कहां है खर्ग आईलैंड, जिस पर हमले का ट्रंप ने किया दावा, क्यों कहा जाता है इसे ईरान का दिल, जानें सब कुछ
ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच पहली बार खर्ग आईलैंड को निशाना बनाया गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी की.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच दो सप्ताह से जंग जारी है और ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आईलैंड पर जोरदार बमबारी की है. ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले में आईलैंड पर मौजूद हर सैन्य ठिकाना तबाह हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगला निशाना आइलैंड पर मौजूद अहम तेल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा. डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि US सेंट्रल कमांड ने मिडिल ईस्ट के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक को अंजाम दिया है और ईरान के क्राउन ज्वेल खर्ग आईलैंड पर मौजूद हर सैन्य ठिकाने को पूरी तरह तबाह कर दिया है.
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने आगे लिखा कि मैंने आईलैंड के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह न करने का फैसला किया है. हालांकि ईरान या कोई और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन में किसी भी तरह की रुकावट डालता है तो मैं तुरंत अपने फैसले पर दोबारा विचार करूंगा. उन्होंने कहा कि ईरान में ऐसी किसी चीज की रक्षा कर पाने की क्षमता नहीं है, जिस पर हम हमला करना चाहें.
कहां है खर्ग आईलैंड
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, फारस की खाड़ी में मौजूद खर्ग आइलैंड को ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का हार्ट कहा जाता है. बुशहर बंदरगाह से 55 किमी (34 मील) उत्तर-पश्चिम में और ईरानी मुख्य भूमि से 15 समुद्री मील (लगभग 28 किमी के बराबर) की दूरी पर स्थित खर्ग ईरान की आर्थिक रीढ़ है. ईरान का 90 फीसदी तेल यही से एक्सपोर्ट होता है. 8 किमी (5 मील) लंबा और 4-5 किमी (2.5-3 मील) चौड़ा होने के कारण इसके चारों ओर का गहरा जल क्षेत्र इसे प्राकृतिक रूप से सुरक्षित बनाता है.
पहली बार हुआ हमला
अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बीच पहली बार इस आइलैंड को निशाना बनाया गया है. इसके पहले तक अमेरिका और इजरायल ने पूरे ईरान में सैन्य ठिकानों, मिसाइल और न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमले किए, लेकिन इस आईलैंड को अबतक छुआ तक नहीं गया था. एक्सियोस की एक रिपोर्ट में कुछ दिनों पहले बताया गया था कि ट्रंप प्रशासन इस आईलैंड के लिए सैन्य योजना पर विचार कर रहा है. इसमें खर्ग आईलैंड पर कब्जा करना भी शामिल है.
क्यों हुआ हमला
बता दें कि खर्ग आईलैंड पर हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी सेना ने 2500 सैनिक और 1 एम्फीबियस असॉल्ट शिप को मिडिल ईस्ट में भेजने का आदेश दिया है. जेपी मॉर्गन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, खर्ग आईलैंड ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम है. विशेषज्ञों का कहना है कि एक सीधा हमला ईरान के कच्चे तेल के निर्यात के बड़े हिस्से को तुरंत रोक देगा. ईरान का 90 फीसदी तेल इसी आइलैंड से जहाजों में भरकर बाहर भेजा जाता है.
जानकारों के मुताबिक खर्ग आईलैंड में ईरानी तेल फैसिलिटी को निशाना बनाए जाने पर होर्मुज जलडमरूमध्य और गल्फ देशों में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ गंभीर जवाबी हमले शुरू हो सकते हैं. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने धमकी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ढांचे पर जरा सा भी हमला हुआ तो वो क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस को आग लगा देगा.
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Source: IOCL


























