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देश के पीएम और राष्ट्रपति को कितनी छुट्टियां मिलती हैं? जानें क्या हैं इसके नियम

देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री कितना जिम्मेदारी वाला पद है. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि पीएम और राष्ट्रपति को कितनी छुट्टियां मिलती हैं और इसके नियम क्या हैं? चलिए आपको बताते हैं... 

अगर आप नौकरीपेशा व्यक्ति है तो सप्ताह में एक या दो बार मिलने वाली छुट्टी से तो रूबरू होंगे ही. एक नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए ये छुट्टियां इम्यूनिटी बूस्टर का काम करती हैं और किसी कारण से साप्ताहिक छुट्टी रद्द हो जाए तो काटो तो खून नहीं वाली सिचुएशन होती है. लेकिन कहते हैं कि पद के साथ जब जिम्मेदारियां बढ़ती है तो छुट्टी होकर भी छुट्टी जैसी नहीं लगती है. अब आप जरा सोचकर देखिए कि देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री कितना जिम्मेदारी वाला पद है. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि पीएम और राष्ट्रपति को कितनी छुट्टियां मिलती हैं और इसके नियम क्या हैं? चलिए आपको बताते हैं... 

राष्ट्रपति को कितनी मिलती है छुट्टियां

राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है. यह पद बहुत ही जिम्मेदारियों भरा होता है कि क्योंकि राष्ट्रपति के पद पर बैठा व्यक्ति देश का मुखिया होता है. ऐसे में राष्ट्रपति को मोटा वेतन, आवास से लेकर कई अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं. देश के राष्ट्रपति को 5 लाख रुपये महीना वेतन, आवास, गाड़ी, सुरक्षा लेकर कई तमाम सुरक्षाएं प्रदान की जाती हैं. अगर छुट्टियों की बात करें तो राष्ट्रपति के लिए सुकून के पल बिताने के लिए हैदराबाद में राष्ट्रपति निलायम और शिमला में रिट्रीट बिल्डिंग भी है. साल में कम से कम एक बार राष्ट्रपति इन जगहों पर जरूर जाते हैं और जब वह प्रवास पर इन जगहों पर होते हैं तो उनके कार्यालय को भी यहां शिफ्ट कर दिया जाता है. इस तरह देखें तो राष्ट्रपति का पद इतना अहम होता है कि वह हमेशा ऑन ड्यूटी ही रहते हैं. 

प्रधानमंत्री को कितनी मिलती हैं छुट्टियां

भारत का प्रधानमंत्री सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला पद होता है. देश को लेकर किसी भी फैसले में प्रधानमंत्री की अनुमति जरूरी होती है. बात अगर प्रधानमंत्री की छुट्टियों की करें तो आपने कई बार सुना होगा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने एक भी छुट्टी नहीं ली है. इसको लेकर एक आरटीआई भी डाली गई थी, जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जवाब दिया गया था. इसमें कहा गया था कि देश के प्रधानमंत्री के लिए छुट्टियों का कोई प्रावधान नहीं है. प्रधानमंत्री हमेशा ऑन ड्यूटी रहते हैं. वह अपने कार्यालय में हों या न हों या फिर देश के बाहर ही क्यों न हों, प्रधानमंत्री हमेशा ड्यूटी पर रहते हैं और देश के लिए काम करते रहते हैं. 

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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