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पत्थरबाजी करके ताजमहल को पहुंचाया नुकसान तो कितना लगेगा जुर्माना, कितनी मिलेगी सजा?

Punishment For Causing Damage To Taj Mahal: ताजमहल को नुकसान पहुंचाना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि इतिहास से खिलवाड़ है. ऐसा करने वालों को भारी सजा भुगतनी पड़ सकती है.

कहते हैं, ताजमहल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक एहसास है, मोहब्बत का वो प्रतीक जो सदियों से हिंदुस्तान की पहचान बना हुआ है. लेकिन जरा सोचिए, अगर कोई इस ऐतिहासिक धरोहर पर पत्थर फेंक दे या उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो? क्या उसे सिर्फ जुर्माना देकर छोड़ा जा सकता है या फिर जेल की हवा खानी पड़ती है? ये सवाल सिर्फ कानून से जुड़ा नहीं, बल्कि उस विरासत से जुड़ा है, जिसे शाहजहां ने अमर प्रेम की निशानी बनाकर छोड़ा था.

ताजमहल पर हमला, कानून क्या कहता है?

भारत में ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारतों को प्राचीन स्मारक और पुरातात्त्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत कड़े संरक्षण प्रावधान मिले हैं. कोई भी व्यक्ति अगर ऐसी संरचना को नुकसान पहुंचाता है, तो यह सिर्फ शरारत नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध माना जाता है. कानून के तहत, ताजमहल पर किसी भी तरह की तोड़फोड़, पेंटिंग, या पत्थर फेंकना संरक्षित स्मारक को नुकसान पहुंचाना अपराध की श्रेणी में आता है.

कितनी सजा और कितना जुर्माना लग सकता है?

अगर कोई व्यक्ति ताजमहल या किसी अन्य संरक्षित स्मारक को नुकसान पहुंचाता है, तो अधिनियम की धारा 30 के अनुसार उस पर दो साल तक की जेल, या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती हैं. यह तय करना अदालत का काम होता है कि नुकसान कितना बड़ा था और उसके इरादे क्या थे. अगर तोड़फोड़ जानबूझकर की गई है, तो सजा और भी कड़ी हो सकती है.

ASI की सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ताजमहल की सुरक्षा और रखरखाव के लिए सख्त नियम लागू करता है. परिसर में हथियार, तेज चीजें या कोई भी वस्तु जो संरचना को नुकसान पहुंचा सकती है, ले जाना मना है. अगर किसी की गलती से भी कोई हिस्सा टूटता या खुरचता है, तो ASI तत्काल कार्रवाई करती है. सुरक्षा एजेंसियां CCTV और ड्रोन से लगातार निगरानी रखती हैं ताकि किसी भी असामाजिक गतिविधि को रोका जा सके.

ऐसे मामलों में क्या हुआ पहले?

कुछ साल पहले एक पर्यटक ने ताजमहल की रेलिंग पर नाम उकेरने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसके खिलाफ FIR दर्ज हुई और उसे जुर्माना भरना पड़ा था. इसी तरह पत्थरबाजी या दीवार को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाता है. कई मामलों में अदालत ने सख्त चेतावनी देकर सजा सुनाई है ताकि भविष्य में कोई भी स्मारक के साथ छेड़छाड़ न करे.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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