1971 में 15 दिनों तक हरे कपड़े से छिपाया गया था ताजमहल, क्या मॉक ड्रिल में भी ऐसा होगा?
1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध में ताजमहल को 15 दिन के लिए ढक कर रखा गया था. इस दौरान ताजमहल को एक हरे रंग के टीले में तब्दील किया गया था, जिससे दुश्मन इसे निशाना न बना सके.

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को 7 मई यानी आज मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए हैं. इस दौरान सिविल डिफेंस और पुलिस द्वारा आम नागरिकों को जंग जैसे हालात में बचने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा. साथ ही यह भी बताया जाएगा कि एयर अलर्ट जारी होने के बाद नागरिकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या होगी. बता दें, भारत ने सरकार ने मॉक ड्रिल से एक दिन पहले ही पाकिस्तान में एयरस्ट्राइक कर आतंकियों के खात्मे की शुरुआत कर दी है.
भारत की ओर से 6-7 मई की दरमियानी रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर किए गए हमले के बाद बॉर्डर पर जंग की आशंका बढ़ गई है. हमले के बाद भारत के साथ-साथ पाकिस्तान की सेना भी अलर्ट हो चुकी है. ऐसे में किसी भी युद्ध जैसी सिचुएशन में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है. इस तरह की मॉक ड्रिल 1971 में भी की गई थी, जब भारत और पाकिस्तान के बीच जंग हुई थी. इस दौरान ताजमहल को हमले से बचाने के लिए करीब 15 दिन के लिए ढक दिया गया था.
ताजमहल पर भी हमले का खतरा
1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध में ताजमहल को 15 दिन के लिए ढक कर रखा गया था, जिससे पाकिस्तान इस एतिहासिक इमारत को निशाना न बना सके. दरअसल, सफेद संगमरमर की यह इमारत मीलों ऊपर से भी नजर आती है. ऐसे में दुश्मन इस इमारत को काफी असानी से निशाना बना सकता था. 1971 में पूरे ताजमहल को एक हरे रंग के टीले में बदल दिया गया था. इस दौरान हरे रंग के एक विशाल जूट के कपड़े से ताजमहल को ढक दिया गया था. आसपास के क्षेत्र को कवर करने के लिए झाड़ियों और टहनियों की व्यवस्था की गई थी और पर्यटकों पर रोक लगा दी गई थी. ताजमहल इस हाल में करीब 15 दिन तक रहा था.
इस बार भी ताजमहल को किया जाएगा कवर
भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए ऑपरेशन सिंदूर में आतंकियों के 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया है. भारत की ओर से किए गए इस हमले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे 'एक्ट ऑफ वॉर' बताया है. अगर इस हमले के बाद पाकिस्तान जंग छेड़ता तो आम नागरिक मॉक ड्रिल में बताए गए तरीकों के जरिए अपना बवाच करेंगे. इसके अलावा बड़े प्रतिष्ठानों को भी मॉक ड्रिल में कवर किया जाएगा, जिससे ऐसी इमारतों को निशाना न बताया जा सके. जहां तक आगरा के ताजमहल का सवाल है तो फिलहाल इसके निर्देश राज्य सरकार की ओर से नहीं दिए गए हैं. बॉर्डर पर सिचुएशन और भी ज्यादा खराब होती है तो सरकार ताजमहल को दुश्मन से बचाने के लिए इसे फिर से कवर करने का आदेश दे सकती है.
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