India LPG Imports: क्या सस्ती होने वाली है LPG गैस, ईरान ने हॉर्मुज से किन प्रतिबंधों को हटाया?
India LPG Imports: हाल ही में ईरान ने भारत के कमर्शियल जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के गुजरने की अनुमति दे दी है. आइए जानते हैं कि क्या इसके बाद तेल की कीमतों में कोई कमी आएगी.

- ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट में दी छूट।
- भारत के ऊर्जा आयात का यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग।
- अब तेल-गैस आपूर्ति सुगम होगी, चिंताएं कम होंगी।
- इससे घरेलू ऊर्जा कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।
India LPG Imports: लगभग 8 महीनों की पाबंदियों के बाद ईरान ने भारत के कमर्शियल जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रूकावट के गुजरने की अनुमति दे दी है. इस छूट में चीन, इराक और कतर के जहाज भी शामिल हैं. इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पर 28 फरवरी से पाबंदियां लगी हुई थीं. यह फैसला भारत के लिए काफी जरूरी है क्योंकि भारत का लगभग 40% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है. इसी के साथ देश की लगभग 90% एलपीजी की जरूरत भी इसी रास्ते से पूरी होती है.
पाबंदियों में ढील मिलने से कच्चे तेल और कुकिंग गैस की सप्लाई में रुकावट आने की चिंता कम हो गई है. इससे घरेलू ऊर्जा कीमतों पर भी दबाव कम हो सकता है. हालांकि एलपीजी की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी इसकी कोई गारंटी नहीं है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और दूसरे आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगा.
ईरान ने कौन सी पाबंदी हटाई है?
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के मुताबिक ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में भारत, चीन, इराक और कतर के कमर्शियल जहाजों को अपनी ट्रांजिट पाबंदियों से छूट दे दी है. अब इन चार देशों के जहाज बिना किसी रूकावट के इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं.
ईरानी अधिकारियों ने इस फैसले को आपसी हितों पर आधारित बताया है. उदाहरण के तौर पर भारत से ईरान तक दवाओं की आवाजाही का जिक्र किया गया है. उम्मीद है कि इस छूट से भारतीय दवाएं आसानी से ईरान पहुंच सकेंगी और दोनों देशों के बीच कमर्शियल शिपिंग भी जारी रह सकेगी.
इस छूट का मतलब यह नहीं होता कि हर देश के लिए यहां से गुजरना पूरी तरह मुफ्त होगा. ईरान ने कहा कि वह भारतीय और चीनी जहाजों से ट्रांजिट शुल्क लेगा. हालांकि कतर के जहाजों को बिना किसी ट्रांजिट शुल्क के गुजरने की अनुमति होगी. शुल्क की राशि अभी तय नहीं की गई है.

भारत के लिए यह रास्ता क्यों जरूरी है?
होर्मुज स्ट्रेट भारत के ऊर्जा इंपोर्ट के लिए एक काफी जरूरी रास्ता है. देश का लगभग 40% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है. कुकिंग गैस के मामले में तो भारत इस रास्ते पर और भी ज्यादा निर्भर है. ऐसा इसलिए क्योंकि देश की लगभग 90% एलपीजी जरूरतें इसी रास्ते से पूरी होती हैं.
इस वजह से शिपिंग पर लगी पाबंदियों की वजह से खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई में देरी या फिर रुकावट आने की चिंता पैदा हो गई थी. अगर सप्लाई में कोई रुकावट आती है तो भारत में इसकी उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता था और आयातकों के लिए लागत और भी बढ़ सकती थी. इस छूट के मिलने से खाड़ी देशों से आने वाले भारतीय गैस टैंकर अब काफी ज्यादा सुरक्षित तरीके से और बिना किसी रूकावट के भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकेंगे.
आवाजाही शुरू होने से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है. इससे यह तात्कालिक खतरा भी कम हो गया है कि रास्ते में लगी पाबंदियों की वजह से कच्चे तेल और कुकिंग गैस की सप्लाई चेन बाधित हो सकती है.

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क्या एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं?
सप्लाई चेन शुरू होने से सीमित उपलब्धता और इंपोर्ट की ज्यादा लागत के कारण बना दबाव कम हो सकता है. जब किसी चीज की आपूर्ति ज्यादा भरोसेमंद हो जाती है तो बाजार में उसकी कीमत स्थिर रह सकती है या फिर उसमें गिरावट आ सकती है. पाबंदी में ढील मिलने से भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर आयात लागत का बोझ कम हो सकता है.
इन बदलावों से अंत में उपभोक्ताओं को फायदा हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं. हालांकि ईरान के इस फैसले से खुदरा कीमतें सीधे तय नहीं होती और ना ही इसकी कीमतों में तुरंत कमी आने की कोई गारंटी मिलती है. कच्चे तेल की वैश्विक कीमत और दूसरे आर्थिक कारक इस बात को तय करते रहेंगे कि उपभोक्ताओं को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी.
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