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Mughal Architecture: बगैर सीमेंट आजतक कैसे खड़ी हैं मुगलों की इमारतें? क्या आज इस तकनीक से बनाए जा सकते हैं घर

Mughal Architecture: मुगलों द्वारा बनाई गई इमारतें आज तक खड़ी हैं. आइए जानते हैं कि क्या उस तकनीक का इस्तेमाल करके आज भी घर बनाए जा सकते हैं.

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  • मुगल इमारतें सीमेंट बिना चूने के गारे से निर्मित।
  • चूने का गारा प्राकृतिक मिश्रण से समय संग और मजबूत।
  • जूट रेशे, विशेष नींव ने निर्माण की मजबूती बढ़ाई।
  • आज धीमी, महंगी, कारीगरों की कमी से अनुपयोगी।

Mughal Architecture: ताजमहल और लाल किला जैसे शानदार स्मारक आधुनिक सीमेंट के आविष्कार से काफी पहले ही बना दिए गए थे और इसके बावजूद भी सदियों से खड़े हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि बगैर सीमेंट के आज तक मुगलों की बनाई ये इमारतें कैसे खड़ी हैं और क्या आज इस तकनीक से घर बनाए जा सकते हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

मुगलकालीन इमारतों की मजबूती के पीछे का सच 

मुगल काल के दौरान बिल्डरों ने आधुनिक सीमेंट के बजाय चूने के गारे पर भरोसा किया था. इस मिश्रण में मुख्य रूप से चूना और रेत शामिल थी लेकिन इसकी असली ताकत प्राकृतिक सामग्रियों के सावधानी से तैयार किए गए मिश्रण से आई थी. गुड़, उड़द दाल, बेलगिरी का पानी, दही, गोंद और बताशे जैसी सामग्री को चूने में मिलाकर एक गाढ़ा और चिपकने वाला पेस्ट बनाया गया जो पत्थरों को मजबूती से एक साथ बांध देता था.

सीमेंट के उलट चूना मोर्टार धीरे-धीरे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अब्जॉर्ब करता है और धीरे-धीरे वापस कैल्शियम कार्बोनेट में बदल देता है. इससे यह समय के साथ और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है. 

संरचनाएं बनीं और ज्यादा टिकाऊ 

बिल्डरों ने मोर्टार में जूट या फिर भांग के रेशे भी मिलाए. इन प्राकृतिक रेशों ने रिइंफॉर्समेंट के रूप में काम किया. साथ ही दरारें कम कीं और दीवारों और प्लास्टर की ताकत में भी सुधार किया. यह तकनीक आधुनिक कंक्रीट में इस्तेमाल किए जाने वाले स्टील रिइंफोर्समेंट के समान उद्देश्य को पूरा करती है. इससे संरचना को सदियों तक मौसम का सामना करने में मदद मिलती है. 

इसी के साथ नींव भी एडवांस्ड इंजीनियरिंग को दर्शाती है. जैसे ताजमहल की नींव में आबनूस की लकड़ी के साथ खास लकड़ी की कुछ संरचनाएं शामिल हैं. यमुना नदी से नमी के लगातार संपर्क ने लकड़ी को सड़ने से रोका और समय के साथ इसे और भी मजबूत बना दिया. 

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क्या इस तरीके का इस्तेमाल आज घर बनाने के लिए किया जा सकता है? 

इस निर्माण विधि से आज भी घर बनाए जा सकते हैं. चूने पर आधारित निर्माण पर्यावरण के अनुकूल है और शानदार प्राकृतिक इंसुलेशन देता है, जिससे घर गर्मियों के दौरान ठंडा और सर्दियों में गर्म रहता है. क्योंकि चूने की दीवारें सांस ले सकती हैं इस वजह से वे पारंपरिक सीमेंट की दीवारों की तुलना में घर के अंदर की नमी को और ज्यादा प्रभावित ढंग से कंट्रोल करने में मदद करती हैं.

दूसरा बड़ा फायदा इसका लंबे समय तक चलना है. कई आधुनिक सीमेंट इमारत कई दशकों तक चलने के लिए डिजाइन की गई हैं, पारंपरिक चूने के गारे से भरी संरचनाओं ने उचित रखरखाव के साथ सदियों तक जीवित रहने की क्षमता दिखाई है.

यह तरीका आज आम क्यों नहीं? 

इसके इतने ज्यादा फायदे के बावजूद भी बड़े पैमाने पर आधुनिक परियोजना के लिए पारंपरिक चूने के निर्माण का इस्तेमाल शायद ही कभी किया जाता है.  सबसे बड़ी चुनौती वक्त है. सीमेंट कुछ ही घंटों के अंदर सख्त हो जाता है और चूने के मोर्टार को पूरी तरह से ठीक होने और अपनी पूरी ताकत को हासिल करने में महीनों लग जाते हैं.

एक और मुश्किल कुशल कारीगरों की कमी है. इसी के साथ उच्च गुणवत्ता वाला चूना, खास लकड़ी, प्राकृतिक बाइंडर और हाथ से तैयार किए गए तरीके अक्सर इस प्रकार के निर्माण को काफी महंगा बना देती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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