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Chocolate History: कैसे हुआ था चॉकलेट का आविष्कार, जानें किस चीज में सबसे पहले हुआ इसका इस्तेमाल?

Chocolate History: आज की मीठी चॉकलेट के उलट चॉकलेट का शुरुआती रूप काफी अलग था. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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  • चॉकलेट का इतिहास 4000 साल पहले मेसोअमेरिका में शुरू हुआ।
  • प्राचीन सभ्यताएं कोको को कड़वे, मसालेदार पेय के रूप में पीती थीं।
  • एज्टेक कोको बीन्स का मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे।
  • यूरोप में चीनी मिलाकर चॉकलेट को लोकप्रिय बनाया गया।
  • ठोस चॉकलेट का आविष्कार 1828 में हुआ।

Chocolate History: आज चॉकलेट दुनिया की सबसे पसंदीदा मीठी चीजों में से एक है. इसे कैंडी और केक से लेकर आइसक्रीम और ड्रिंक तक हर चीज में मिलाया जाता है. लेकिन हजारों साल पहले चॉकलेट दिखने और स्वाद में उस मीठी-मिठाई से बिल्कुल अलग थी जिसका लोग आज आनंद लेते हैं. असल में चॉकलेट का सबसे शुरुआती रूप खाया नहीं जाता था. इसे मध्य अमेरिका की प्राचीन सभ्यताओं द्वारा एक कड़वे, मसालेदार पेय के रूप में पिया जाता था. 

चॉकलेट का इतिहास 

चॉकलेट की कहानी लगभग 4000 साल पहले प्राचीन मेसोअमेरिका में शुरू हुई थी. यह एक ऐसा क्षेत्र था जिसमें आज का मेक्सिको और मध्य अमेरिका के कुछ हिस्से शामिल थे. इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि कोको के पौधों को खोजने और इस्तेमाल करने वाले पहले लोग प्राचीन ओल्मेक सभ्यता के सदस्य थे.

चॉकलेट का सबसे पहला इस्तेमाल 

चॉकलेट के सबसे शुरुआती रूप आज की मिल्क चॉकलेट बार जैसे बिल्कुल नहीं थे. प्राचीन लोग कोको बीन्स को पीसकर पेस्ट बनाते थे और उसमें पानी, मिर्च और स्थानीय मसाले मिलाकर एक झागदार ड्रिंक तैयार करते थे. यह ड्रिंक कड़वी, मसालेदार और बिना चीनी की होती थी. इसमें आज की चॉकलेट से जुड़ी कोई चीनी या फिर क्रीमी बनावट बिल्कुल नहीं थी. बाद में माया सभ्यता और एज्टेक  सभ्यता जैसी सभ्यताओं ने चॉकलेट को पवित्र माना और इसे देवताओं का पेय कहा.

कोको बीन्स का इस्तेमाल पैसे के तौर पर 

एज्टेक साम्राज्य में कोको बीन्स  इतनी ज्यादा कीमती हो गई थी कि उनका इस्तेमाल मुद्रा के रूप में किया जाने लगा. लोग सामान, भोजन और सेवाओं को खरीदने के लिए कोको बीन्स का लेन-देन कर सकते थे. इतिहासकारों का कहना है कि इन बीन्स को लगभग पैसे जैसा ही माना जाता था क्योंकि वह काफी कीमती थी और उनका उत्पादन करना मुश्किल था.

चॉकलेट यूरोप कैसे पहुंची 

16वीं सदी तक अमेरिका के बाहर चॉकलेट के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते थे. स्पेनिश खोजकर्ता हर्नान कोर्टेस एज्टेक साम्राज्य में अपने अभियानों के दौरान कोको से परिचित होने के बाद उसे स्पेन वापस ले आए. शुरुआत में यूरोपियों को यह कड़वी ड्रिंक कभी अजीब लगी लेकिन जल्द ही उन्होंने इसका स्वाद बेहतर बनाने के लिए इसमें चीनी, वनीला और दालचीनी मिलाकर इसे बदलना शुरू कर दिया. 

वक्त के साथ चॉकलेट यूरोपीय राजघरानों और अमीर परिवारों के बीच काफी ज्यादा लोकप्रिय हो गई. क्योंकि कोको महंगा था और विदेशों से आयात किया जाता था इस वजह से चॉकलेट को शुरुआत में एक विलासिता का उत्पादन माना जाता था.

ठोस चॉकलेट के आविष्कार ने सब कुछ बदल दिया 

सदियों तक चॉकलेट का सेवन मुख्य रूप से एक ड्रिंक के रूप में ही होता रहा. सबसे बड़ी सफलता 1828 में मिली जब डच केमिस्ट कोएनराड वैन हाउटेन ने कोको प्रेस मशीन का आविष्कार किया. इस मशीन से कोको बीन्स से कोको बटर को अलग करना आसान हो गया. इससे मैन्युफैक्चरर ज्यादा चिकना कोको पाउडर बना पाए और आखिरकार ठोस खाने लायक चॉकलेट का उत्पादन कर पाए. इस आविष्कार ने चॉकलेट उत्पादन में क्रांति ला दी और आधुनिक चॉकलेट बार, कैंडी और डेजर्ट के लिए रास्ता खोल दिया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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