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Oil Well Fire: धमाके से कैसे बुझाई जाती है तेल के कुएं की आग? ईरान के हमलों के बीच जान लीजिए जवाब

Oil Well Fire: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के दौरान कई तेल और गैस ठिकानों पर हमले हुए हैं. आइए जानते हैं कि तेल के कुएं में लगी आग को कैसे बुझाया जाता है.

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  • मध्य पूर्व में तेल ठिकानों पर हमले, वैश्विक चिंताएं बढ़ीं।
  • तेल कुओं की आग बुझाना ईंधन के निरंतर बहाव से कठिन।
  • धमाके से ऑक्सीजन हटाकर आग की लपटें बुझाई जाती हैं।
  • ठंडा करने व सील करने के बाद रिसाव को रोका जाता है।

Oil Well Fire: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौरान मध्य पूर्व के कई तेल और गैस ठिकानों पर हमले हुए हैं. सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हुए हमले से भीषण आग लग गई है. इस वजह से दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है. इस वजह से आग को तेजी से बुझाना काफी जरूरी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि तेल के कुओं में लगी आग को आखिर कैसे बुझाया जाता है.

तेल के कुओं में लगी आग इतनी खतरनाक क्यों होती है?

तेल के कुएं में लगी आग आम आग जैसी नहीं होती. सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि ईंधन का स्रोत, कच्चा तेल या फिर गैस लगातार और बेकाबू होकर बहता रहता है. यह लगातार आपूर्ति आग की लपटों को और तेज करती है. इस वजह से उन्हें बुझाना काफी मुश्किल हो जाता है. आग बुझाने के पारंपरिक तरीके अक्सर नाकाम हो जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ पानी छिड़कने से ना तो ईंधन का बहाव रुकता है और ना ही आग की ऊर्जा खत्म होती है.

धमाके से ऑक्सीजन को हटाना 

इस तकनीक के मूल में एक बुनियादी वैज्ञानिक सिद्धांत काम करता है. आग को जलते रहने के लिए तीन चीजों की जरूरत होती है. ईंधन, गर्मी और ऑक्सीजन. अगर इनमें से कोई एक भी चीज हटा दी जाए तो आग बुझ जाती है. जब तेल के जलते हुए कुएं के मुहाने के पास एक धमाका किया जाता है तो उससे एक जोरदार शॉकवेव पैदा होती है. यह अचानक हुआ धमाका आग वाले क्षेत्र के आसपास के ऑक्सीजन को कुछ ही पलों के लिए दूर धकेल देता है. ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से आग की लपटें खुद को जलाए नहीं रख पाती और तुरंत बुझ जाती हैं. 

भले ही यह सुनने में तबाही मचाने वाला तरीका लगे, लेकिन यह काफी नियंत्रित होता है. विस्फोटक को काफी सावधानी से रखा जाता है ताकि वह कुएं की बनावट को कोई और नुकसान पहुंचाए बिना सीधे आग की लपटों को ही निशाना बनाए. 

 जगह को ठंडा करने की प्रक्रिया 

धमाके के तुरंत बाद कुएं और उसके आसपास लगे उपकरणों पर भारी मात्रा में पानी का छिड़काव किया जाता है. यह इस वजह से जरूरी है क्योंकि आग की लपटें बुझ जाने के बाद भी धातु से बनी संरचना काफी गर्म रहती हैं. जगह को ठंडा करने से यह पक्का होता है कि जब उस क्षेत्र में दोबारा ऑक्सीजन पहुंचे तो आग फिर से ना भड़क उठे.

आग की लपटें बुझ जाने के बाद इंजीनियर तेजी से आगे बढ़कर कुएं के मुहाने को बंद कर देते हैं. रिसाव के स्रोत को सील करने के लिए खास उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे तेल या फिर गैस का बहाव पूरी तरह से रुक जाता है.

यह भी पढ़ें: चीन से कौन सा तेल खरीदता है भारत, जानें हर साल कितना किया जाता है आयात?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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