समुद्री तूफान में फंसे जहाज डूबते क्यों नहीं हैं? रोंगटे खड़े कर देगी कैप्टन की बचाने की तकनीक
समुद्री तूफान के दौरान गगनचुंबी लहरों के बीच हजारों टन वजनी जहाजों का सुरक्षित बचे रहना इंजीनियरिंग का चमत्कार है. कैप्टन जहाज को मौत के मुंह से निकालने में मदद करते हैं.

- बैलास्ट टैंक में पानी भरकर जहाज का गुरुत्वाकर्षण केंद्र नीचे किया जाता है.
- एंटी-रोलिंग स्टेबलाइजर्स मछली के पंखों जैसे काम कर जहाज को सीधा रखते हैं.
- सेल्फ-राइटिंग डिज़ाइन वाले जहाजों का निचला हिस्सा भारी होकर खुद सीधा होता है.
- वॉटरटाइट कंपार्टमेंट्स के कारण एक हिस्से में पानी भरने पर जहाज डूबता नहीं.
जब समंदर अपनी उग्रता पर होता है और 40 फीट ऊंची लहरें लोहे के विशालकाय जहाजों को खिलौने की तरह उछालती हैं, तब केवल साहस नहीं बल्कि विज्ञान काम आता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि इतने भारी जहाज तूफान में डूब क्यों नहीं जाते? दरअसल, जहाज के डिजाइन के पीछे छिपा भौतिकी का नियम और कैप्टन की सूझबूझ इसे डूबने से बचाती है. आइए जानते हैं उस तकनीक के बारे में जो समंदर के सबसे खौफनाक तूफानों में भी जहाजों को सीधा खड़ा रखती है.
जहाज का अदृश्य सुरक्षा चक्र
जहाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह है जो हमें पानी के ऊपर दिखाई नहीं देता है. जहाज के सबसे निचले हिस्से में विशाल खाली टैंक बने होते हैं, जिन्हें 'बैलास्ट टैंक' कहा जाता है. तकनीक के लिहाज से यह जहाज का सबसे बड़ा 'सीक्रेट' है. जब समुद्र शांत होता है, तो इन टैंकों में कम पानी होता है, लेकिन जैसे ही तूफान की आहट मिलती है, इनमें भारी मात्रा में समुद्र का पानी भर दिया जाता है. विज्ञान के नजरिए से देखें तो इससे जहाज का गुरुत्वाकर्षण केंद्र काफी नीचे चला जाता है. एक भारी आधार होने के कारण जहाज पानी में मजबूती से जकड़ा रहता है और बड़ी लहरों के थपेड़े खाने के बाद भी लट्टू की तरह वापस अपनी जगह पर सीधा हो जाता है.
मछली के पंखों जैसी ताकत
आज के दौर के आधुनिक जहाजों में 'एंटी-रोलिंग स्टेबलाइजर्स' लगे होते हैं, जो मछली के पंखों की तरह काम करते हैं. ये 'फिन्स' जहाज के दोनों तरफ पानी के नीचे निकले होते हैं और एक शक्तिशाली कंप्यूटर सिस्टम से जुड़े होते हैं. जब कोई विशाल लहर जहाज को एक तरफ झुकाने की कोशिश करती है, तो ये स्टेबलाइजर्स तुरंत हरकत में आते हैं और कंप्यूटर की मदद से उल्टी दिशा में मुड़ जाते हैं. इससे पानी का दबाव जहाज को वापस सीधी स्थिति में धकेल देता है. यह प्रक्रिया इतनी सटीक होती है कि जहाज के अंदर बैठे यात्रियों को लहरों के बड़े झटकों का अहसास तक नहीं होता है.
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लहरों को मात देता 'सेल्फ-राइटिंग' डिजाइन
इंजीनियरिंग की दुनिया में 'सेल्फ-राइटिंग' एक ऐसी तकनीक है जो रोंगटे खड़े कर सकती है. कई लाइफबोट्स और आधुनिक मालवाहक जहाजों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि अगर वे लहरों के दबाव में आकर पूरी तरह उल्टे भी हो जाएं, तो भी वे खुद-ब-खुद सीधे हो जाएंगे. इसका राज इनके वजन के वितरण में छिपा होता है. जहाज का ऊपरी हिस्सा हल्का रखा जाता है और निचला हिस्सा अत्यधिक भारी. गुरुत्वाकर्षण के नियम के कारण भारी हिस्सा हमेशा पानी के नीचे रहने की कोशिश करता है, जिससे जहाज पलटने के कुछ ही सेकंड के भीतर फिर से सीधा खड़ा हो जाता है.
टाइटैनिक के बाद का क्या है सबक?
टाइटैनिक हादसे के बाद समुद्री सुरक्षा के नियमों में क्रांतिकारी बदलाव आया, जिसमें 'वॉटरटाइट कंपार्टमेंट्स' की तकनीक सबसे प्रमुख है. जहाज के अंदरूनी ढांचे को कई अलग-अलग कमरों या 'सेक्शन' में बांट दिया जाता है. ये सभी सेक्शन पूरी तरह एयरटाइट और सील बंद होते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि तूफान के दौरान जहाज के किसी एक हिस्से में छेद हो जाए और पानी भर जाए, तो भी वह पानी केवल उसी सेक्शन तक सीमित रहता है. बाकी के सेक्शन सूखे और हवा से भरे होने के कारण जहाज को पर्याप्त उछाल (Buoyancy) देते रहते हैं, जिससे जहाज पूरी तरह डूबने के बजाय तैरता रहता है.
तूफान में कैप्टन की सूझबूझ और दिशा का खेल
तकनीक के साथ-साथ जहाज के कैप्टन का अनुभव और रणनीति सबसे निर्णायक होती है. जब जहाज तूफान में फंसता है, तो कैप्टन कभी भी जहाज को लहरों के समानांतर नहीं रखता है. ऐसा करने पर जहाज के पलटने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. कैप्टन हमेशा कोशिश करता है कि जहाज का अगला सिरा लहरों को चीरते हुए आगे बढ़े. लहरों के साथ 'बैटल' करने की इस तकनीक में इंजन की शक्ति का सही इस्तेमाल और राडार की मदद से लहरों की ऊंचाई को भांपना शामिल होता है. कैप्टन और क्रू लगातार मौसम की रिपोर्ट और कंप्यूटर मॉनिटरिंग के जरिए यह तय करते हैं कि किस वक्त स्टेबलाइजर्स का उपयोग करना है और किस वक्त बैलास्ट टैंक का संतुलन बदलना है.
इंजीनियरिंग और विज्ञान का अद्भुत मेल
एक जहाज का पानी में तैरते रहना केवल लोहे का कमाल नहीं है, बल्कि यह भौतिकी के बॉयेंसी (Buoyancy) और स्टेबिलिटी के नियमों का सटीक मेल है. हजारों टन वजन होने के बावजूद जहाज का घनत्व और उसके द्वारा विस्थापित किए गए पानी का वजन उसे ऊपर की ओर धकेलता रहता है. समुद्री इंजीनियर जहाज को तैयार करते समय यह सुनिश्चित करते हैं कि उसका संतुलन किसी भी स्थिति में न बिगड़े. यही वजह है कि आज के आधुनिक जहाज 40-50 फीट ऊंची लहरों के बीच भी अपनी मंजिल तक सुरक्षित पहुंचने में कामयाब होते हैं.
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