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इजरायल के आयरन डोम से एक मिसाइल फायर होने पर इतना पैसा होता है खर्च, हैरान रह जाएंगे आप

इजरायल के हमलों के खिलाफ ईरान कड़ी प्रतिक्रिया दे रहा है. ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल की राजधानी तेल अवीव व हाइफा जैसे महत्वपूर्ण देशों को निशाना बनाया जा रहा है.

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग एक खतरनाक मोड़ की तरफ बढ़ती जा रही है. एक तरफ ईरान अपनी घातक बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल पर हमला बोल रहा है तो दूसरी तरफ अमेरिका के भी युद्ध में शामिल होने की आशंका है. वहीं, रूस और चीन जैसे देशों ने भी ईरान को समर्थन की बात कही है. ऐसे में ईरान और इजरायल जैसे दो मुल्कों के बीच छिड़ी जंग का दायरा बढ़ भी सकता है. 

फिलहाल, इजरायल के हमलों के खिलाफ ईरान कड़ी प्रतिक्रिया दे रहा है. ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल की राजधानी तेल अवीव व हाइफा जैसे महत्वपूर्ण देशों को निशाना बनाया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान मिसाइल व ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इजरायल हर दिन करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि ईरानी मिसाइल व ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इजरायल कितने पैसे खर्च कर रहा है. इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम से एक मिसाइल फायर होने पर कितना खर्च आता है? 

2006 से इजरायल की रक्षा में तैनात है आयरन डोम

इजरायल ने दुश्मन देशों से रक्षा के लिए चारों तरफ एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम तैनात किया है. आयरन डोम को दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस में गिना जाता है, जो दुश्मन के हर हमले को नाकाम करने की क्षमता रखता है. पूरे इजरायल में आयरन डोम की बैटरियां स्थापित हैं. हर बैटरी में तीन से चार लॉन्चर होते हैं, जिसमें प्रत्येक में 20 इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं. इजरायल का दावा है कि आयरन निशाने पर आने वाली 90% मिसाइलों को मार गिरा सकता है. 

एक मिसाइल दागने पर इतना होता है खर्च

इजरायल ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए पैसा पानी की तरह बहाया है. इजरायल का रक्षा कवच कहे जाने वाले आयरन डोम की लागत करीब 3 लाख करोड़ रुपये है, यह रकम पूरे ईरान के रक्षा बजट से भी ज्यादा है. यह एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाता है और इसकी एक मिसाइल की कीमत 20,000 से 100,000 डॉलर (16 लाख से 83 लाख) रुपये तक है. 

यह भी पढ़ें: इजरायल की मोसाद के सामने कहां टिकती है ईरानी खुफिया एजेंसी MOIS, कौन है ज्यादा खतरनाक?

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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