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किसी से नहीं मिलतीं इन देशों की सरहदें, दुनिया की भीड़ में पड़े अकेले

दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जिनकी सीमाएं किसी पड़ोसी मुल्क से नहीं मिलतीं हैं. ये देश चारों ओर से समुद्र से घिरे हैं, जिससे इन्हें जमीनी विवादों से तो आजादी मिली है, लेकिन व्यापार के लिए समस्याएं हैं.

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  • यह भौगोलिक अकेलापन देशों की सुरक्षा और पहचान बनाता है.

दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो अधिकतर देश अपनी सीमाओं को लेकर किसी न किसी पड़ोसी से जुड़े रहते हैं. कहीं दोस्ती के किस्से हैं, तो कहीं जमीनी विवाद की लंबी जंग. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस भरी-पूरी दुनिया में कुछ ऐसे भी देश हैं जिन्हें कभी पड़ोसियों का सुख नहीं मिला? इन देशों की सरहदें किसी दूसरे मुल्क की जमीन को नहीं छूतीं और ये चारों तरफ से सिर्फ अथाह समंदर से घिरे हुए हैं. तकनीक और तरक्की में आगे होने के बावजूद ये देश भूगोल के मामले में दुनिया की भीड़ में बिल्कुल अकेले खड़े हैं. इनका कोई भी पड़ोसी न होना इनकी सबसे बड़ी पहचान भी है और इनकी चुनौतियों की मुख्य वजह भी.

पड़ोसी न होने के फायदे और बड़े नुकसान

पड़ोसी न होना किसी देश के लिए वरदान और अभिशाप दोनों की तरह काम करता है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन देशों को कभी भी सीमा विवाद या घुसपैठ जैसी सिरदर्दी नहीं झेलनी पड़ती है. यहां सरहद पर तनाव नहीं होता, क्योंकि जमीन किसी दूसरे देश से जुड़ती ही नहीं. हालांकि, इसका एक बड़ा नुकसान व्यापार और परिवहन के क्षेत्र में दिखता है. इन देशों को सामान मंगाने या भेजने के लिए केवल समुद्री या हवाई मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है. जमीनी रास्ते से व्यापार करना इनके लिए नामुमकिन है, जिससे इनकी निर्भरता बंदरगाहों पर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.

ऑस्ट्रेलिया- दुनिया का सबसे बड़ा अकेला द्वीप

इस फेहरिस्त में सबसे पहला और प्रमुख नाम ऑस्ट्रेलिया का आता है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप और सबसे छोटा महाद्वीप कहा जाता है. ऑस्ट्रेलिया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह चारों ओर से हिंद महासागर और प्रशांत महासागर से घिरा हुआ है. इसकी हजारों किलोमीटर लंबी तटरेखा है, लेकिन एक इंच भी जमीन ऐसी नहीं है जो किसी दूसरे देश से मिलती हो. यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया अपनी जैव विविधता और सुरक्षा के मामले में बाकी दुनिया से काफी अलग और सुरक्षित माना जाता है.

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न्यूजीलैंड

ऑस्ट्रेलिया के पास स्थित न्यूजीलैंड भी इसी कतार में शामिल है. यह एक खूबसूरत द्वीपीय देश है जिसकी प्राकृतिक सुंदरता दुनिया भर में मशहूर है. न्यूजीलैंड की जमीनी सीमा भी किसी दूसरे देश के साथ साझा नहीं होती. यह देश पूरी तरह से पानी के बीच बसा है. पड़ोसियों का सुख न मिलने के बावजूद न्यूजीलैंड ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. व्यापार के लिए यह देश पूरी तरह समुद्री मार्गों पर टिका है, लेकिन अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर यह काफी हद तक निश्चिंत रहता है.

जापान- तकनीक में अव्वल पर सरहद पर अकेला

एशिया के पूर्व में स्थित जापान को उगते सूरज की धरती कहा जाता है. जापान एक द्वीप समूह देश है जो कई छोटे-बड़े द्वीपों से मिलकर बना है. तकनीक और अर्थव्यवस्था के मामले में जापान ने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन भूगोल ने इसे भी अकेला ही रखा है. जापान का कोई भी जमीनी पड़ोसी नहीं है. इसके चारों तरफ समुद्र है, जो इसे चीन, रूस और कोरिया जैसे देशों से अलग करता है. यह अकेलापन ही जापान की सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच भी रहा है.

आइसलैंड- अटलांटिक के ठंडे पानी में अलग पहचान

उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित आइसलैंड अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थितियों के कारण जाना जाता है. यह देश आर्कटिक सर्कल के करीब है और पूरी दुनिया से एक तरह से कटा हुआ है. आइसलैंड की भू-सीमा किसी भी दूसरे देश की सीमा को स्पर्श नहीं करती है. बर्फ और ज्वालामुखियों की इस धरती ने सदियों से अपनी अलगाववादी स्थिति का फायदा उठाया है. यहां न तो बॉर्डर पर सेना की भारी तैनाती की जरूरत पड़ती है और न ही किसी पड़ोसी के साथ संसाधनों को लेकर कोई खींचतान होती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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