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Iran Nuclear Weapon: ईरान के पास अगर आ जाए परमाणु बम तो कितना बदल जाएगा मिडिल ईस्ट, क्या ग्लोबल ऑर्डर में भी आएगा चेंज?

Iran Nuclear Weapon: ईरान के पास परमाणु बम आने से मिडिल ईस्ट और दुनिया का पावर बैलेंस हमेशा के लिए बदल जाएगा. इससे सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों में परमाणु हथियार बनाने की होड़ शुरू हो जाएगी.

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  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम विश्वभर में गंभीर चिंता का विषय बना.
  • इससे मध्य पूर्व का रणनीतिक संतुलन, शक्ति समीकरण बदल जाएंगे.
  • परमाणु होड़ बढ़ेगी, इजरायल पर संकट, तेल आपूर्ति खतरे में.

Iran Nuclear Weapon: मिडिल ईस्ट में बरसों से चल रही शह और मात की लड़ाई अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है. ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है. ईरान लगातार यह दावा करता है कि उसकी न्यूक्लियर रिसर्च केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है, लेकिन हकीकत की परतें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो चुका है कि अगर ईरान वाकई परमाणु बम बना लेता है, तो वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा किस तरह बदल जाएगा.

कितनी बदल जाएगी पश्चिमी एशिया की पूरी तस्वीर?

ईरान के पास परमाणु हथियार आने से इस पूरे इलाके का रणनीतिक संतुलन हमेशा के लिए बदल जाएगा. अब तक पारंपरिक हथियारों और प्रॉक्सी वॉर के सहारे अपनी धक जमाने वाला ईरान परमाणु ताकत से लैस होते ही बेहद आक्रामक हो जाएगा. वह हमास और हिजबुल्लाह जैसे अपने सहयोगी संगठनों का इस्तेमाल पहले से कहीं ज्यादा खुलकर और बिना किसी डर के कर पाएगा. परमाणु सुरक्षा कवच मिलने के बाद ईरान को रोकने की पश्चिमी देशों की क्षमता भी बेहद सीमित हो जाएगी. इससे पूरे क्षेत्र में एक ऐसी नई व्यवस्था बनेगी जहां पुराना पावर बैलेंस पूरी तरह टूट जाएगा.

क्या छिड़ जाएगी मिडिल ईस्ट में एटमी होड़?

एक बार ईरान ने परमाणु बम हासिल कर लिया तो मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की एक नई रेस शुरू हो जाएगी जिसे न्यूक्लियर डोमिनो इफेक्ट कहा जाता है. अपनी सुरक्षा को खतरे में देखकर सऊदी अरब और तुर्की जैसे बड़े सुन्नी बहुल देश भी चुप नहीं बैठेंगे. वे भी अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से कदम आगे बढ़ाएंगे. इस तरह सदियों पुराना शिया-सुन्नी तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाएगा और पूरा का पूरा खाड़ी क्षेत्र एक बारूद के ढेर में तब्दील हो जाएगा.

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इजरायल के सामने खड़ा होगा अस्तित्व का संकट

परमाणु बम से लैस ईरान को इजरायल अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा और सीधा खतरा मानेगा. इन दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच का तनाव चरम पर पहुंच जाएगा और सीधे युद्ध की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी. हालांकि, परमाणु ताकत होने के कारण अमेरिका और इजरायल के लिए ईरान पर सीधा सैन्य हमला करना उतना आसान नहीं रहेगा, जैसा कि उत्तर कोरिया के मामले में देखा जाता है. इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भाषा में दहशत का संतुलन या बैलेंस ऑफ टेरर कहा जाता है, जहां दोनों पक्ष डर के मारे सीधे टकराव से बचते हैं.

खतरे में आ जाएगी दुनिया की तेल सप्लाई

ईरान के परमाणु संपन्न होने का सबसे बड़ा झटका वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को लगेगा. ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट यानी होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधा दबाव बनाने या उसे पूरी तरह नियंत्रित करने की स्थिति में आ जाएगा. फारस की खाड़ी में जरा सा भी तनाव बढ़ते ही ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आएगा. इस ऊर्जा संकट का खामियाजा सिर्फ मिडिल ईस्ट को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के देशों और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को भुगतना पड़ेगा.

बदल जाएंगे दुनिया के बड़े राजनीतिक समीकरण

ग्लोबल ऑर्डर की बात करें तो ईरान का परमाणु बम पूरी दुनिया को नए गुटों में बांट देगा. कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से घिरे ईरान को रूस और चीन से और ज्यादा मजबूत रणनीतिक और आर्थिक समर्थन मिलने लगेगा. दुनिया एक बार फिर अमेरिका बनाम रूस-चीन जैसे पुराने शीत युद्ध के दौर वाले ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ जाएगी. इससे अमेरिका का वैश्विक दबदबा कम होगा और बहुध्रुवीय व्यवस्था में चीन और रूस की कूटनीतिक चालें अमेरिकी नीतियों पर भारी पड़ने लगेंगी.

नए रणनीतिक गठबंधनों को मिलेगी मजबूती

ईरान के बढ़ते परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को देखते हुए खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई की सुरक्षा को पहले ही बड़ा खतरा पैदा हो चुका है. इसी खतरे के कारण हाल के सालों में इजरायल और अरब देशों के बीच अब्राहम एकॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक रणनीतिक समझौते हुए हैं. अगर ईरान बम बना लेता है, तो यह कूटनीतिक और सैन्य गठजोड़ और ज्यादा मजबूत हो जाएगा. अपनी पुरानी दुश्मनी भुलाकर कई अरब देश ईरान को घेरने के लिए इजरायल के पाले में खड़े नजर आएंगे.

वैश्विक परमाणु संधियों पर उठेंगे बड़े सवाल

ईरान के परमाणु संपन्न बनने से वैश्विक स्तर पर हथियारों की होड़ रोकने वाली नीतियों को भारी नुकसान पहुंचेगा. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था यानी आईएईए की भूमिका और उसकी पहुंच पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अगर ईरान परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी से बाहर निकलने का फैसला करता है, तो दुनिया भर में परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयासों को करारा झटका लगेगा. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संधियों की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी और कोई भी देश इन नियमों को मानने के लिए बाध्य महसूस नहीं करेगा.

यूरेनियम संवर्धन और हथियार ग्रेड की सच्चाई

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास इस समय 60% तक संवर्धित यूरेनियम का एक बहुत बड़ा भंडार मौजूद है. तकनीकी रूप से देखा जाए तो 60% से लेकर हथियार बनाने लायक 90% तक के स्तर पर पहुंचने के लिए ईरान को बहुत ही कम और छोटे कदम उठाने की जरूरत है. भले ही ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने शांतिपूर्ण इरादों की कसम खाता रहे, लेकिन हकीकत यही है कि वह परमाणु बम बनाने की तकनीकी क्षमता से महज कुछ ही दिन की दूरी पर खड़ा है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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