Cow Dung Export: दुनिया के कितने देशों को गोबर बेचता है भारत, जानें हर महीने कितनी होती है कमाई?
Cow Dung Export: भारत में बड़ी मात्रा में गाय पाली जाती हैं और गाय का गोबर विदेशों में उपले, फर्टिलाइजर के रूप में बहुतायत में निर्यात किया जाता है. चलिए जानें कि इससे भारत को कितनी कमाई होती है.

Cow Dung Export: भारत में गाय के गोबर का इस्तेमाल ईंधन के रूप में, खाद बनाने में और पूजा-पाठ में किया जाता है. हमारे देश में गाय को पूजनीय मानते हैं और गाय का दूध, घी, गोबर, गोमूत्र सब पवित्र माना जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि भारत दुनिया में गाय के गोबर और उससे बने उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है. हमारे देश से दुनिया को करीब 50-60 देशों में नियमित तौर पर गोबर, उपले और जैविक खाद भेजी जा रही है, जिससे हर साल भारत को भारी-भरकम मात्रा में विदेशी मुद्रा मिलती है.
किन देशों तक है भारतीया गोबर की डिमांड?
भारत के गोबर के खरीदारों की लिस्ट काफी लंबी और दिलचस्प है. दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से लेकर मालदीव, सिंगापुर, वियतनाम और कंबोडिया इसके सबसे बड़े खरीदार हैं. इसके साथ ही सऊदी अरब, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में भी भारतीय देसी गाय के गोबर की भारी डिमांड है. इन देशों के करीब 300 से ज्यादा बड़े वैश्विक खरीदार भारत के ग्रामीण इलाकों से सीधे जुड़े हुए हैं और हर महीने भारी मात्रा में गोबर के बने उत्पादों का ऑर्डर देते हैं.
विदेशों में गोबर की क्या जरूरत?
सवाल यह उठता है कि आखिर विदेशों को भारतीय गोबर की जरूरत क्यों पड़ती है? इसका सबसे बड़ा कारण है ऑर्गेनिक फार्मिंग. अमेरिका और यूरोप के देशों में केमिकल के बिना केंचुआ खाद और इको-फ्रेंडली उर्वरक बनाने के लिए इसे मंगाया जाता है. वहीं कुवैत और सऊदी अरब जैसे रेगिस्तानी इलाकों में खजूर की फसल की पैदावार के लिए, उनका आकार बढ़ाने के लिए भारतीय देसी गाय के गोबर के पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में पारंपरिक रीति रिवाजों और दाह-संस्कार के लिए भी भारत से उपले मंगाए जाते हैं.
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गोबर बेचकर कितना कमाता है भारत?
गोबर के इस वैश्विक कारोबार से होने वाली कमाई का आंकड़ा चौंकाने वाला है. भारत हर साल विदेशों को गोबर और खाद बेचकर करीब 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करता है. भारतीय बाजारों में जो कच्चा गोबर 30-50 रुपये प्रति किलो के भाव बिकता है, वही विदेशों में सही तरीके से प्रोसेस पैक और कस्टमाइज होने के बाज 5 से 10 गुना ज्यादा दाम से बिकता है. इस बिजनेस से जुड़कर छोटे स्तर के ग्रामीण कारोबारी भी हर महीने आराम से 50 हजार से 1 लाख रुपये कमा रहे हैं.
केवल खाद नहीं अन्य आकर्षण उत्पादों की भी है डिमांड
विदेशी बाजारों में गोबर सिर्फ खाद या उपलों के रूप में ही नहीं बिकता है, बल्कि इसकी री-ब्रांडिंग करके कई तरह के आकर्षक उत्पाद बनाए जाते हैं. भारत में त्योहारों के सीजन में गोबर से बने ईको फ्रेंडली दीये, पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियां, गमले और प्राकृतिक खुशबू वाली धूपबत्तियों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है. प्लास्टिक और हानिकारक चीजों के विकल्प के तौर पर विदेशी लोग इन जैविक उत्पादों को हाथों-हाथ खरीदते हैं.
























