नीट पेपर लीक पर बवाल से प्रधान के इस्तीफे तक... किस तरह से CJP के एक ऐलान से बदल गया पूरा गेम
Dharmendra Pradhan Resign: जंतर मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शन के बीच PM नरेंद्र मोदी ने छात्रों और युवाओं के नाम एक वीडियो संदेश जारी किया. जिसमें उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही.

Dharmendra Pradhan Resign: नीट यूजी परीक्षा 2026 पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार (25 जुलाई, 2026) को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रधान के इस्तीफे पर खुशी तो जाहिर की है, लेकिन यह भी कहा है कि जब तक सरकार हमारी बाकी शर्तों को नहीं मानती है, तब तक हम प्रदर्शन स्थल से नहीं हटेंगे.
मई 2026 में शुरू हुआ यह विवाद आज देश का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है, जिसका विरोध न सिर्फ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत सभी विपक्षी पार्टियों संसद से लेकर सड़क तक केंद्र सरकार को घेर रही है. ऐसे में इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि पिछले एक महीने में ऐसा क्या हुआ, जिसके नतीजतन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने वाले एक नए ड्राफ्ट बिल को भी मंजूरी दे दी, जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट और आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.
कैसे शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम?
दरअसल, यह पूरा विवाद 3 मई, 2026 को देशभर में NTA की तरफ से आयोजित की गई NEET UG परीक्षा से शुरू हुआ, जिसमें करीब 24 लाख छात्र शामिल हुए थे. परीक्षा के करीब एक हफ्ते में पेपर लीक की चर्चा शुरू हो गई, जिसके बाद 12 मई को NTA ने नीट की परीक्षा ही रद्द कर दी और मामले में सीबीआई ने अपनी जांच शुरू कर दी.
इसके बाद 15 मई को खुद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात को स्वीकार किया कि नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ है. फिर सरकार ने एक महीने बाद 21 जून को फिर से नीट परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की. इस घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की एक टिप्पणी काफी ज्यादा वायरल हो गई, जिसमें उन्होंने कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया था. सोशल मीडिया पर कहा जा रहा था कि सीजेआई ने देश के युवाओं को कॉकरोच कहा है, इस पर अभिजीत दिपके नाम के एक शख्स ने व्यंग्यात्मक रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम से एक पेज बनाया. सीजेआई की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए देश भर के लोगों ने बड़ी संख्या में सीजेपी को इंस्टाग्राम पर फॉलो करने लगे और यह नीट परीक्षा पेपर लीक, सीजेआई की टिप्पणी से लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का एक व्यापक मंच बन गया.
जून महीने में युवाओं और प्रभावित छात्रों का आंदोलन और तेज गया. इस बीच ऑनलाइन बनी पार्टी ने 6 जून पर पहली बार दिल्ली में एक बड़े वास्तविक प्रदर्शन का आयोजन किया. इसमें भारी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए, सरकार का विरोध किया और अपनी तीन मांगों को सरकार के सामने रखा. धीरे-धीरे 20 जून आते तक इस विरोध प्रदर्शन ने व्यापक रूप ले लिया और सीजेपी के प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन धरना देते हुए दिल्ली के जंतर मंतर पर ही जम गए. सीजेपी के प्रदर्शन में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल हो गए और उन्होंने 26 दिनों तक आमरण अनशन किया.
संसद चलो मार्च के बाद से तनावपूर्ण हो गए हालात
जंतर मंतर पर जब कई हफ्तों तक धरना प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तब सीजेपी ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन 20 जुलाई को संसद चलो मार्च निकालने का फैसला किया. मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी युवा संसद की तरफ बढ़े. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जब स्थिति तनावपूर्ण हो गई, तब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया और आंसू गैस के गोले दागे. जिसमें प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ कई पुलिसवाले भी गंभीर रूप से घायल हुए.
इस घटना के बाद विपक्षी पार्टियां भी सड़क पर उतर आईं और यहां तक कि पीएम आवास के बाहर धरना देने लगे. हालांकि, सरकार बार-बार यह कहती रही कि वह संसद में पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए तैयार है. बावजूद विपक्ष लगातार संसद में विरोध करते रहे, जिसकी वजह से संसद कई दिनों तक ठीक से नहीं चल पाई.
प्रदर्शन के बीच पीएम मोदी ने जारी किया वीडियो संदेश
इस पूरी घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 23 जुलाई की रात एक वीडियो मैसेज जारी किया, जिसमें उन्होंने नीट पेपर लीक और युवाओं को लेकर अहम बातें कहीं. साथ ही पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी भरोसा दिलाया. दूसरी तरफ सरकार ने प्रदर्शन कर रही सीजेपी के प्रतिनिधियों से मिलकर बातचीत की और उनकी तीन में से दो शर्तों पर अपनी सहमति जता दी. हालांकि, सीजेपी लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा था. इसके बाद अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.






















