बाल रखे हैं.
किसने बनवाई थी हजरतबल दरगाह?
जम्मू-कश्मीर की वादियों में डल झील के किनारे बसी हजरतबल दरगाह न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व और खूबसूरत वास्तुकला के कारण भी प्रसिद्ध है. इसका इतिहास 17वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है. जिस स्थान पर आज यह दरगाह मौजूद है, वहां पहले इशरत महल और एक सुंदर बगीचा हुआ करता था. इसका निर्माण वर्ष 1623 में मुगल सम्राट शाहजहां के सूबेदार सादिक खान ने करवाया था.
किसकी दाढ़ी के बाल रखे हैं यहां?
दरगाह की सबसे बड़ी पहचान पैगंबर मोहम्मद साहब की दाढ़ी का बाल (रौ-ए-मुबारक) है, जिसे यहां संरक्षित किया गया है. यही कारण है कि इसे असर-ए-शरीफ, दरगाह शरीफ और मदीन-उस-सानी के नाम से भी जाना जाता है. जम्मू-कश्मीर टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन JKTDC के अनुसार, इसकी देखरेख मुस्लिम औकाफ ट्रस्ट करता है और आधुनिक स्वरूप का निर्माण 1968 में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की निगरानी में शुरू हुआ था.
अद्भुत वास्तुकला का नमूना
सफेद संगमरमर से बनी इस गुंबददार दरगाह का निर्माण साल 1979 में पूरा हुआ था. लगभग 11 साल तक चले इस कार्य के बाद आज यह दरगाह घाटी की सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है. खासतौर पर जुम्मे की नमाज के समय यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं. इसके अलावा साल भर पर्यटक भी यहां दर्शन करने और इसकी अद्भुत वास्तुकला को देखने आते रहते हैं.
डल झील के किनारे चांदी की तरह चमकती यह दरगाह चांदनी रात में और भी आकर्षक लगती है. शिकारे से पहुंचने वाले यात्रियों को इसका नजारा किसी सपने जैसा लगता है. यही वजह है कि हजरतबल दरगाह आज भी न केवल मुस्लिमों की आस्था का प्रतीक है बल्कि कश्मीर की विरासत और पर्यटन का अहम हिस्सा भी है.
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Source: IOCL

























