Iran Protests: इस्लामिक कंट्री होने के बावजूद कितने मुस्लिम देशों से है ईरान की दुश्मनी, क्या है इसकी वजह?
Iran Protests: ईरान के अंदर इस वक्त गंभीर आंतरिक संकट चल रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि एक मुस्लिम देश होने के बावजूद भी ईरान की किन दूसरे मुस्लिम देशों के साथ दुश्मनी चल रही है.

Iran Protests: ईरान सालों में अपने सबसे गंभीर अंदरुनी संकटों में से एक का सामना कर रहा है. महंगाई और आर्थिक परेशानियों की वजह से बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इस उथल-पुथल के बीच आइए जानते हैं कि ईरान खुद एक इस्लामिक देश है उसके बावजूद कितने मुस्लिम देशों से उसकी दुश्मनी है. आइए जानते हैं क्या है इस दुश्मनी के पीछे की वजह.
मुस्लिम दुनिया के साथ ईरान का शीत युद्ध
2026 तक कई मुस्लिम बहुसंख्यक देशों के साथ ईरान के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. हालांकि कुछ देश जैसे कि सऊदी अरब के साथ राजनयिक संबंध बेहतर हुए हैं लेकिन गहरा रणनीतिक अविश्वास बना हुआ है.
वो मुस्लिम देश जिनके साथ ईरान के संबंध खराब
सऊदी अरब
सऊदी अरब ईरान का सबसे बड़ा क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी है. दोनों देश इस्लामिक दुनिया में लीडरशिप और पूरे मध्य पूर्व में प्रभाव के लिए एक दूसरे के खिलाफ खड़े होते हैं. हालांकि 2023 में थोड़े बहुत संबंध बेहतर हुए हैं लेकिन यमन, सीरीया, लेबनान और क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर यह लड़ाई अभी भी अनसुलझी है.
बहरीन
बहरीन लंबे समय से ईरान पर अपने आंतरिक मामलों में दखल देने और अपने शिया आबादी के बीच अशांति को फैलाने का आरोप लगाता रहा है. संबंध काफी ज्यादा तनावपूर्ण बने हुए हैं और बहरीन ईरान को सीधा सुरक्षा खतरा मांगता है.
संयुक्त अरब अमीरात
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तीन विवादित द्वीप अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है. हालांकि व्यापारिक संबंध अभी मौजूद है लेकिन राजनीतिक और सुरक्षा अविश्वास बना हुआ है.
जॉर्डन, मिस्त्र और मोरक्को
यह सुन्नी बहुसंख्यक देश ईरान के साथ सतर्क या दूर का संबंध बनाए रखते हैं. उनकी चिंताएं ईरान की क्षेत्रीय गतिविधि, वैचारिक प्रभाव और आतंकवाद समूह को समर्थन पर केंद्रित है.
क्यों है यह संबंध खराब
ईरान दुनिया का सबसे बड़ा शिया मुस्लिम देश है जबकि ज्यादातर मुस्लिम देश सऊदी अरब के लीडरशिप के अंदर आते हैं और सुन्नी बहुसंख्यक हैं. यह सांप्रदायिक विभाजन अक्सर राजनीतिक हो जाता है जो पूरे क्षेत्र में गठबंधन और दुश्मनी को आकार देता है. इसी के साथ ईरान फारसी खाड़ी से लेकर भूमध्य सागर तक अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहता है. सुन्नी अरब देश ईरान के बढ़ते प्रभाव को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए खतरा मानते हैं.
इसी के साथ ईरान हिज्बुल्लाह, हौथी, और इराक और सीरिया में सहयोगी मिलिशिया जैसे समूह का समर्थन करता है. तेहरान इसे रक्षात्मक प्रतिरोध मानता है और दुश्मन मुस्लिम देश इसे अस्थिर करने वाला हस्तक्षेप मानते हैं.
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Source: IOCL
























