कैसे पता लगता है सर्दियों में गिरेगी मावठ या पड़ेगा जाड़ा? जानें साइंस
सर्दियों में भूमध्य सागर से आने वाला पश्चिमी विक्षोभ मावठ लाता है, जबकि हिमालय से आने वाली सीधी ठंडी हवाएं और साफ आसमान कड़ाके की शीतलहर पैदा करते हैं. इसी से सर्दियों में मौसम बदलता है.

सितंबर के आखिरी दिनों में देश से मानसून की वापसी के साथ ही हवा का रुख बदलने लगता है, जो ठंड के आगमन की साफ आहट देता है. इस बार प्रशांत महासागर में जारी अल-नीनो प्रभाव के कारण मौसम विभाग ने औसतन थोड़ा कम ठंडा सीजन रहने का अनुमान जताया है, फिर भी उत्तर और मध्य भारत में सर्दियों की आहट महसूस होने लगी है. अक्सर लोग सोचते हैं कि सर्दियों के दौरान कब मावठ यानी बेमौसम बारिश होगी और कब जमा देने वाली गलन पड़ेगी. इसका सटीक अनुमान वायुमंडल के दबाव, हवा की चाल और भूमध्य सागर से उठने वाली नमी के वैज्ञानिक अध्ययन से लगाया जाता है.
सर्दियों में बेमौसम बारिश के मुख्य कारण
सर्दियों के महीनों में भारत के मैदानी इलाकों में होने वाली बारिश का मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ होता है. यह एक विशेष मौसमी प्रणाली है, जो भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर के ऊपर कम वायुमंडलीय दबाव बनने से पैदा होती है. वहां से नमी से भरी हवाएं पश्चिम से पूर्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ती हैं और उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंचती हैं. यही सिस्टम मैदानी राज्यों में बेमौसम बारिश, मावठ और पर्वतीय इलाकों में भारी बर्फबारी के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होता है.
सर्दियों में कैसे मिलता है बारिश का संकेत?
मौसम में आने वाले बदलावों को पहले से भांपने के लिए वैज्ञानिक बादलों की मौजूदगी और हवा की दिशा पर बारीक नजर रखते हैं. अगर सर्दियों की रातों में अचानक घना कोहरा या बादल छाने लगें और हवा में नमी बढ़ जाए, तो रात का तापमान गिरने के बजाय थोड़ा ऊपर चढ़ जाता है. इसके अलावा, जब हवाएं उत्तर की जगह पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा से चलने लगती हैं, तो वे अपने साथ गर्माहट और नमी लाती हैं. यह चक्र मैदानी इलाकों में हल्की या मध्यम बारिश की संभावना को काफी बढ़ा देता है.
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कैसे पड़ती है कड़ाके की गलन?
इसके विपरीत, जब हिमालय के बर्फ से ढके पर्वतीय इलाकों से सीधी और तेज बर्फीली हवाएं मैदानी क्षेत्रों की ओर बहती हैं, तो अचानक भारी तापमान गिरावट आती है. इसके साथ ही, यदि सर्दियों की रात में आसमान पूरी तरह साफ और नीला रहता है, तो धरती दिनभर की पूरी गर्मी को बिना किसी बाधा के अंतरिक्ष में छोड़ देती है. इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में पार्थिव विकिरण कहा जाता है. रात में गर्मी खत्म होने से अलसुबह भीषण पाला, घना कोहरा और तीखी शीतलहर का सामना करना पड़ता है.

सर्दियों की बारिश के बाद क्यों बढ़ जाती है चुभने वाली ठंड
गर्मियों की मानसूनी बारिश के मुकाबले सर्दियों की बारिश का चक्र बिल्कुल अलग होता है. सामान्य दिनों में धूप से पानी भाप बनता है, लेकिन ठंड में पश्चिमी विक्षोभ सीधे नमी लेकर आता है. जब मैदानी इलाकों में मावठ गिरती है, तो हवा में मौजूद नमी का स्तर एकदम बढ़ जाता है और तापमान काफी नीचे लुढ़क जाता है. नमी और न्यूनतम तापमान के इस गठजोड़ से हवा में ठंडक घुल जाती है, जिससे बारिश के थमते ही धूप निकलने पर भी चुभने वाली गलन और कड़ाके का जाड़ा महसूस होने लगता है.
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