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डॉलर के आगे कितनी है चीन के युआन की वैल्यू, भारत के रुपये से ज्यादा या कम?

डॉलर के सामने जहां युआन और रुपया दोनों कमजोर दिखते हैं, वहीं सीधी तुलना में चीन का युआन भारतीय रुपये से ज्यादा मजबूत है. विदेशी मुद्रा बाजार की यह हकीकत देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है.

दुनिया में जब भी पैसों की बात होती है, तो सबसे पहले डॉलर का नाम सामने आता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चीन का युआन और भारत का रुपया डॉलर के सामने कहां खड़े हैं? क्या युआन की ताकत रुपये से ज्यादा है या कम? और अगर सीधे तुलना की जाए, तो किस मुद्रा की असली वैल्यू ज्यादा निकलती है? यही सवाल आज आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक के मन में है. आइए आसान भाषा में समझते हैं.

डॉलर के मुकाबले चीन के युआन की वैल्यू कितनी है?

आज की विदेशी मुद्रा दरों के अनुसार 1 अमेरिकी डॉलर के बदले करीब 6.9 से 7 चीनी युआन मिलते हैं. इसका मतलब साफ है कि डॉलर की कीमत युआन से काफी ज्यादा है. डॉलर दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली मुद्रा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग और ताकत दोनों ज्यादा रहती हैं. चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद युआन अभी डॉलर जितना ताकतवर नहीं माना जाता है.

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति

अगर डॉलर की तुलना भारतीय रुपये से करें, तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है. आज 1 अमेरिकी डॉलर के बदले लगभग 88 से 90 भारतीय रुपये मिलते हैं. यानी डॉलर के सामने रुपया काफी कमजोर दिखाई देता है. भारत आयात के लिए बड़े पैमाने पर डॉलर पर निर्भर रहता है, खासकर कच्चा तेल और तकनीकी सामान खरीदने में, जिससे रुपये पर दबाव बना रहता है.

चीन का युआन बनाम भारत का रुपया कौन आगे?

अब सबसे अहम सवाल कि युआन की वैल्यू रुपये से ज्यादा है या कम? सीधे शब्दों में जवाब है कि युआन की वैल्यू भारतीय रुपये से ज्यादा है. आज के हिसाब से 1 चीनी युआन लगभग 12 से 13 भारतीय रुपये के बराबर होता है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी के पास 1 युआन है, तो उसकी कीमत 1 रुपये से कई गुना ज्यादा है. इस आधार पर देखा जाए तो चीन की मुद्रा भारत की मुद्रा से मजबूत स्थिति में है.

ऐसा क्यों है कि युआन रुपये से मजबूत है?

इसके पीछे कई वजहें हैं. चीन दुनिया का बड़ा निर्यातक देश है. वह अपने सामान को पूरी दुनिया में बेचता है, जिससे युआन की मांग बनी रहती है. इसके अलावा चीन सरकार अपनी मुद्रा को बहुत सख्ती से कंट्रोल करती है. वहीं भारत एक बड़ा आयातक देश है, खासकर ऊर्जा और कच्चे माल के मामले में. ज्यादा आयात और कम निर्यात की वजह से रुपये पर दबाव पड़ता है और उसकी वैल्यू नीचे रहती है.

यह भी पढ़ें: कौन सा शहर है भारत का स्ट्रॉबेरी हब? विदेशों तक होती है इसकी डिमांड

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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