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Iran Conflict: जंग अमेरिका और इजरायल से, लेकिन खाड़ी देशों को क्यों तबाह कर रहा ईरान, जान लीजिए वजह

Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि जब ईरान की जंग अमेरिका और इजरायल से है तो‌‌ वह खाड़ी देशों को निशाना क्यों बना रहा है.

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  • ईरान खाड़ी देशों को अमेरिकी सैन्य सहयोगी मानता है।
  • यह क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देना चाहता है।
  • सैन्य ठिकाने, ऊर्जा संयंत्र ईरान के मुख्य निशाने पर।
  • संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार प्रभावित होंगे।

Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ अब ध्यान ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सीधे टकराव से हटकर दूसरी तरफ भी जा रहा है. कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों पर हमलों और धमकियों की खबरों ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है. जब ईरान की जंग अमेरिका और इजरायल से है तो बाकी खाड़ी देशों को वह क्यों निशाना बना रहा है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

क्या है ईरान की रणनीति? 

ईरान के कदमों के पीछे एक बड़ी रणनीतिक सोच है. तेहरान खाड़ी देशों को अलग-अलग नहीं देखता बल्कि उनमें से कई को अमेरिकी सैन्य ढांचे के अहम साझेदार और मेजबान मानता है. इन देशों पर दबाव बढ़ाकर ईरान का मकसद इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देना और साथ ही संघर्ष की राजनीतिक और आर्थिक कीमत बढ़ाना है. 

अमेरिकी सैन्य अड्डे 

खाड़ी देशों के क्षेत्रीय तनाव में फंसने की एक और बड़ी वजह उनकी जमीन पर मौजूद बड़े अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. कई खाड़ी देशों में अमेरिका के अहम एयरबेस, नौसैनिक ठिकाने और लॉजिस्टिक्स सेंटर हैं. ये मध्य पूर्व में अमेरिकी अभियानों में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. ईरान के नजरिए से यह ठिकाने अमेरिकी सैन्य ताकत का विस्तार हैं.

वाशिंगटन पर दबाव बनाने की रणनीति 

ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए अमेरिका पर राजनीतिक दबाव बनाने की भी कोशिश कर रहा है. इस रणनीति के पीछे का तर्क सीधा सा है. अगर खाड़ी देशों के सामने सुरक्षा का खतरा बढ़ता है तो वह अमेरिका से कूटनीतिक समाधान खोजने,‌सैन्य अभियान कम करने, या फिर संघर्ष विराम की कोशिशें का समर्थन करने के लिए कह सकते हैं. 

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संघर्ष का दायरा बढ़ाना 

ईरान की रणनीति के तहत अहम बुनियादी ढांचा जिसमें हवाई अड्डा, परिवहन केंद्र, ऊर्जा संयंत्र और दूसरी रणनीतिक संपत्तियों को बड़े टकराव का हिस्सा बनाना है. इसका मकसद लगातार चल रहे संघर्ष की आर्थिक और राजनीतिक कीमत बढ़ाना और साथ ही सामान्य क्षेत्रीय गतिविधियों में बाधा डालने की क्षमता का प्रदर्शन करना है.

इसी के साथ खाड़ी क्षेत्र ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बड़ी भूमिका निभाता है. दुनिया के तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस का एक बड़ा हिस्सा यहीं पैदा होता है. एनर्जी सुविधा, शिपिंग रूट या फिर एक्सपोर्ट टर्मिनल पर किसी भी खतरे का असर मिडल ईस्ट से कहीं आगे तक होता है. थोड़ी सी भी रुकावट से ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं,‌ मार्केट में उतार-चढ़ाव आ सकता है और ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर चिंता पैदा हो सकती है. 

होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक महत्व 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट में से एक है. यहां से ग्लोबल तेल एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. जब भी यहां या फिर इसके आसपास कोई भी तनाव बढ़ता है तो इंटरनेशनल मार्केट तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं. शिपिंग में रुकावट, जहाजों की सुरक्षा, या फिर आवाजाही पर रोक जैसी चिंता का असर दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई पर पड़ सकता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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