अब किसी भी ब्लड ग्रुप को बनाया जा सकेगा यूनिवर्सल डोनर, जानें किस तकनीक से होगा यह कमाल?
वैज्ञानिकों ने पेट के बैक्टीरिया से मिलने वाले एंजाइमों की मदद से ए, बी और एबी ब्लड ग्रुप को 'यूनिवर्सल ओ-टाइप' खून में बदलने की तकनीक खोज ली है, जिससे भविष्य में रक्त संकट पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

मेडिकल साइंस की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है, जो आने वाले वक्त में पूरी दुनिय में खून के संकट को खत्म कर सकता है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनूठी तकनीक खोज निकाली है, जिसकी मदद से अब हर ब्लड ग्रुप को आसानी से यूनिवर्सल डोनर O-Type के खून में बदला जा सकेगा. इस एतिहासिक खोज के लिए शोधकर्ताओं ने इंसानी आंत में मिलने वाले खास बैक्टीरिया की मदद ली है. यह तकनीक ब्लड बैंकों की व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल सकती है.
इंसानी आंत से मिला अनोखा उपाय
इस पूरे चमत्कार के पीछे मेटैजेनोमिक्स तकनीक और हमारे पेट के माइक्रोबायोम यानी बैक्टीरिया का संसार है. वैज्ञानिकों ने इंसानी आंत के अंदर रहने वाले सूक्ष्म बैक्टीरिया का बारीकी से अध्ययन किया. इस रिसर्च के दौरान उनको कुछ ऐसे बैक्टीरियल एंजाइम मिले, जिसमें कमाल की क्षमता है. ये एंजाइम अलग-अलग ब्लड ग्रुप की पहचान तय करने वाले शुगर-बेस्ड एंटीजन को पूरी तरह से हटा सकते हैं. यही एंटीजन असल में यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप क्या होगा.
ऐसे काम करता है माइक्रोबियल मेकओवर
जब इन खास एंजाइमों को अलग-अलग ब्लड ग्रुप के खून के साथ मिलाया जाता है तो ये लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद ए और बी एंटीजन को पूरी तरह से साफ कर देते हैं. विज्ञान की भाषा में इसे माइक्रोबियल मेकओवर कहा जाता है. एंटीजन के हटते ही खून अपनी पुरानी पहचान खो देता है और ग्रु ब्लड ग्रुप जैसा बन जाता है. इस प्रक्रिया के बाद जब यह खून किसी अन्य मरीज को चढ़ाया जाता है तो उसका शरीर इसे बाहरी दुश्मन मानकर हमला नहीं करेगा.
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ब्लड बैंकों के लिए वरदान
दुनियाभर के अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों मे सबसे ज्यादा मांग ओ-नेगेटिव ब्लड ग्रुप की होती है, क्योंकि यह खून किसी भी मरीज को बिना मैच किए चढ़ाया जा सकता है. लेकिन मुश्किल यह है कि दुनिया में हर 15 में से सिर्फ एक व्यक्ति का ग्रुप ही ओ-नेगेटिव होता है. ऐसे में आपातकालीन स्थिति में अक्सर इस खून की भारी किल्लत हो जाती है. इस नई तकनीक के सफल हो जाने से ब्लड बैंक में किसी भी आम ब्लड डोनेशन को तुरंत यूनिवर्सल ओ टाइप खून में बदल सकेंगे.
सुरक्षा को लेकर सावधानी
लैब के भीतर किए गए परीक्षणों में यह तकनीक बेहद कारगर और सटीक साबित हुई है, लेकिन इसे आम मरीजों तक पहुंचाने से पहले वैज्ञानिक बेहद सावधानी बरत रहे हैं. गलत या फिर मिसमैच ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण मरीज के शरीर में जानलेवा रिएक्शन हो सकता है. इसीलिए अब इस एंजाइम से बदले हए खून का जीवित जीवों पर गहन परीक्षण किया जाएगा. इंसानी क्लीनिकल ट्रायल के पूरी तरह से सफल हो जाने के बाद ही इसे अस्पतालों में इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जाएगी.
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